नेपाल में अन्न संकट का खतरा! बालेन शाह सरकार ने भारत को पुकारा- 'तुरंत खाद दे दो वरना बर्बाद हो जाएंगे हम'|
ईरान संघर्ष के कारण आपूर्ति ठप होने पर नेपाल ने भारत से जीटूजी तंत्र के तहत 80,000 टन यूरिया और डीएपी की आपातकालीन सप्लाई मांगी।

काठमांडू में उर्वरक संकट पर आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में जानकारी देते मुख्य वक्ता।
पश्चिम एशिया में जारी ईरान संघर्ष और होर्मुज जलडमरूमध्य (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) के समुद्री मार्ग में उत्पन्न हुए गंभीर व्यवधानों ने पड़ोसी देश नेपाल को एक बड़े कृषि और खाद्य सुरक्षा संकट के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है। खाड़ी देशों से होने वाली वैश्विक रासायनिक उर्वरक आपूर्ति श्रृंखलाओं के पूरी तरह ठप होने की आशंका को देखते हुए नेपाल की बालेन शाह सरकार ने अपनी खेती को बर्बादी से बचाने के लिए एक आपातकालीन और अत्यंत महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। नेपाल सरकार ने अंतरराष्ट्रीय निविदाओं की लंबी प्रक्रिया को छोड़कर भारत के साथ पूर्व में हस्ताक्षरित 'सरकार-से-सरकार' यानी जीटूजी द्विपक्षीय व्यवस्था के तहत आपातकालीन रासायनिक उर्वरक खरीदने का फैसला किया है। काठमांडू द्वारा उठाए गए इस कदम का मुख्य उद्देश्य जून महीने में शुरू होने वाले धान की रोपाई के सीजन से पहले देश में यूरिया और डीएपी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है, ताकि देश की मुख्य आबादी के लिए भोजन का संकट न पैदा हो।
नेपाल के कृषि मंत्रालय की कैबिनेट द्वारा इस एकमुश्त विशेष खरीद योजना को हरी झंडी दिए जाने के बाद प्रशासनिक स्तर पर कार्रवाइयां तेज कर दी गई हैं। नेपाल सरकार ने भारत की सरकारी स्वामित्व वाली प्रमुख आपूर्तिकर्ता कंपनी राष्ट्रीय केमिकल्स एंड फर्टिलाइजर्स लिमिटेड (आरसीएफ) से आवश्यक उर्वरकों की कीमतों और उपलब्धता की आधिकारिक सूची मांगी है। नेपाल के कृषि मंत्रालय के संयुक्त सचिव राम कृष्ण श्रेष्ठ ने इस संबंध में पुष्टि करते हुए मीडिया को बताया कि चालू सप्ताह के भीतर भारतीय कंपनी से मूल्य दरों की सूची मिलने की पूरी उम्मीद है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय कूटनीतिक और व्यापारिक स्तर पर मूल्य दरों की विस्तृत समीक्षा करने के बाद नेपाल सरकार औपचारिक रूप से वित्तीय ऑर्डर जारी करेगी, ताकि आपूर्ति की प्रक्रियाओं को तुरंत धरातल पर उतारा जा सके।
इस आपातकालीन खरीद को लेकर दोनों देशों के आधिकारिक प्रतिनिधियों के बीच समय सीमा को लेकर कूटनीतिक बातचीत जारी है। संयुक्त सचिव राम कृष्ण श्रेष्ठ के अनुसार, भारतीय कंपनी ने सामान्य व्यापारिक नियमों के तहत भुगतान प्राप्ति के एक सौ बीस दिनों के भीतर रासायनिक उर्वरक की डिलीवरी सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, नेपाल में कृषि क्षेत्र की संवेदनशीलता और धान की रोपाई के बेहद नजदीकी समय को देखते हुए बालेन शाह सरकार ने भारत से विशेष अनुरोध किया है कि इस डिलीवरी अवधि को कम करके आपातकालीन आधार पर जल्द से जल्द खेप रवाना की जाए। नेपाल सरकार का मानना है कि यदि भारत ने इस संकट काल में त्वरित सहायता नहीं की, तो नेपाल के घरेलू बाजार में खाद्य पदार्थों की जमाखोरी और कीमतों में बेतहाशा वृद्धि को रोकना असंभव हो जाएगा।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, नेपाल सरकार ने एग्रीकल्चर इनपुट कंपनी को जीटूजी तंत्र के अंतर्गत भारत से कुल अस्सी हजार टन रासायनिक उर्वरक आयात करने की सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। वैश्विक बाजार में उर्वरकों की कीमतों में आए भारी उछाल और भू-राजनीतिक अस्थिरता के कारण नेपाल की आंतरिक कृषि-सामग्री आपूर्ति प्रणाली पर इस समय अभूतपूर्व दबाव देखा जा रहा है। वर्ष दो हजार बाईस के भारत-नेपाल द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों के तहत की जाने वाली इस विशेष एकमुश्त खरीद में साठ हजार टन यूरिया और बीस हजार टन डाई-अमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) शामिल है। उल्लेखनीय है कि नेपाल ने शुरुआत में भारत से एक लाख पचास हजार टन उर्वरक की मांग करने का मसौदा तैयार किया था, परंतु देश में चल रही भारी बजटीय कमी और विदेशी मुद्रा भंडार के दबाव के कारण बाद में इस मात्रा को घटाकर अस्सी हजार टन तक सीमित करना पड़ा।
नेपाल के कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि देश की ग्रामीण अर्थव्यवस्था और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा के लिए यह समय बेहद नाजुक है। एग्रीकल्चर इनपुट कंपनी के पास वर्तमान में केवल एक लाख इकहत्तर हजार टन उर्वरक का भंडार सुरक्षित है, जबकि वैश्विक निविदाओं के तहत अनुबंधित चौरानवे हजार चार सौ पचास टन उर्वरक की आपूर्ति के वैश्विक समझौतों के रद्द होने की पूरी संभावना बन गई है। नेपाल को केवल आगामी धान की रोपाई के मुख्य मौसम में ही न्यूनतम दो लाख पचास हजार टन रासायनिक खाद की सख्त आवश्यकता होती है। ऐसी स्थिति में आपूर्ति में होने वाली थोड़ी सी भी कमी फसलों की कुल पैदावार और देश के करोड़ों किसानों की वार्षिक आय पर सीधा और विनाशकारी असर डाल सकती है।
काठमांडू के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि यदि सरकार इस समय नए ग्लोबल टेंडर जारी करने की प्रक्रिया अपनाती है, तो पूरी प्रशासनिक और लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया को पूरा होने में कम से कम दो सौ पच्चीस दिन का समय लग सकता है, जिससे चालू सीजन पूरी तरह हाथ से निकल जाएगा। यही वजह है कि बालेन शाह सरकार जून की बुवाई से पहले भारत से तत्काल जमीनी मार्ग से सप्लाई मांग रही है। नेपाल ऐतिहासिक रूप से रासायनिक खादों के लिए फारस की खाड़ी के देशों से होने वाले समुद्री आयात पर निर्भर रहा है, जिसके कारण वैश्विक शिपिंग लाइनों और अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार में होने वाली किसी भी सैन्य या कूटनीतिक रुकावट का नेपाल पर सीधा और त्वरित नकारात्मक असर पड़ता है। चावल नेपाल का मुख्य भोजन है जो देश की कुल अनाज खपत का सड़सठ प्रतिशत और दैनिक कैलोरी मात्रा का आधे से अधिक हिस्सा पूरा करता है। नेपाल में प्रति व्यक्ति चावल की औसत वार्षिक खपत एक सौ सैंतीस दशमलव पांच किलोग्राम है, जिसके कारण धान की बुवाई पर होने वाला कोई भी विपरीत प्रभाव पूरे देश को भुखमरी और गंभीर खाद्य संकट की ओर धकेल सकता है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
