भारत और नेपाल के रिश्तों को लेकर पिछले कुछ दिनों से चल रही अटकलों के बीच अब एक नया कूटनीतिक संकेत सामने आया है। नेपाल की नई बालेन्द्र शाह सरकार ने भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री को काठमांडू आने का औपचारिक न्योता भेजा है। इससे पहले नेपाली मीडिया में यह दावा किया गया था कि भारतीय विदेश सचिव का प्रस्तावित नेपाल दौरा स्थगित कर दिया गया है और इसके पीछे प्रधानमंत्री बालेन शाह की नाराजगी को वजह बताया जा रहा था। हालांकि अब दोनों देशों के अधिकारियों ने इन खबरों को खारिज करते हुए साफ किया है कि यात्रा की कोई तय तारीख ही निर्धारित नहीं हुई थी, इसलिए स्थगन का सवाल ही नहीं उठता।

नेपाल की राजधानी काठमांडू में सत्ता परिवर्तन के बाद भारत-नेपाल संबंधों पर पूरी दक्षिण एशियाई राजनीति की नजर बनी हुई है। मार्च 2026 में हुए आम चुनावों में शानदार जीत के बाद बालेन्द्र शाह ने नई सरकार बनाई है। युवा नेतृत्व और राष्ट्रवादी छवि के कारण बालेन शाह की विदेश नीति को लेकर लगातार चर्चा हो रही है। इसी बीच भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री को भेजा गया निमंत्रण दोनों देशों के बीच संवाद बनाए रखने की दिशा में अहम माना जा रहा है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक नई दिल्ली और काठमांडू के बीच संभावित तारीखों को लेकर बातचीत जारी है। नेपाल सरकार ने कुछ अनुकूल तारीखों का सुझाव भारत को दिया है और अब नई दिल्ली उस पर विचार कर रही है। इससे पहले नेपाली मीडिया में कहा गया था कि विक्रम मिस्री 11 मई से दो दिन के नेपाल दौरे पर आने वाले थे, लेकिन यात्रा रद्द कर दी गई। इन रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि प्रधानमंत्री बालेन शाह ने मुलाकात से इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में दोनों देशों के अधिकारियों ने इन दावों को तथ्यहीन बताया।

दिप्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार नेपाल सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि विदेश सचिव के दौरे को लेकर अभी तक कोई अंतिम तारीख तय नहीं हुई थी। ऐसे में बैठक स्थगित होने का सवाल ही नहीं उठता। इस मामले से जुड़े अधिकारियों ने यह भी कहा कि दोनों देशों के बीच संवाद सामान्य रूप से जारी है और रिश्तों को आगे बढ़ाने के लिए सकारात्मक माहौल बना हुआ है।

हालांकि हाल के दिनों में कुछ मुद्दों ने भारत-नेपाल संबंधों में तनाव भी बढ़ाया है। सबसे बड़ा विवाद लिपुलेख दर्रे को लेकर सामने आया है। भारत और चीन की ओर से घोषित कैलाश मानसरोवर यात्रा में इस बार कम से कम 500 तीर्थयात्रियों के लिपुलेख दर्रे से गुजरने की योजना बनाई गई है। नेपाल ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा है कि लिपुलेख क्षेत्र पर उसका दावा है और भारत तथा चीन दोनों को इस मार्ग का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

नेपाल लंबे समय से लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा क्षेत्रों को अपना हिस्सा बताता रहा है। दूसरी ओर भारत लगातार इन दावों को खारिज करता आया है। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने हाल ही में स्पष्ट किया कि कैलाश मानसरोवर यात्रा दशकों से इसी मार्ग का इस्तेमाल करती रही है और यह कोई नई व्यवस्था नहीं है। उन्होंने कहा कि 1954 से यह यात्रा लिपुलेख दर्रे से होती आ रही है और भारत की स्थिति इस मुद्दे पर पूरी तरह स्पष्ट है।

इसी बीच दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं। भारत ने नेपाल को 1 जून को नई दिल्ली में आयोजित होने वाली इंटरनेशनल बिग कैट अलायंस (IBCA) की बैठक में शामिल होने का निमंत्रण दिया है। माना जा रहा है कि नेपाल की नई सरकार इस बैठक में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल भेज सकती है। यदि ऐसा होता है तो यह बालेन शाह सरकार की भारत की ओर पहली बड़ी राजनीतिक और कूटनीतिक भागीदारी होगी।

विशेषज्ञ मानते हैं कि नेपाल की नई सरकार एक संतुलित विदेश नीति अपनाने की कोशिश कर रही है। चीन और भारत के बीच रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण स्थिति में मौजूद नेपाल के लिए दोनों पड़ोसी देशों के साथ संतुलन बनाए रखना हमेशा चुनौतीपूर्ण रहा है। बालेन शाह सरकार भी घरेलू राजनीति और क्षेत्रीय कूटनीति के बीच संतुलन साधने की कोशिश करती दिखाई दे रही है।

भारत और नेपाल के संबंध केवल राजनीतिक नहीं बल्कि सांस्कृतिक, धार्मिक और आर्थिक रूप से भी बेहद गहरे हैं। खुली सीमा, व्यापारिक साझेदारी और लोगों के बीच मजबूत सामाजिक रिश्ते दोनों देशों को विशेष बनाते हैं। ऐसे में विदेश सचिव विक्रम मिस्री के संभावित नेपाल दौरे को केवल एक औपचारिक कूटनीतिक कार्यक्रम नहीं बल्कि भविष्य के द्विपक्षीय रिश्तों की दिशा तय करने वाले कदम के रूप में देखा जा रहा है।

आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि नई दिल्ली और काठमांडू के बीच बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। फिलहाल इतना तय है कि दोनों देशों के बीच संवाद की प्रक्रिया जारी है और हालिया विवादों के बावजूद रिश्तों को स्थिर बनाए रखने की कोशिशें तेज हो गई हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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