राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने देश विरोधी गतिविधियों और युवाओं को कट्टरपंथी बनाने वाले एक खतरनाक सफेदपोश नेटवर्क को लेकर अदालत में एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला खुलासा किया है। इस मामले की चार्जशीट में सामने आया है कि किस प्रकार अल-फलाह यूनिवर्सिटी से जुड़े कुछ लोग और संदिग्ध आतंकी नेटवर्क युवाओं का ब्रेनवॉश कर उन्हें 'आत्मघाती मिशन' के लिए तैयार कर रहे थे। इस हाई-प्रोफाइल मामले ने सुरक्षा एजेंसियों और आम जनता के बीच गहरी चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि इसमें पढ़े-लिखे और पेशेवर डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं।

अल-फलाह यूनिवर्सिटी के डॉक्टरों का खौफनाक नेटवर्क

NIA की चार्जशीट के मुताबिक, यह संदिग्ध आतंकी नेटवर्क ऐसे युवाओं की तलाश में रहता था जिन्हें धार्मिक और वैचारिक रूप से आसानी से प्रभावित किया जा सके। इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य आरोपी (A-1) डॉक्टर उमर उन नबी था, जो अल-फलाह यूनिवर्सिटी में मेडिसिन विभाग का पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर था। उसकी कट्टरपंथी गतिविधियों के प्रभाव में आकर कई अन्य युवक और डॉक्टर इस नेटवर्क से जुड़ते चले गए। चार्जशीट के अनुसार, इस गिरोह में ए-2 डॉक्टर मुजम्मिल शकील, ए-3 डॉक्टर अदील अहमद और ए-4 डॉक्टर शाहीन सईद जैसे नाम शामिल हैं, जो इस देश विरोधी साजिश के विभिन्न हिस्सों को संभाल रहे थे।

सिग्नल और टेलीग्राम पर होती थी गुप्त बातचीत

जांच एजेंसी द्वारा आरोपियों के डिजिटल उपकरणों की जब गहनता से जांच की गई, तो यह बात सामने आई कि ये सभी संदिग्ध आतंकी बेहद सतर्कता बरतते थे। अपनी बातचीत और रणनीतियों को छिपाने के लिए वे 'सिग्नल' और 'टेलीग्राम' जैसे सुरक्षित ऐप्स का इस्तेमाल करते थे। चार्जशीट में बताया गया है कि ये लोग सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए बैठकों के दौरान अपने मोबाइल फोन पूरी तरह बंद कर देते थे। चैट्स में स्लीपर सेल तैयार करने, इंटरनेट पर अपनी पहचान छिपाने और चैट को पूरी तरह गुप्त रखने जैसे गंभीर विषयों पर चर्चा की जाती थी, ताकि किसी भी प्रकार की ट्रैकिंग से बचा जा सके।

पार्क में दिलाई गई थी आत्मघाती मिशन की शपथ

इस चार्जशीट में आरोपी A-10 यानी यासीर अहमद डार की भूमिका का भी विस्तार से खुलासा किया गया है। वर्ष 2023 के अंत में यासीर अहमद की मुलाकात आरोपी A-7 मुफ्ती इरफान अहमद से हुई थी, जो उसके गांव में धार्मिक उपदेश देने आता था। इसके बाद उसकी मुलाकात डॉक्टर उमर उन नबी से कराई गई, जिसने उसे टेलीग्राम पर वैचारिक सामग्री वाली पीडीएफ फाइलें भेजीं और संगठन में शामिल होने के बाद एक 'कोड नेम' भी दिया। एनआईए के अनुसार, मई-जून 2025 में शोपियां पार्क में एक गुप्त बैठक के दौरान यासीर अहमद को आत्मघाती मिशन की शपथ दिलाई गई थी, जिसका वीडियो या ऑडियो रिकॉर्ड भी किया गया था। हालांकि, जब अगस्त 2025 में उसे शहादत के लिए तैयार रहने को कहा गया और उसने इनकार कर दिया, तो आरोपियों ने उसके सभी डिजिटल रिकॉर्ड और चैट्स डिलीट कर दिए।

संदिग्ध आतंकियों की सूची और उनकी भूमिकाएं

जांच एजेंसियों ने इस मामले में ए-1 से लेकर ए-13 तक के संदिग्ध आतंकियों के नाम उजागर किए हैं। सूची के अनुसार, ए-1 पर डॉक्टर उमर उन नबी था जो दिल्ली के लाल किले के पास खुद को उड़ाने वाला आतंकी और इस साजिश का मास्टरमाइंड बताया गया है। इसके अलावा ए-2 पर डॉक्टर मुजम्मिल शकील था जो विस्फोटक और हथियारों की टेस्टिंग में शामिल था। डॉक्टर अदील अहमद अरावली जंगलों में आईईडी और हथियारों के परीक्षण से जुड़ा हुआ था। जासिर बिलाल वानी तकनीकी सहायता और बम निर्माण सामग्री जुटाने का काम करता था, जबकि आमिर राशिद मीर कारों की खरीद-फरोख्त और लॉजिस्टिक्स में मदद करता था। डॉक्टर शाहीन सईद के पास से भी हथियार और आपत्तिजनक सामग्री बरामद की गई थी। इस सप्लीमेंट्री चार्जशीट में जमीर अहमद, तुफैल अहमद भट्ट और मुजफ्फर अहमद के नाम भी जोड़े गए हैं।

यह मामला इस बात का प्रमाण है कि किस प्रकार शिक्षित वर्ग के लोग भी वैचारिक बहकावे में आकर देश की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकते हैं। एनआईए की इस सख्त कार्रवाई ने इस भूमिगत नेटवर्क की कमर तोड़ने का काम किया है और आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कई और राज़ सामने आ सकते हैं।

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Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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