New Labour Codes Details : देश में श्रम सुधारों का नया दौर शुरू हो चुका है और केंद्र सरकार द्वारा तैयार किए गए लेबर कोड्स अब लाखों कर्मचारियों के कार्यस्थल अनुभव को पूरी तरह बदलने जा रहे हैं। नए प्रावधानों के लागू होते ही जिस तरह ग्रैच्युइटी, वेतन, नियुक्ति पत्र, कार्य-घंटे और स्वास्थ्य सुरक्षा प्रणाली में व्यापक परिवर्तन किए गए हैं, उन्हें कामगारों के लिए बीते कई दशकों का सबसे बड़ा सुधार माना जा रहा है। सरकार का दावा है कि यह बदलाव न केवल कर्मचारियों के अधिकार मजबूत करेगा, बल्कि कंपनियों और कामगारों के बीच पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित करेगा।

नए लेबर कोड में सबसे महत्वपूर्ण परिवर्तन ग्रैच्युइटी को लेकर किया गया है। अब किसी भी कर्मचारी को पांच वर्ष की अनिवार्य सेवा का इंतजार नहीं करना होगा। केवल एक वर्ष की नौकरी पूरी करते ही कर्मचारी ग्रैच्युइटी के पात्र बन जाते हैं। यहां तक कि कुछ कॉन्ट्रैक्ट वर्कर्स को भी इस सुविधा के दायरे में शामिल किया गया है। इससे उन लाखों कर्मचारियों को राहत मिलेगी, जो छोटी अवधि के लिए नौकरी बदलते रहते हैं और पहले इस लाभ से वंचित रह जाते थे।

काम के घंटे और ओवरटाइम व्यवस्था में भी ऐतिहासिक बदलाव किए गए हैं। कर्मचारियों को अब ओवरटाइम के लिए दोगुना वेतन देना अनिवार्य होगा। किसी भी कर्मचारी पर ओवरटाइम के लिए दबाव नहीं बनाया जा सकेगा और राज्य सरकारें इसकी अधिकतम सीमा निर्धारित करेंगी। इसके साथ ही काम के दिनों की पात्रता सीमा 240 दिनों से घटाकर 180 दिन कर दी गई है, जिससे अधिक से अधिक कर्मचारी विधिक सुरक्षा के दायरे में आएंगे।

नियुक्ति पत्र को अब हर कंपनी के लिए अनिवार्य किया गया है। किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति बिना आधिकारिक जॉइनिंग लेटर के नहीं की जा सकेगी। इस पत्र में वेतन, कार्य-घंटे, जिम्मेदारियां और रोजगार से जुड़ी आवश्यक जानकारी स्पष्ट रूप से लिखी होगी। यह कदम कर्मचारी-नियोक्ता संबंधों को अधिक पारदर्शी बनाने में निर्णायक माना जा रहा है।

केंद्र सरकार ने देशभर में न्यूनतम वेतन का एक समान ढांचा लागू करने की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया है। अब कोई भी राज्य केंद्र द्वारा तय मानक से कम न्यूनतम वेतन घोषित नहीं कर सकेगा, जिससे अलग-अलग क्षेत्रों में काम करने वाले श्रमिकों को समान अधिकार मिलेंगे और वेतन-असमानता में कमी आएगी।

ESI के दायरे को पहले से कहीं अधिक विस्तारित करते हुए दुकान, बागान और कारखानों के कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया गया है। इनके माध्यम से कर्मचारियों को वैद्यकीय बीमा, मातृत्व लाभ और अपंगता सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण लाभ मिलेंगे। इससे लाखों कामगारों को पहली बार औपचारिक स्वास्थ्य सुरक्षा का कवच मिलेगा।

मीडिया और डिजिटल सेक्टर भी इस बार सुधारों के केंद्र में रहा है। OTT प्लेटफॉर्म्स पर काम करने वाले कर्मियों से लेकर पत्रकार, डिजिटल एडिटर्स और कंटेंट क्रिएटर्स — सभी के लिए औपचारिक नियुक्ति अनिवार्य कर दी गई है। इससे इस तेजी से बढ़ते क्षेत्र में काम की पारदर्शिता और श्रमिक सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।

वेतन समय पर देना अब सभी उद्योगों के लिए कानूनी रूप से अनिवार्य है। पगार में देरी होने पर कंपनियों पर कार्रवाई की जाएगी। IT, ITES, वस्त्रोद्योग, निर्यात उद्योग और बंदरगाहों के लिए विशेष प्रावधान बनाकर यह सुनिश्चित किया गया है कि हर महीने की सात तारीख तक वेतन कर्मचारियों के बैंक खाते में पहुंच जाए।

रोज़गार-संबंधित हादसों की परिभाषा भी बदल दी गई है। अब घर से ऑफिस जाते समय या वापस लौटते समय होने वाली दुर्घटना भी रोजगार से जुड़ी दुर्घटना मानी जाएगी, जिससे कर्मचारी को सभी कानूनी लाभ मिल सकेंगे। 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए हर वर्ष मुफ्त स्वास्थ्य जांच अनिवार्य की गई है, जिसका खर्च कंपनी वहन करेगी।

नया लेबर कोड न केवल रोजगार व्यवस्था को अधिक व्यवस्थित और मानवीय बनाने की दिशा में मील का पत्थर बन रहा है, बल्कि यह कर्मचारी सुरक्षा के दायरे को भी पहले से कहीं अधिक व्यापक और समावेशी बना रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि इन सुधारों से भारत के कार्य-संस्कृति ढांचे में लंबे समय के लिए सकारात्मक बदलाव स्थापित होंगे।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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