नए सांसदों की शपथ से बदला समीकरण, राज्यसभा में NDA के लिए खुला बड़ा रास्ता|
नए सदस्यों के शपथ लेने के बाद राज्यसभा में NDA का संख्या बल बढ़ा है। गठबंधन अब दो-तिहाई बहुमत के और करीब पहुंच गया है, जबकि कुछ गैर-एनडीए दलों के समर्थन से समीकरण और मजबूत हो सकते हैं।

राज्यसभा में NDA का संख्या बल और दो-तिहाई बहुमत की संभावनाओं पर चर्चा जोरों पर है। नए सदस्यों के शपथ के बाद स्थिति बदल रही है।
नई दिल्ली: राज्यसभा में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की स्थिति और मजबूत हो गई है। उच्च सदन में बदले हुए संख्या बल ने एक बार फिर उन संवैधानिक संशोधनों और महत्वपूर्ण विधेयकों को लेकर चर्चा तेज कर दी है, जिनके लिए दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है।
सोमवार को नए सदस्यों के शपथ लेने के साथ ही राज्यसभा में NDA के पक्ष में समीकरण और मजबूत हुए हैं। वर्तमान स्थिति में गठबंधन को सदन में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने का वास्तविक अवसर मिलता दिखाई दे रहा है। यह स्थिति भविष्य में उन प्रस्तावों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है जिनमें लोकसभा की सदस्य संख्या बढ़ाने या महिलाओं के लिए एक-तिहाई आरक्षण लागू करने जैसे संवैधानिक संशोधन शामिल हो सकते हैं।
राज्यसभा की मौजूदा संरचना पर नजर डालें तो 242 सदस्यों वाले सदन में NDA के पास अब 141 सांसद हैं। इसके अलावा गठबंधन 10 मनोनीत और निर्दलीय सदस्यों के समर्थन पर भरोसा कर सकता है। इस समर्थन के साथ NDA की प्रभावी संख्या 151 तक पहुंच जाती है। यह आंकड़ा साधारण बहुमत से काफी ऊपर है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत के लिए आवश्यक संख्या से अभी भी 11 सीट कम है।
राजनीतिक गणित में कुछ ऐसे दल भी शामिल हैं जो न तो NDA का हिस्सा हैं और न ही विपक्षी INDIA गठबंधन के। इनमें बीजू जनता दल (BJD) और वाईएसआर कांग्रेस (YSRCP) प्रमुख हैं। राज्यसभा में BJD के 5 और YSRCP के 4 सदस्य हैं। इन दोनों दलों ने अतीत में कई महत्वपूर्ण विधायी प्रस्तावों पर केंद्र सरकार का समर्थन किया है। यदि भविष्य में इन दलों का समर्थन NDA को मिलता है तो गठबंधन की संख्या 160 तक पहुंच सकती है।
राज्यसभा में पश्चिम बंगाल की तीन सीटें भी फिलहाल खाली हैं। इन सीटों पर उपचुनाव होने की स्थिति में विधानसभा में भाजपा की मजबूत स्थिति को देखते हुए इन पर जीत की संभावना जताई जा रही है। यदि ऐसा होता है तो NDA की संख्या बढ़कर 163 तक पहुंच सकती है। 245 सदस्यों वाली पूर्ण राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 164 माना जाता है। ऐसे में गठबंधन बहुमत के बेहद करीब पहुंच जाएगा।
राजनीतिक हलकों में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कुछ बागी नेताओं को लेकर भी चर्चा बनी हुई है। बागी नेताओं की ओर से यह दावा किया गया है कि पार्टी के कुछ और राज्यसभा सदस्य इस्तीफा दे सकते हैं। यदि भविष्य में ऐसा कोई राजनीतिक घटनाक्रम होता है तो इससे उच्च सदन का गणित और बदल सकता है। हालांकि, फिलहाल इस संबंध में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है।
दूसरी ओर, लोकसभा का गणित राज्यसभा की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। लोकसभा की वर्तमान प्रभावी संख्या 540 है, क्योंकि तीन सीटें खाली हैं। दो-तिहाई बहुमत के लिए यहां 360 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। मौजूदा स्थिति में NDA इस आंकड़े से काफी दूर है।
लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस और डीएमके से जुड़े राजनीतिक घटनाक्रमों पर भी नजर बनी हुई है। तृणमूल कांग्रेस के पास लोकसभा में 28 सांसदों का समूह था। वहीं, कुछ सांसदों के अलग राजनीतिक रुख और दलों के भीतर जारी हलचलों ने नई संभावनाओं को जन्म दिया है। यदि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भविष्य में तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों के 'नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया' में विलय और शिवसेना (UBT) के 6 बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में विलय को मंजूरी देते हैं, तो NDA की संख्या में बढ़ोतरी हो सकती है। हालांकि, इसके बावजूद गठबंधन दो-तिहाई बहुमत के आंकड़े से काफी पीछे रहेगा।
राज्यसभा में नए सदस्यों के शपथ ग्रहण के बाद स्पष्ट रूप से NDA की स्थिति पहले की तुलना में मजबूत हुई है। हालांकि दो-तिहाई बहुमत का लक्ष्य अभी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है, लेकिन मौजूदा संख्या बल और संभावित राजनीतिक समर्थन के आधार पर गठबंधन इस महत्वपूर्ण आंकड़े के पहले से कहीं अधिक करीब पहुंच गया है। आने वाले समय में उपचुनावों और विभिन्न दलों के रुख पर उच्च सदन का राजनीतिक गणित काफी हद तक निर्भर करेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
