मेरठ कोर्ट के फैसले के बाद चर्चा में मथुरा जेल! क्या मुस्कान को सच में यहां दी जाएगी फांसी? जानिए पूरा मामला
मेरठ कोर्ट द्वारा सौरभ हत्याकांड में मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा सुनाए जाने के बाद मथुरा जेल के ऐतिहासिक महिला फांसी घर की चर्चा तेज हो गई है।

मेरठ की एक अदालत ने चर्चित सौरभ हत्याकांड में मृतक की पत्नी मुस्कान और उसके प्रेमी साहिल शुक्ला को फांसी की सजा सुनाई है। अदालत द्वारा इस कड़े और ऐतिहासिक फैसले का ऐलान होते ही दोनों आरोपी कोर्ट रूम में ही फूट-फूटकर रोने लगे। इस फैसले के सामने आने के बाद अब हर तरफ इस बात की चर्चा हो रही है कि क्या मुस्कान को उत्तर प्रदेश की मथुरा जिला जेल में फांसी दी जाएगी।
इस बहुचर्चित मामले में सजा के ऐलान के बाद मथुरा जेल इसलिए केंद्र में आ गई है क्योंकि उत्तर प्रदेश की मथुरा जिला जेल में ही देश का एकमात्र और ऐतिहासिक महिला फांसी घर मौजूद है। न्यायिक जानकारी के मुताबिक, यदि देश में किसी महिला कैदी को मौत की सजा दी जानी हो, तो अंग्रेजों के जमाने से बनी इस विशेष व्यवस्था वाली जगह यानी मथुरा जेल को ही एकमात्र स्थान माना जाता है। हालांकि, अभी इस फैसले के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील करने के कानूनी रास्ते पूरी तरह खुले हुए हैं, लेकिन मेरठ कोर्ट के इस फैसले ने एक बार फिर मथुरा जेल की इस ऐतिहासिक व्यवस्था को चर्चा में ला दिया है।
मथुरा जेल का यह विशेष महिला फांसी घर इससे पहले अमरोहा के चर्चित बावनखेड़ी हत्याकांड की दोषी शबनम अली के मामले को लेकर भी काफी सुर्खियों में आया था। शबनम ने अपने प्रेमी के साथ मिलकर अपने परिवार के सात सदस्यों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद उसे इसी मथुरा जेल में फांसी दिए जाने की पूरी तैयारियां की जा रही थीं, हालांकि वर्तमान में उसे अभी फांसी नहीं दी गई है और मामला न्यायालय व कानूनी प्रक्रियाओं के अंतर्गत चल रहा है।
मथुरा जेल के इस विशेष महिला फांसी घर का इतिहास यह रहा है कि सन 1947 में देश की आजादी के बाद से आज तक इस जगह पर किसी भी महिला को वास्तव में फांसी पर नहीं लटकाया गया है। जेल के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, आजादी के बाद से इस फांसी घर का इस्तेमाल नहीं हुआ है। हालांकि, अप्रैल 1998 में यहां रामश्री नाम की एक महिला को फांसी देने की पूरी तैयारियां कर ली गई थीं, लेकिन अंतिम समय में देश के राष्ट्रपति द्वारा उसकी दया याचिका स्वीकार किए जाने के कारण उसकी सजा उम्रकैद में बदल गई थी, जिससे वह फांसी टल गई थी।
मेरठ अदालत द्वारा जब सौरभ हत्याकांड में सजा का ऐलान किया गया, तो आरोपी मुस्कान हाथ जोड़कर खड़ी रही और बिलख-बिलख कर रोने लगी। वहीं, उसके सहयोगी और प्रेमी साहिल शुक्ला की आंखें भी नम थीं और सजा सुनते ही दोनों कोर्ट रूम में ही रो पड़े। इसके बाद अदालत की सभी औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी करके दोनों दोषियों को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जेल भेज दिया गया।

Lalita Rajput
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