पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी द्वारा दिए गए एक भाषण ने राजनीतिक गलियारों और सोशल मीडिया पर भारी हलचल पैदा कर दी है। राजधानी इस्लामाबाद में आयोजित समारोह के दौरान राष्ट्रपति जरदारी ने अपने संबोधन में इतिहास और भूगोल से जुड़े ऐसे दावे किए, जिन्हें सुनने के बाद देश-विदेश के विशेषज्ञों और आम नागरिकों ने उनकी जनरल नॉलेज पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। उनके इस भाषण के वीडियो क्लिप सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर उनकी जमकर आलोचना हो रही है और लोग इसे लेकर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

अपने भाषण के दौरान राष्ट्रपति जरदारी ने भारत और पाकिस्तान के बीच के संबंधों और पूर्व में हुई लड़ाइयों का जिक्र किया। उन्होंने दावा किया कि मई 2025 में पाकिस्तान ने भारत के खिलाफ चार दिन की लड़ाई जीती थी। इसके बाद वह इतिहास के पन्नों में और पीछे चले गए तथा 1965 के भारत-पाक युद्ध को लेकर भी एक ऐसा दावा कर बैठे जिसने सबको हैरान कर दिया। राष्ट्रपति ने यह कह दिया कि 1965 की प्रसिद्ध लड़ाई डूरंड लाइन पर लड़ी गई थी और उस युद्ध में पाकिस्तान ने डूरंड लाइन को जीता था। उनके इस बयान के बाद इतिहास के जानकार और आम लोग पूरी तरह से चकित रह गए क्योंकि 1965 के युद्ध का डूरंड लाइन से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं है।

डूरंड लाइन असल में पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच की आधिकारिक और अंतरराष्ट्रीय सीमा है, जिसकी कुल लंबाई 2,640 किलोमीटर है। इस सीमा रेखा का निर्धारण वर्ष 1893 में एक समझौते के तहत किया गया था, उस समय तक पाकिस्तान का अस्तित्व भी नहीं था और भारत पर ब्रिटिश हुकूमत हुआ करती थी। यह सीमा ब्रिटिश राजनयिक हेनरी मोर्टिमर डूरंड और अफगानिस्तान के अमीर अब्दुर रहमान खान के बीच आपसी सीमा तय करने के लिए सहमति के आधार पर बनाई गई थी। ऐसे में राष्ट्रपति जरदारी द्वारा इस ऐतिहासिक तथ्य को नजरअंदाज करते हुए इसे 1965 की जंग से जोड़ना पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत और बेबुनियाद साबित हुआ।

राष्ट्रपति के इस भाषण के तुरंत बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई। पाकिस्तान के आम नागरिकों से लेकर जाने-माने पत्रकारों और राजनीतिक दिग्गजों ने इस बयान पर तीखा तंज कसा। एक्स पर अमजद खान नामक यूजर ने सीधा सवाल उठाया कि क्या आसिफ अली जरदारी राष्ट्रपति जैसे गरिमामयी पद के लिए मानसिक रूप से फिट हैं। उन्होंने कहा कि यदि देश के सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति को बुनियादी भौगोलिक और ऐतिहासिक जानकारियों का अभाव है, तो यह देश के लिए एक बेहद गंभीर और चिंता का विषय है।

इसके अलावा अन्य यूजर्स और विश्लेषकों ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना की। यूजर बाबा याग ने तंज कसते हुए लिखा कि शायद राष्ट्रपति महोदय को लगा कि पीओके चुनाव में हो रही धांधली से ध्यान भटकाने के लिए कुछ नया कहा जाना चाहिए, लेकिन उन्होंने डूरंड लाइन का ही गलत संदर्भ चुन लिया। प्रख्यात ब्रॉडकास्ट जर्नलिस्ट जुल्करैन इकबाल ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि लाइन चाहे डूरंड लाइन हो या नियंत्रण रेखा (एलओसी), राष्ट्रपति ने अपने इस बयान से पूरे देश का नक्शा और इतिहास ही बदलकर रख दिया है।

सिंध के पूर्व गवर्नर मुहम्मद जुबैर ने भी इस मामले पर खुलकर अपनी बात रखी और कहा कि राष्ट्रपति द्वारा सार्वजनिक मंच से ऐसी बातें कहना पूरी तरह से सच से परे और शर्मनाक है, खासकर तब जब देश का शीर्ष सैन्य और राजनीतिक नेतृत्व भी वहां मौजूद हो। पाकिस्तान की पूर्व राजनयिक मलीहा लोधी ने इसे गैर-जिम्मेदाराना और बेईमानी भरा बयान करार दिया। वहीं, डॉन अखबार के पूर्व संपादक अब्बास नासिर ने इसे सिरे से खारिज करते हुए पूरी तरह बकवास बताया। इस पूरी घटना ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि तथ्यात्मक रूप से अशुद्ध बयानबाजी देश के शीर्ष नेतृत्व को कितनी जल्दी आलोचना के घेरे में ला सकती है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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