ईरान-अमेरिका संघर्ष के कारण होर्मुज जलमार्ग बंद होने से कच्चे तेल के दाम दोगुने हुए, उत्पादन बढ़ाने पर विचार कर रहा है संगठन।

वैश्विक ऊर्जा बाजार इस समय अपने सबसे गंभीर संकट के दौर से गुजर रहा है। ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष के कारण रणनीतिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह से बंद हो चुका है, जिसने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को हिलाकर रख दिया है। इस भू-राजनीतिक तनाव के चलते अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचते हुए लगभग दोगुनी हो चुकी हैं। इस अभूतपूर्व संकट से निपटने और बाजार को स्थिरता देने के लिए ओपेक प्लस (OPEC+) देशों के मंत्रियों की आज यानी रविवार को एक महत्वपूर्ण ऑनलाइन बैठक होने जा रही है। पूरी दुनिया की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, क्योंकि यहीं से तय होगा कि आने वाले दिनों में ईंधन की कीमतें आम उपभोक्ताओं और वैश्विक अर्थव्यवस्था को कितना प्रभावित करेंगी।

भू-राजनीतिक संकट की शुरुआत फरवरी के अंत में हुई जब ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हमलों के बाद होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया गया। यह समुद्री मार्ग वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति की जीवनरेखा माना जाता है। आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की कुल तेल आपूर्ति का लगभग पांचवां हिस्सा, जो कि करीब 2 करोड़ बैरल प्रति दिन है, इसी संकीर्ण जलमार्ग से होकर गुजरता है। इस मार्ग के ठप होने से समुद्र में तेल टैंकर फंस गए हैं और आपूर्ति पूरी तरह से बाधित हो गई है। नतीजतन, दुनिया भर में मुद्रास्फीति और महंगाई की एक नई लहर दौड़ गई है, जिसने विकासशील और विकसित दोनों ही तरह की अर्थव्यवस्थाओं के नीति निर्माताओं को चिंता में डाल दिया है।

इस गंभीर स्थिति के बीच ओपेक प्लस संगठन तेल उत्पादन का कोटा बढ़ाकर बाजार में आपूर्ति सुधारने की योजना बना रहा है। ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख डेटा फर्म रैस्टैड एनर्जी (Rystad Energy) के वरिष्ठ विश्लेषक जॉर्ज लियोन के अनुसार, इस बैठक में संगठन अपने दैनिक उत्पादन कोटे में 1,88,000 बैरल की बढ़ोतरी करने का आधिकारिक ऐलान कर सकता है। हालांकि, बाजार विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि यह कदम जमीनी हकीकत बदलने में नाकाफी साबित हो सकता है। गठबंधन के 21 सदस्य देशों में से केवल कुछ चुनिंदा देशों जैसे रूस, इराक, अल्जीरिया और ओमान के पास ही उत्पादन बढ़ाने की वास्तविक अतिरिक्त क्षमता मौजूद है, जबकि अन्य देश तकनीकी और आर्थिक सीमाओं से जूझ रहे हैं।

जमीनी स्तर पर तेल उत्पादन के आंकड़े बेहद चिंताजनक हैं। ईरान-अमेरिका संघर्ष की शुरुआत से पहले ओपेक प्लस का दैनिक उत्पादन लगभग 4.3 करोड़ बैरल था, जो अमेरिकी नाकेबंदी और समुद्री परिवहन ठप होने के कारण गिरकर महज 3.3 करोड़ बैरल प्रति दिन रह गया है। डेटा इंटेलिजेंस फर्म केपलर (Kpler) के अनुसार, ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिकी नौसैनिक प्रतिबंधों के कारण वास्तविक उत्पादन और उपलब्धता इस आंकड़े से भी कहीं कम हो सकती है। ऐसे में केवल कागजों पर उत्पादन कोटा बढ़ाना बाजार की वास्तविक मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं दिख रहा है।

इस संकट को और गहरा करने का काम संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के एक अप्रत्याशित फैसले ने किया है। यूएई ने हाल ही में ओपेक संगठन से बाहर निकलने की घोषणा की है, जिसने इस वैश्विक तेल कार्टेल की सामूहिक शक्ति को एक बड़ा झटका दिया है। यूएई के पास कच्चे तेल के उत्पादन की भारी अतिरिक्त क्षमता मौजूद है, और वह ओपेक के कड़े उत्पादन प्रतिबंधों से मुक्त होकर स्वतंत्र रूप से अपना राजस्व अधिकतम करना चाहता है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि यदि इराक या अन्य प्रमुख उत्पादक देशों ने भी यूएई की राह पकड़ी, तो यह ओपेक प्लस गठबंधन के बिखरने की शुरुआत हो सकती है।

इस चौतरफा अनिश्चितता के बीच वर्तमान में कच्चे तेल की कीमतों को एक निश्चित सीमा से ऊपर जाने से रोकने वाला इकलौता कारक चीन बना हुआ है। केपलर के विश्लेषक हुमायूं फलकशाही के मुताबिक, चीन इस समय अंतरराष्ट्रीय बाजार से अपनी सामान्य जरूरत से काफी कम तेल खरीद रहा है। इसके बजाय, वह इस संकट काल में अपने विशाल रणनीतिक तेल भंडारों (Strategic Petroleum Reserves) का उपयोग कर रहा है। चीनी मांग में आई इस अस्थायी कमी ने तेल की कीमतों को और अधिक रिकॉर्ड ऊंचाई पर जाने से रोक रखा है, लेकिन यह दीर्घकालिक समाधान नहीं है। आज होने वाली ओपेक प्लस की यह समीक्षा बैठक वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के भविष्य को निर्धारित करने में मील का पत्थर साबित होगी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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