दक्षिण एशिया के दो प्रमुख पड़ोसी देशों भारत और पाकिस्तान के बीच भू-राजनीतिक मोर्चे पर जारी तनातनी एक बार फिर गहरा गई है। इस्लामाबाद ने एक बड़ा प्रशासनिक कदम उठाते हुए अपनी सीमाओं के भीतर भारतीय नागरिक और सैन्य विमानों के प्रवेश पर लगे कड़े प्रतिबंध की समय-सीमा को अगले एक महीने के लिए और बढ़ा दिया है। इस फैसले के बाद अंतरराष्ट्रीय विमानन कंपनियों सहित भारतीय ऑपरेटरों को अपने विमानों के रूट डायवर्जन के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिससे दोनों देशों के बीच राजनयिक और रणनीतिक संबंधों में जमी बर्फ के निकट भविष्य में पिघलने के आसार बेहद कम नजर आ रहे हैं।

पाकिस्तान एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा जारी किए गए आधिकारिक 'नोटिस टू एयरमेन' यानी नोटम के अनुसार, यह प्रतिबंध आगामी चौबीस जून तक पूरी तरह से लागू रहेगा। इससे पहले यह पाबंदी चौबीस मई को समाप्त होने वाली थी, जिसे द्विपक्षीय सुरक्षा समीक्षा के बाद आगे बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। इस आधिकारिक दस्तावेज में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि पाकिस्तानी हवाई क्षेत्र किसी भी ऐसे विमान के लिए उपलब्ध नहीं होगा जो भारत में पंजीकृत है, अथवा जिसका स्वामित्व या संचालन किसी भारतीय एयरलाइन या ऑपरेटर के पास है। पाकिस्तान ने अपने संपूर्ण हवाई क्षेत्र को दो मुख्य फ्लाइट इन्फॉर्मेशन रीजन के अंतर्गत वर्गीकृत किया है, जिसमें कराची और लाहौर रीजन शामिल हैं। नया प्रशासनिक आदेश इन दोनों ही क्षेत्रों पर तत्काल प्रभाव से पूरी तरह लागू कर दिया गया है।

दोनों परमाणु संपन्न देशों के बीच हवाई सीमाओं के इस अभूतपूर्व गतिरोध की पृष्ठभूमि पिछले वर्ष जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए एक भीषण आतंकी हमले से जुड़ी हुई है। अप्रैल दो हजार पच्चीस में पहलगाम में हुए आत्मघाती आतंकवादी हमले में छब्बीस निर्दोष नागरिकों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी, जिसके बाद नई दिल्ली ने कड़ा रुख अपनाते हुए सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कड़े आर्थिक और कूटनीतिक कदम उठाए थे। इस घटना के जवाब में भारतीय वायुसेना ने अत्यंत गोपनीय और रणनीतिक स्तर पर 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। इस सैन्य कार्रवाई के तहत भारतीय लड़ाकू विमानों ने पाकिस्तान के पंजाब प्रांत और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित लश्कर-ए-तैबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे प्रतिबंधित आतंकवादी संगठनों के सक्रिय ठिकानों और प्रशिक्षण शिविरों पर सटीक हवाई हमले किए थे।

इस सैन्य जवाबी कार्रवाई के बाद दोनों देशों की सेनाओं के बीच करीब चार दिनों तक भारी गोलाबारी और सैन्य गतिरोध चला था, जिसके बाद दस मई दो हजार पच्चीस को अंतरराष्ट्रीय दबाव में युद्धविराम की घोषणा की गई थी। हालांकि, जमीनी स्तर पर सीजफायर होने के बावजूद दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध अपने ऐतिहासिक रूप से सबसे निचले स्तर पर बने हुए हैं। पाकिस्तान सरकार ने उसी दौरान भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को पूर्णतः प्रतिबंधित कर दिया था, जिसे वह तब से लगातार अलग-अलग अवधि के लिए बढ़ाता आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत किसी भी संप्रभु राष्ट्र को सुरक्षा कारणों से अपने हवाई क्षेत्र को बंद करने का कानूनी अधिकार प्राप्त है, जिसका उपयोग पाकिस्तान भारत पर रणनीतिक दबाव बनाने के लिए कर रहा है।

इस दीर्घकालिक एयरस्पेस प्रतिबंध का सीधा और व्यापक आर्थिक प्रभाव भारतीय विमानन उद्योग पर पड़ रहा है। पश्चिमी देशों, खाड़ी देशों और यूरोप की ओर जाने वाली भारतीय नागरिक उड़ानों को अब पाकिस्तान के हवाई क्षेत्र का उपयोग न कर पाने के कारण लंबा और घुमावदार रास्ता तय करना पड़ रहा है। इससे विमानों के ईंधन की खपत में भारी वृद्धि हुई है और उड़ानों के समय में भी एक से दो घंटे का अतिरिक्त इजाफा हुआ है, जिसका सीधा वित्तीय बोझ आम हवाई यात्रियों के किराए पर पड़ रहा है। रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि जब तक सीमा पार से होने वाली आतंकी गतिविधियों पर पूरी तरह से रोक नहीं लगती और दोनों पक्षों के बीच उच्च स्तरीय वार्ता दोबारा शुरू नहीं होती, तब तक दक्षिण एशियाई आकाश में उपजा यह गंभीर गतिरोध इसी प्रकार बरकरार रहने की आशंका है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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