ऑपरेशन सिंदूर की पहली बरसी- आधी रात, 22 मिनट और 'Justice is Served': ऑपरेशन सिंदूर की वो दास्तां जिसने बदल दिया युद्ध का इतिहास।
भारत ने एक साल पहले बहावलपुर तक आतंकी ठिकानों को ध्वस्त कर सुरक्षा का 'न्यू नॉर्मल' स्थापित किया था।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय थल सेना, वायुसेना और नौसेना के समन्वित पराक्रम को प्रदर्शित करता एक प्रतीकात्मक चित्रण।
भारतीय सैन्य इतिहास में 6 और 7 मई की मध्यरात्रि एक ऐसे अध्याय के रूप में दर्ज है, जिसने न केवल सीमा पार बैठे आकाओं के हौसले पस्त किए, बल्कि आधुनिक युद्ध कौशल की एक नई परिभाषा भी लिखी। आज से ठीक एक साल पहले 'ऑपरेशन सिंदूर' के जरिए भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी 'जीरो टॉलरेंस' नीति को क्रियान्वित किया था। यह ऑपरेशन महज एक सैन्य जवाबी कार्रवाई नहीं थी, बल्कि यह बदलते भारत की उस सामरिक शक्ति का प्रदर्शन था, जिसमें दुश्मन को उसके घर में घुसकर न केवल मारा गया, बल्कि उसकी रीढ़ की हड्डी माने जाने वाले ठिकानों को भी नेस्तनाबूद कर दिया गया।
इस सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले से तैयार हुई थी। देश में आक्रोश का माहौल था और सुरक्षा गलियारों में जवाबी रणनीति पर मंथन चल रहा था। 6 मई की रात जब पूरी दुनिया सो रही थी, तब भारतीय सशस्त्र बल एक ऐसे मिशन को अंजाम देने की तैयारी में थे, जिसकी भनक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसियों को भी नहीं लगी। ऑपरेशन को पूरी तरह गोपनीय रखने के लिए सरकार ने 7 मई को सिविल डिफेंस मॉक ड्रिल का बहाना बनाया और वायुसेना ने अभ्यास का नोटम (NOTAM) जारी किया, ताकि किसी भी प्रकार की हलचल को सामान्य प्रशिक्षण का हिस्सा माना जाए।
ऑपरेशन सिंदूर की सबसे बड़ी विशेषता इसका व्यापक दायरा और अचूक समन्वय था। साल 2016 की सर्जिकल स्ट्राइक और 2019 की एयरस्ट्राइक के विपरीत, यह अभियान नियंत्रण रेखा (LoC) से कहीं आगे पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में स्थित बहावलपुर तक जा पहुँचा। 1971 के युद्ध के बाद यह पहली बार था जब भारतीय सेना ने पाकिस्तान के इतने गहरे हिस्से में घुसकर सटीक निशाना साधा। रात ठीक 1 बजकर 4 मिनट पर कोटली अब्बास स्थित लश्कर-ए-तैयबा के फिदायीन कैंप पर हमला हुआ और इसके बाद सिलसिला शुरू हुआ कोटली गुलपुर, मेहमूना जोया, सरजल और बिंबर जैसे आतंकी अड्डों के ध्वस्त होने का। बहावलपुर में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय पर वायुसेना के प्रहार ने दुश्मन के नेटवर्क को पूरी तरह छिन्न-भिन्न कर दिया।
इस 22 मिनट के तांडव में भारत ने न केवल आतंकी अड्डों को मिटाया, बल्कि इन्फॉर्मेशन वॉरफेयर में भी जीत हासिल की। पाकिस्तानी खुफिया गुर्गों ने भारतीय पत्रकारों को भ्रमित करने और संवेदनशील सूचनाएं निकालने के कई प्रयास किए, लेकिन भारतीय रक्षा मंत्रालय के कुशल प्रबंधन ने इसे विफल कर दिया। रात 1:44 बजे जब आधिकारिक प्रेस रिलीज आई और उसके बाद सेना ने 'Justice is Served' का संदेश जारी किया, तब तक दुश्मन को संभलने का मौका तक नहीं मिला था।
जवाब में जब पाकिस्तान ने भारतीय सैन्य और नागरिक ठिकानों को निशाना बनाने की कोशिश की, तो उसे और भी करारी शिकस्त झेलनी पड़ी। भारत के अभेद्य एयर डिफेंस सिस्टम ने पाकिस्तान की ओर से भेजे गए 600 से अधिक ड्रोनों को मार गिराया। रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान को 12 से 13 लड़ाकू विमानों का नुकसान हुआ, जिनमें 5 एफ-16 हवा में और करीब 4-5 जमीन पर ही नष्ट कर दिए गए। इसके अलावा, भारत ने S-400 मिसाइल प्रणाली का उपयोग कर करीब 300 किलोमीटर दूर 'लॉन्गेस्ट किल' का विश्व रिकॉर्ड भी कायम किया।
10 मई को जब अमेरिकी हस्तक्षेप और दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच सहमति के बाद संघर्ष विराम हुआ, तब तक भारत अपना संदेश स्पष्ट कर चुका था। 'ऑपरेशन सिंदूर' ने यह साबित कर दिया कि भारत अब केवल अपनी सीमाओं की रक्षा नहीं करेगा, बल्कि आतंक के उद्गम स्थल पर जाकर उसे जड़ से खत्म करने की क्षमता और संकल्प दोनों रखता है। यह ऑपरेशन आज भी भारतीय सैनिकों के अदम्य साहस और अत्याधुनिक युद्ध तकनीक के सफल मिलन का प्रतीक माना जाता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
