पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी: ऑस्ट्रेलिया और अर्जेंटीना ने भारत के साथ जताई अटूट एकजुटता

आतंकवाद के क्रूर और अमानवीय चेहरे ने पिछले साल पहलगाम की शांत वादियों को जिस लहू से रंगा था, उसकी टीस आज भी पूरे देश और अंतरराष्ट्रीय समुदाय के दिलों में महसूस की जा रही है। पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी के अवसर पर वैश्विक मंच से भारत के प्रति सहानुभूति और आतंकवाद के विरुद्ध सामूहिक लड़ाई का संकल्प दोहराया गया है। भारत में ऑस्ट्रेलिया के उच्चायुक्त फिलिप ग्रीन ओएएम ने इस भयावह त्रासदी में मारे गए निर्दोष नागरिकों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए स्पष्ट किया कि आतंकवाद के खिलाफ इस निर्णायक जंग में ऑस्ट्रेलिया पूरी मजबूती के साथ भारत के साथ खड़ा है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए कहा कि बेगुनाहों का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा।

यह घटना पिछले साल 22 अप्रैल को घटित हुई थी, जब पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा की शाखा, द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) के कायर आतंकियों ने पहलगाम में 26 निहत्थे लोगों की चुन-चुन कर हत्या कर दी थी। इस खूनी खेल का शिकार हुए लोगों में 25 पर्यटक थे, जो कश्मीर की खूबसूरती निहारने आए थे, जबकि एक स्थानीय पोनी वाला भी इस हमले में मारा गया जिसने अपनी जान पर खेलकर पर्यटकों को बचाने का अदम्य साहस दिखाया था। इस हमले ने न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। बरसी के मौके पर अर्जेंटीना के राजदूत मारियानो कॉसिनो ने भी दुख साझा करते हुए कहा कि अर्जेंटीना की जनता और सरकार इस कठिन समय में भारत के साथ है और आतंकवाद के किसी भी रूप को स्वीकार नहीं किया जा सकता।

भारतीय सुरक्षा बलों ने इस कायरतापूर्ण हमले का जवाब उसी भाषा में दिया जिसे आतंकी समझते हैं। हमले के ठीक बाद भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' का बिगुल फूंका। 7 और 8 मई को चलाए गए इस ऐतिहासिक मिलिट्री ऑपरेशन के दौरान भारतीय जांबाजों ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में घुसकर नौ बड़े आतंकी ठिकानों को जमींदोज कर दिया। यह स्ट्राइक न केवल सैन्य कौशल का प्रदर्शन थी, बल्कि भारत की 'जीरो टॉलरेंस' नीति का जीवंत प्रमाण भी थी। इस ऑपरेशन ने भविष्य के संभावित खतरों को सफलतापूर्वक टालते हुए यह संदेश दिया कि भारत की संप्रभुता और उसके नागरिकों की सुरक्षा से खिलवाड़ करने वालों का अंजाम केवल सर्वनाश होगा।

आज एक साल बाद, अंतरराष्ट्रीय समुदाय का भारत के साथ खड़े होना यह दर्शाता है कि आतंकवाद एक वैश्विक समस्या है और इसका समाधान केवल सामूहिक दृढ़ता में है। 'ऑपरेशन सिंदूर' की सफलता ने भारतीय रक्षा और सामरिक क्षमता को एक नई पहचान दी है, जिसने रणनीतिक संयम और सैन्य आक्रामकता के बीच एक सटीक संतुलन स्थापित किया। यह दिन उन बेगुनाह नागरिकों की याद में समर्पित है जिन्होंने आतंक की वेदी पर अपनी जान गंवाई, और यह संकल्प भी है कि भविष्य में किसी भी आतंकवादी विचारधारा को भारतीय सीमाओं के भीतर पैर पसारने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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