पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक कड़ा रुख अपनाते हुए लेबनान में किसी भी प्रकार के युद्धविराम की संभावनाओं को सिरे से खारिज कर दिया है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विशेषकर अमेरिका और फ्रांस द्वारा संघर्ष विराम के लिए किए जा रहे कूटनीतिक प्रयासों को उस वक्त बड़ा झटका लगा जब इजरायली नेतृत्व ने स्पष्ट किया कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उनकी सेना 'पूरी ताकत' के साथ हमले जारी रखेगी। यह बयान ऐसे समय में आया है जब सीमा पार से रॉकेट हमलों और इजरायली हवाई हमलों ने पूरे क्षेत्र को भीषण युद्ध की कगार पर धकेल दिया है। नेतन्याहू के इस रुख ने उन अंतरराष्ट्रीय उम्मीदों पर पानी फेर दिया है जो संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान शांति वार्ता की संभावनाओं के रूप में देखी जा रही थीं।

प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी आधिकारिक निर्देशों में सेना को स्पष्ट किया गया है कि वे लेबनान में अपने अभियानों को कम न करें बल्कि रणनीतिक ठिकानों पर प्रहार जारी रखें। नेतन्याहू ने न्यूयॉर्क पहुंचने से पहले ही यह संकेत दे दिए थे कि इजरायल अपनी उत्तरी सीमा पर विस्थापित हुए नागरिकों की सुरक्षित वापसी के लिए सैन्य कार्रवाई को अनिवार्य मानता है। इजरायली रक्षा बल (आईडीएफ) ने दक्षिणी लेबनान और बेरुत के उपनगरीय इलाकों में हिजबुल्लाह के बुनियादी ढांचे, हथियार डिपो और कमांड सेंटरों को निशाना बनाना तेज कर दिया है। सरकार का तर्क है कि जब तक हिजबुल्लाह को सीमा से पीछे नहीं धकेला जाता, तब तक बातचीत का कोई भी प्रस्ताव इजरायल की सुरक्षा चिंताओं को पूरा नहीं करेगा।

कूटनीतिक मोर्चे पर अमेरिका और उसके सहयोगियों ने 21 दिनों के अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था ताकि बातचीत के लिए जमीन तैयार की जा सके। हालांकि इजरायली दक्षिणपंथी गुटों और नेतन्याहू सरकार के मंत्रियों ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार इजरायल केवल उन्हीं शर्तों पर विचार करने को तैयार है जो हिजबुल्लाह की सैन्य क्षमता को स्थायी रूप से कमजोर करती हों। अंतरराष्ट्रीय कानून और संप्रभुता के दावों के बीच लेबनान की स्थिति अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जहां नागरिक बुनियादी ढांचा लगातार हमलों की चपेट में आ रहा है। संयुक्त राष्ट्र और मानवाधिकार संगठनों ने बढ़ती मानवीय त्रासदी पर चिंता व्यक्त की है, लेकिन इजरायली पक्ष इसे राष्ट्रीय सुरक्षा का अनिवार्य हिस्सा बता रहा है।

इस घटनाक्रम का प्रभाव केवल सैन्य स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र की भू-राजनीतिक समीकरणों को भी बदल रहा है। नेतन्याहू के इस फैसले ने स्पष्ट कर दिया है कि इजरायल वर्तमान में कूटनीति के स्थान पर सैन्य श्रेष्ठता के माध्यम से शांति स्थापित करने की नीति पर चल रहा है। लेबनान में जारी यह भीषण गोलाबारी यदि लंबी खिंचती है, तो इसमें ईरान समर्थित अन्य गुटों के शामिल होने का खतरा भी बढ़ गया है। आने वाले दिन इस दृष्टि से महत्वपूर्ण होंगे कि क्या अंतरराष्ट्रीय दबाव इजरायल को अपनी रणनीति बदलने पर मजबूर कर पाता है या फिर हिजबुल्लाह और इजरायल के बीच यह टकराव एक पूर्ण क्षेत्रीय युद्ध का रूप ले लेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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