Knesset में गूंजा 'नमस्ते': मोदी का ऐतिहासिक संबोधन और भारत-इजराइल के बीच 'स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप' का आगाज़।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया इजराइल यात्रा के दौरान इजराइली संसद (Knesset) को संबोधित किया। जानें भारत-इजराइल के बीच बढ़ते रिश्तों की गहराई, IMEC इकोनॉमिक कॉरिडोर और I2U2 समूह का महत्व, जो भविष्य की वैश्विक राजनीति और व्यापार को नई दिशा देने वाले हैं।

Namaste echoes in the Knesset
भारत-इजराइल की 'खास' दोस्ती: IMEC और I2U2 के जरिए नए युग की शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया इजराइल यात्रा ने दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय लिख दिया है। 25 फरवरी 2026 को यरूशलेम स्थित इजराइली संसद, 'नेसेट' (Knesset) में दिए गए उनके ऐतिहासिक भाषण ने न केवल दोनों देशों के भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाया, बल्कि भविष्य के आर्थिक और रणनीतिक रोडमैप को भी दुनिया के सामने रखा।
Knesset में भावुक और दमदार संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी जब नेसेट पहुंचे, तो उनका स्वागत सांसदों ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट के साथ किया। मोदी ने अपना संबोधन 'नमस्ते' के साथ शुरू किया। उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के आतंकी हमलों का जिक्र करते हुए इजराइल के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की और कहा, "हम आपका दर्द समझते हैं और आपके दुख में सहभागी हैं।"
उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत आतंकवाद के खिलाफ पूरी दृढ़ता के साथ इजराइल के साथ खड़ा है। यह भाषण महज कूटनीति नहीं था, बल्कि दो प्राचीन सभ्यताओं के बीच के गहरे विश्वास की गवाही थी।
I2U2 ग्रुपिंग: विकास का नया 'क्वाड'
PM मोदी ने अपने भाषण में 'I2U2' का विशेष उल्लेख किया। I2U2 चार देशों का एक समूह है— I (इंडिया), I (इजराइल), U (यूएसए) और U (यूएई)। इसे अक्सर 'पश्चिम एशियाई क्वाड' भी कहा जाता है।
- उद्देश्य: इस समूह का मुख्य लक्ष्य जल, ऊर्जा, परिवहन, अंतरिक्ष, स्वास्थ्य और खाद्य सुरक्षा जैसे छह महत्वपूर्ण क्षेत्रों में संयुक्त निवेश को बढ़ावा देना है।
- महत्व: यह भारत के लिए पश्चिम एशिया में अपनी पकड़ मजबूत करने और इजराइल की तकनीकी विशेषज्ञता का लाभ उठाने का एक बड़ा मंच है।
IMEC कॉरिडोर: व्यापार का नया महामार्ग
भाषण का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा 'भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा' (IMEC) था। यह एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है जिसकी घोषणा 2023 के G20 शिखर सम्मेलन में हुई थी।
क्या है IMEC?
यह एक मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट नेटवर्क है जिसमें जहाज, रेल और सड़क मार्ग शामिल होंगे। यह गलियारा भारत को संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, जॉर्डन और इजराइल के रास्ते यूरोप से जोड़ेगा।
इजराइल की भूमिका:
इस कॉरिडोर में इजराइल का 'हाइफा पोर्ट' (Haifa Port) एक अहम कड़ी है। इसके जरिए भारत से आने वाला माल बहुत ही कम समय और कम खर्च में यूरोप तक पहुंच सकेगा। मोदी ने इसे वैश्विक स्थिरता और समृद्धि के लिए 'गेम चेंजर' बताया।
रिश्तों में 'विशेष' बदलाव: स्पेशल स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप
2014 के बाद से भारत और इजराइल के रिश्तों में अभूतपूर्व तेजी आई है। इस यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को 'शांति, नवाचार और समृद्धि के लिए विशेष रणनीतिक साझेदारी' (Special Strategic Partnership for Peace, Innovation & Prosperity) के स्तर पर पहुंचा दिया है।
सहयोग के कुछ प्रमुख बिंदु:
- टेक्नोलॉजी और AI: दोनों देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्वांटम कंप्यूटिंग और सेमीकंडक्टर्स में मिलकर काम करेंगे।
- मुक्त व्यापार समझौता (FTA): भारत और इजराइल जल्द ही एक बड़े व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की कोशिश कर रहे हैं, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में भारी उछाल आएगा।
- कृषि और जल प्रबंधन: इजराइल की आधुनिक सिंचाई तकनीक (डrip irrigation) पहले से ही भारतीय किसानों की मदद कर रही है, जिसे अब और विस्तार दिया जाएगा।
- UPI का विस्तार: अब भारत का डिजिटल पेमेंट सिस्टम UPI इजराइल में भी काम करेगा, जिससे पर्यटकों और व्यापारियों को आसानी होगी।
मानवता और स्थिरता की ओर कदम
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने भाषण का अंत भारत के 'वसुधैव कुटुंबकम' (दुनिया एक परिवार है) और इजराइल के 'टिकुम ओलम' (दुनिया को बेहतर बनाना) के सिद्धांतों की तुलना करते हुए किया। उन्होंने साफ कर दिया कि भारत और इजराइल की यह साझेदारी किसी के खिलाफ नहीं, बल्कि पूरी मानवता की भलाई और वैश्विक स्थिरता के लिए है। यह यात्रा दर्शाती है कि भारत अब केवल एक दर्शक नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में शांति और विकास का एक सक्रिय भागीदार बन चुका है।

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