सिस्टम की बेरुखी ने चंद रुपयों के खातिर भाई को किया बेबस; जानें ओडिशा की यह दर्दनाक कहानी
ओडिशा में बैंक से पैसे निकालने के लिए एक बेबस भाई को अपनी मृत बहन के अवशेष कब्र से खोदकर बैंक लाने पड़े। बैंकिंग सिस्टम की जटिलता और गरीबी की झकझोर देने वाली खबर।

ओडिशा के क्योंझर जिले में मृतक बहन के बैंक खाते से जमा राशि निकालने के लिए बैंक के बाहर अवशेषों के साथ बैठा जीतू मुंडा
Tribal man carries sister remains to bank Odisha : ओडिशा के क्योंझर जिले से मानवता को शर्मसार कर देने वाली एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने बैंकिंग व्यवस्था की जटिलताओं और गरीब तबके की बेबसी को पूरी तरह नग्न कर दिया है। डायनाली गांव के रहने वाले 50 वर्षीय जीतू अपनी मृत बहन के बैंक खाते में जमा पूंजी को प्राप्त करने के लिए इतने मजबूर हो गए कि उन्हें अपनी बहन के दफन किए गए अवशेषों को कब्र से खोदकर बैंक की चौखट तक लाना पड़ा। यह हृदयविदारक दृश्य केवल एक व्यक्ति के संघर्ष की कहानी नहीं है, बल्कि यह उस प्रशासनिक संवेदनहीनता का जीवंत उदाहरण है, जहाँ नियम और कायदे मानवीय संवेदनाओं पर भारी पड़ जाते हैं।
पूरी घटना की शुरुआत दो महीने पहले हुई, जब जीतू की बहन ककरा की मृत्यु हो गई। ककरा के ओडिशा ग्रामीण बैंक की मल्लीपोसी शाखा वाले खाते में 19,300 रुपये जमा थे। अशिक्षित जीतू के लिए यह राशि उसके परिवार की तात्कालिक जरूरतों और आर्थिक संकट से उबरने के लिए बेहद महत्वपूर्ण थी। जीतू ने कई बार बैंक के चक्कर लगाए और अपनी आर्थिक तंगी का हवाला देते हुए बहन के खाते से पैसे देने की गुहार लगाई। लेकिन बैंक प्रबंधन ने नियमों का हवाला देते हुए बिना मृत्यु प्रमाणपत्र और कानूनी उत्तराधिकारी दस्तावेजों के भुगतान करने से साफ इनकार कर दिया। एक अनपढ़ व्यक्ति के लिए इन कानूनी कागजों को जुटाना पहाड़ तोड़ने जैसा साबित हुआ।
थक-हारकर और सिस्टम की दीवारों से टकराकर जब जीतू को कोई रास्ता नहीं सूझा, तो 27 अप्रैल को उन्होंने एक चौंकाने वाला कदम उठाया। अपनी बात की सत्यता साबित करने के लिए जीतू ने अपनी बहन के अवशेषों को निकाला और उन्हें लेकर सीधे बैंक पहुंच गए। बैंक परिसर में मानव अवशेषों को देखकर वहां हड़कंप मच गया और तुरंत पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने स्थिति को संभाला और जीतू को समझा-बुझाकर अवशेषों को पुनः दफनाने के लिए राजी किया। पुलिस प्रशासन ने अब मानवीय आधार पर जीतू को कानूनी दस्तावेज और मृत्यु प्रमाणपत्र बनवाने में मदद करने का आश्वासन दिया है ताकि उसे बैंक में जमा राशि मिल सके।
A man in Odisha dug up his deceased sister’s grave and brought her skeleton to the bank Just to prove she had died.He had been trying to withdraw ₹20,000 from her account, but bank officials kept insisting he bring the account holder in person. Despite repeatedly telling them… pic.twitter.com/hICEqwvPFu— Woke Eminent (@WokePandemic) April 28, 2026
यह घटना भारत के ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सेवाओं और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जहाँ एक ओर हम डिजिटल इंडिया और समावेशी बैंकिंग का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कागजी औपचारिकताएं एक गरीब और अनपढ़ आदिवासी को अपनी ही जमा पूंजी के लिए शवों के साथ भटकने पर मजबूर कर रही हैं। जीतू का यह कदम समाज और तंत्र के लिए एक ऐसी चेतावनी है, जो यह बताती है कि यदि नीतियों में संवेदनशीलता का अभाव हो, तो वे न्याय देने के बजाय आम आदमी को अपमानजनक स्थितियों की ओर धकेल देती हैं।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
