बिहार के मुजफ्फरपुर जिले से एक बेहद दुखद खबर सामने आई है, जहां एक निजी अस्पताल में भीषण आग लगने से हड़कंप मच गया। देश की राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर में हुए भीषण अग्निकांड की स्याही अभी सूखी भी नहीं थी कि मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में तड़के लगी आग ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे ने एक बार फिर सार्वजनिक और निजी भवनों, विशेषकर अस्पतालों में अग्नि सुरक्षा के इंतजामों की पोल खोल दी है। तड़के सुबह जब मरीज और उनके तीमारदार गहरी नींद में थे, तभी अचानक अस्पताल की पांचवीं मंजिल चीख-पुकार और धुएं के गुबार में तब्दील हो गई।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह दर्दनाक हादसा गुरुवार सुबह करीब 3 बजे पेश आया। मुजफ्फरपुर स्थित प्रसाद हॉस्पिटल की पांचवीं मंजिल पर संचालित इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में अचानक शॉर्ट सर्किट हुआ। शुरुआती चिंगारी ने कुछ ही सेकंड में विकराल रूप धारण कर लिया। आईसीयू में मौजूद वेंटिलेटर, जीवन रक्षक उपकरण और मेडिकल तारों ने आग को तेजी से पकड़ लिया। देखते ही देखते आग की लपटें इतनी तेज हो गईं कि पूरे फ्लोर पर काला गाढ़ा धुआं फैल गया। उस समय आईसीयू में कई गंभीर मरीज भर्ती थे, जिन्हें हिलने-डुलने तक की स्थिति में नहीं माना जा सकता था।

जैसे ही आग की खबर अस्पताल में फैली, वहां अफरा-तफरी का माहौल बन गया। मरीजों के परिजनों और अस्पताल कर्मियों के बीच अपने लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने की होड़ मच गई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चारों तरफ सिर्फ धुआं और लोगों की चीखें सुनाई दे रही थीं। अस्पताल के कर्मचारियों ने सूझबूझ दिखाते हुए मरीजों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया, लेकिन वेंटिलेशन की कमी और तेजी से फैलते धुएं के कारण दम घुटने लगा, जिससे राहत कार्य में भारी बाधा उत्पन्न हुई। इस अफरा-तफरी के बीच कई मरीज वार्डों में ही फंसे रह गए।

हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस प्रशासन और दमकल विभाग की कई गाड़ियां तुरंत मौके पर पहुंचीं। दमकल कर्मियों ने मोर्चा संभालते हुए सबसे पहले अस्पताल की खिड़कियों को तोड़कर धुएं को बाहर निकालने का रास्ता बनाया और सीढ़ियों की मदद से रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। कड़ी मशक्कत के बाद दमकल की टीमों ने आग पर पूरी तरह से काबू पाया। इस रेस्क्यू ऑपरेशन में 15 से अधिक झुलसे और धुएं से अस्वस्थ हुए लोगों को सुरक्षित निकालकर तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उनका इलाज जारी है।

इस हादसे में हताहतों की संख्या को लेकर शुरुआती दौर में विरोधाभास देखा गया। प्राथमिक अपुष्ट खबरों और स्थानीय सूत्रों के अनुसार 10 लोगों की मौत की आशंका जताई जा रही है, हालांकि जिला प्रशासन और पुलिस ने आधिकारिक तौर पर अभी 4 मौतों की पुष्टि की है। मृतकों की शिनाख्त और पंचनामा की प्रक्रिया स्थानीय पुलिस द्वारा की जा रही है। जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने घटनास्थल का मुआयना किया। प्रशासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए घटना के कारणों की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दे दिए हैं। जांच टीम यह पता लगाएगी कि क्या अस्पताल के पास वैध फायर एनओसी (No Objection Certificate) थी और क्या आपातकालीन निकास के मानक पूरे किए गए थे।

मुजफ्फरपुर की यह घटना दिल्ली के मालवीय नगर के एक होटल में हुए अग्निकांड के ठीक एक दिन बाद हुई है, जहां 20 से अधिक लोगों की जान चली गई थी। लगातार हो रहे इन हादसों ने सुरक्षा ऑडिट पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थानों पर जहां मरीज पूरी तरह से दूसरों पर निर्भर होते हैं, वहां अग्नि सुरक्षा उपकरणों का क्रियाशील न होना बेहद गंभीर श्रेणी का अपराध है। मुजफ्फरपुर का प्रसाद हॉस्पिटल प्रशासन अब कानून के दायरे में है और इस लापरवाही के जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है। इस घटना ने पूरे बिहार को हिलाकर रख दिया है और पीड़ित परिवारों के लिए यह कभी न भूलने वाला जख्म बन गया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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