पश्चिम एशिया में जारी गंभीर भू-राजनीतिक तनाव और सैन्य नाकेबंदी के बीच अंतरराष्ट्रीय समुद्री क्षेत्र से एक बेहद दुखद और विचलित करने वाली मानवीय त्रासदी सामने आई है। ओमान के डुक्म पोर्ट के पास गहरे समुद्र में फंसे एक वाणिज्यिक मालवाहक जहाज 'एमटी सेलेस्टियल' (MT Celestial) पर तैनात एक भारतीय नाविक की गंभीर बीमारी के बाद तड़प-तड़प कर मौत हो गई। मस्कट स्थित भारतीय दूतावास द्वारा जारी आधिकारिक पुष्टि के अनुसार, मृतक नाविक की पहचान तमिलनाडु के रहने वाले 35 वर्षीय सेकंड ऑफिसर निशांत उर्थनाथन के रूप में हुई है। इस घटना ने खाड़ी क्षेत्र, विशेषकर होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास वाणिज्यिक जहाजों पर काम करने वाले हजारों सुरक्षाकर्मियों और नाविकों की सुरक्षा और उनके जीवन को लेकर एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा कर दिया है।

प्राप्त विवरण के अनुसार, सेकंड ऑफिसर निशांत उर्थनाथन बीते कुछ दिनों से जहाज पर गंभीर रूप से बीमार चल रहे थे, जिसके बाद उचित और समय पर चिकित्सा सहायता न मिल पाने के कारण उन्होंने दम तोड़ दिया। त्रासदी की गंभीरता इस बात से समझी जा सकती है कि अंतरराष्ट्रीय नियमों के अधीन चलने वाले इस मालवाहक जहाज पर शव को सुरक्षित रखने के लिए कोल्ड स्टोरेज या बर्फ जैसी बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। जहाज के कैप्टन द्वारा जारी एक मार्मिक वीडियो संदेश के अनुसार, भीषण गर्मी के बीच नाविक के पार्थिव शरीर को सड़ने और क्षत-विक्षत (डिकॉम्पोज) होने से बचाने के लिए क्रू मेंबर्स पिछले कई घंटों से पीने के ठंडे पानी की प्लास्टिक बोतलों को शव के चारों तरफ रखकर एक लाचार प्रयास कर रहे हैं। कैप्टन ने भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठनों से गुहार लगाते हुए कहा है कि यदि शव को तुरंत वहां से नहीं निकाला गया, तो स्थिति अत्यंत भयावह हो जाएगी।

इस विकट परिस्थिति पर संज्ञान लेते हुए ओमान की राजधानी मस्कट में स्थित भारतीय दूतावास ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा है कि वे पीड़ित परिवार और जहाज का प्रबंधन करने वाली शिपिंग कंपनी के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। दूतावास के अधिकारियों के अनुसार, ओमान के स्थानीय प्रशासन और तटीय सुरक्षा बलों के साथ समन्वय स्थापित कर निशांत के पार्थिव शरीर को जल्द से जल्द जहाज से नीचे उतारने और विमान के माध्यम से भारत वापस भेजने की कानूनी व कूटनीतिक प्रक्रियाएं तेज कर दी गई हैं। हालांकि, क्षेत्र में जारी सैन्य प्रतिबंधों के कारण इस बचाव कार्य में व्यावहारिक और तकनीकी अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है।

राजनैतिक और रणनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इस दर्दनाक घटना की मुख्य जड़ होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान तट के आसपास जारी अमेरिकी नौसेना की सख्त सैन्य नाकेबंदी (ब्लॉकेड) है। ईरान के साथ बढ़ते युद्ध और कूटनीतिक वार्ताओं के विफल होने के बाद अमेरिकी प्रशासन द्वारा इस पूरे समुद्री मार्ग को ब्लॉक करने के आदेश जारी किए गए थे। इस सैन्य घेराबंदी के परिणामस्वरूप वर्तमान में वैश्विक आर्थिक नुकसान के साथ-साथ एक बेहद गंभीर मानवीय संकट खड़ा हो गया है। इस समय होर्मुज और खाड़ी क्षेत्र में लगभग 20,000 से 23,000 वाणिज्यिक समुद्री कर्मी और नाविक विभिन्न जहाजों पर महीनों से फंसे हुए हैं, जिनमें से एक बहुत बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की है, जो इस युद्ध के पक्षकार न होने के बावजूद इसकी भारी कीमत चुका रहे हैं। इस नाकेबंदी के कारण कई जहाजों को सीधे निशाना भी बनाया जा रहा है, जिससे भारतीय समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक हितों को गहरा आघात पहुंचा है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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