पंजाब के मानसा जिले में चर्चित नशा विरोधी कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की सनसनीखेज हत्या के मामले में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो यानी सीबीआई ने औपचारिक रूप से अपनी जांच शुरू कर दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पीड़ित परिवार को इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का पूरा भरोसा दिए जाने के ठीक एक दिन बाद ही एजेंसी ने इस दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए त्वरित कार्रवाई शुरू कर दी है। सीबीआई से जुड़े सूत्रों ने जानकारी दी है कि एजेंसी ने इस हाई-प्रोफाइल मामले को अपने हाथों में लेते हुए अपनी आधिकारिक एफआईआर दर्ज कर ली है और आगे की कानूनी कार्रवाई का सिलसिला शुरू कर दिया है।

सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक, जांच के दौरान अधिकारियों का मुख्य फोकस इस बात का गहराई से पता लगाना होगा कि प्रतिबंधित और नशीले पदार्थ यानी साइकोट्रोपिक दवाएं मानसा और आसपास के इलाकों में केमिस्ट की दुकानों पर खुलेआम किस तरह से बेची जा रही थीं। इस पूरी प्रक्रिया के तहत सीबीआई अधिकारी मानसा पहुंचकर पंजाब पुलिस से इस हत्याकांड से जुड़े तमाम जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में लेंगे। इसके अलावा, भ्रष्टाचार रोधी जांच एजेंसी इस मामले में मुख्य रूप से केमिस्ट अश्विनी कुमार और अन्य संदिग्ध आरोपियों की हिरासत की मांग कर सकती है, ताकि मामले की तह तक पहुंचकर सच्चाई बाहर निकाली जा सके।

यह पूरी दुखद घटना पिछले महीने 13 अक्टूबर की है, जब पंजाब के मानसा में नशा के खिलाफ खुलकर आवाज उठाने वाले और लंबे समय से अभियान चलाने वाले परविंदर सिंह झोटा की गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। मृतक परविंदर सिंह मानसा और उसके आसपास के ग्रामीण तथा शहरी इलाकों में मेडिकल स्टोरों पर प्रतिबंधित और नशे की लत लगाने वाली दवाओं की कथित अवैध बिक्री के खिलाफ लगातार विरोध प्रदर्शन और मुहिम चलाते थे। वे आम लोगों को नशे के खतरनाक दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक करने का काम करते थे और इलाके में चल रही नशा तस्करी तथा प्रतिबंधित दवाओं के अवैध कारोबार के खिलाफ बेबाकी से आवाज उठाते थे।

सोशल मीडिया पर 'झोटा' के नाम से बेहद लोकप्रिय परविंदर सिंह एंटी-ड्रग टास्क फोर्स के साथ भी सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे। उन्होंने नशे के खिलाफ स्थानीय लोगों को एकजुट करने और गांव-गांव जाकर जागरूकता अभियान चलाने में बेहद अहम भूमिका निभाई थी। उनके इन साहसी और निरंतर प्रयासों का ही असर था कि कई ग्राम पंचायतों ने आगे आकर नशे के खिलाफ कड़े प्रस्ताव भी पारित किए थे। हत्या से ठीक पहले की घटना को याद करें तो पता चलता है कि परविंदर सिंह झोटा की एक मेडिकल स्टोर संचालक के साथ नशीली दवाओं की कथित अवैध बिक्री को लेकर तीखी बहस हुई थी। इस घटना से जुड़ा एक फेसबुक लाइव वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आया था, जिसमें उन्हें एक केमिस्ट की दुकान के बाहर खड़े होकर संचालक से नशे की गोलियों और दवाओं की बिक्री के संबंध में कड़े सवाल पूछते हुए साफ देखा गया था। हालांकि, इस हत्याकांड में उस मेडिकल स्टोर संचालक की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका क्या थी, इसकी निष्पक्ष और विस्तृत जांच अब सीबीआई द्वारा की जा रही है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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