ओडिशा में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद 20 लाख से अधिक नाम हटे, मल्कानगिरी और गंजम में सबसे ज्यादा डिलीशन दर्ज।

ओडिशा में मतदाता सूची के पुनरीक्षण के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। राज्य में चलाए गए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के पहले चरण के ड्राफ्ट रिपोर्ट के अनुसार, 20 लाख से अधिक मतदाताओं के नाम सूची से हटा दिए गए हैं। इस प्रक्रिया के बाद राज्य में कुल मतदाताओं की संख्या 3,33,99,591 से घटकर 3,13,87,034 रह गई है। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इन हटाये गए नामों में 8.32 लाख (2.49%) मतदाता ऐसे हैं जिनका निधन हो चुका है, जबकि 10.07 लाख (3.02%) मतदाता या तो अनुपस्थित पाए गए या उन्होंने अपना स्थान बदल लिया है।

मल्कानगिरी, जो ओडिशा का सबसे दक्षिणी विधानसभा क्षेत्र है, वहाँ सबसे अधिक मतदाता सूची से हटाए गए हैं। इस क्षेत्र में कुल 27,653 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं, जो कुल मतदाताओं का 10.96% हिस्सा है। इस क्षेत्र की एक खास जनसांख्यिकीय स्थिति है, जहाँ 1950 और 1980 के दशक में बांग्लादेश से आए विस्थापितों को सरकार द्वारा विशेष गांवों में बसाया गया था। पुनरीक्षण से पहले मल्कानगिरी में कुल 2,52,147 मतदाता थे।

जिलावार आंकड़ों पर नजर डालें तो गंजम जिला, जहाँ से सबसे अधिक प्रवासी श्रमिक देश और विदेश के विभिन्न हिस्सों में काम के लिए जाते हैं, वहां सबसे अधिक 2,07,626 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। इसके बाद कटक जिले का स्थान आता है, जहाँ 1,55,164 नाम सूची से हटाए गए हैं। राज्य की 147 विधानसभा सीटों में से 9 ऐसी सीटें हैं जहाँ 20,000 से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कुल 40 विधानसभा क्षेत्रों में 15,000 से अधिक डिलीशन दर्ज किए गए हैं, जिनमें से अधिकतर वे क्षेत्र हैं जो माइग्रेशन-प्रोन यानी प्रवास के लिए जाने जाते हैं।

इस ड्राफ्ट रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद राजनीतिक दलों ने अपनी चिंताएं जाहिर की हैं। बीजू जनता दल ने रविवार (5 जून, 2026) को इस रिपोर्ट को चुनौती दी है। पार्टी का आरोप है कि आधिकारिक तौर पर 20 लाख के दावे के मुकाबले वास्तव में 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। कांग्रेस ने भी इतनी बड़ी संख्या में नामों के हटने पर सवाल उठाए हैं।

अतिरिक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी सुशांत कुमार मिश्रा ने स्पष्ट किया है कि पुनरीक्षण के पहले चरण में कुछ विसंगतियां सामने आई हैं, जिनमें मृत मतदाताओं के नामों को हटाना शामिल है। उन्होंने यह भी बताया कि जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट रिपोर्ट में नहीं हैं, उन्हें अपील करने का पूरा मौका दिया जाएगा। निर्वाचन आयोग अब इस पूरी प्रक्रिया की समीक्षा और सुधार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है ताकि पारदर्शिता बनी रहे।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

Next Story