अब आसान होगा बोरीवली से पनवेल तक का सफर ; अटकी हुई मेगा परियोजना फिर हुई शुरू
पश्चिमी रेलवे ने 7.08 किलोमीटर लंबे रेल कॉरिडोर का तकनीकी और ड्रोन सर्वे किया पूरा; मलाड में बनेगा 3 किमी का एलिवेटेड ट्रैक।

मुंबई के बोरीवली रेलवे स्टेशन पर लगा पीला साइनबोर्ड और निर्माणाधीन रेलवे पिलर, जो उपनगरीय रेल नेटवर्क विस्तार योजना के तहत बुनियादी ढांचे के विकास को दर्शाता है।
Mumbai Harbour line extension Borivali : मुंबई की जीवनरेखा कही जाने वाली लोकल ट्रेन के नेटवर्क में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी बदलाव होने जा रहा है, जो लाखों यात्रियों के दैनिक सफर की तस्वीर को पूरी तरह बदल देगा। पश्चिमी रेलवे (WR) द्वारा गोरेगांव से बोरीवली तक हार्बर लाइन सेवाओं के विस्तार की महत्वाकांक्षी घोषणा के ठीक एक साल बाद, इस ठप पड़ी परियोजना को अब एक नई और निर्णायक गति मिल गई है। रेलवे प्रशासन ने इस पूरे रूट पर पटरियों को बिछाने और भूमि अधिग्रहण की प्राथमिक प्रक्रियाओं को पूरा करते हुए एक बेहद महत्वपूर्ण सर्वेक्षण कार्य को सफलतापूर्वक संपन्न कर लिया है। यह परियोजना महज पटरियों का विस्तार नहीं है, बल्कि मुंबई के पश्चिमी उपनगर को सीधे मध्य मुंबई और नवी मुंबई से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होने वाली है।
वर्तमान में गोरेगांव स्टेशन पर समाप्त होने वाली हार्बर लाइन सेवा को अब सीधे बोरीवली स्टेशन तक 7.08 किलोमीटर आगे बढ़ाया जा रहा है। इस कॉरिडोर के निर्माण के बाद पश्चिमी रेलवे के यात्रियों को छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) और नवी मुंबई के पनवेल तक का लंबा सफर करने के लिए बार-बार ट्रेनें बदलने की झंझट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी। सबसे बड़ी और राहत की बात यह है कि इस पूरे विस्तार के बाद भी यात्री मात्र 20 रुपये के एकल सफर के टिकट में इतनी लंबी दूरी का सफर बेहद सुगमता से तय कर सकेंगे। इस रूट के बन जाने से विशेष रूप से मलाड, कांदिवली और बोरीवली के बीच रहने वाले उन लाखों नौकरीपेशा लोगों को बड़ी राहत मिलेगी, जो रोजाना काम के सिलसिले में हार्बर और सेंट्रल लाइन की तरफ रुख करते हैं।
परियोजना के तकनीकी और आधिकारिक पहलुओं को लेकर पश्चिमी रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी सुमित ठाकुर ने बेहद महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की हैं। उन्होंने स्पष्ट किया है कि रेलवे ने प्रस्तावित ट्रैक लाइन का भू-तकनीकी (जियो-टेक्निकल) सर्वेक्षण पूरा कर लिया है। इसके साथ ही, आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन की मदद से पटरियों के वास्तविक संरेखण (अलाइनमेंट) का सर्वेक्षण और सीमांकन भी सफलतापूर्वक पूरा किया जा चुका है। परियोजना को जमीन पर उतारने के लिए सबसे जरूरी कदम उठाते हुए भूमि अधिग्रहण की विस्तृत योजना और मार्ग में आने वाले वृक्षों की कटाई का एक औपचारिक प्रस्ताव राज्य सरकार को मंजूरी के लिए सौंप दिया गया है। वर्तमान में इस पूरी ट्रैक संरेखण योजना की बारीकी से समीक्षा पश्चिमी रेलवे डिवीजन द्वारा की जा रही है ताकि भविष्य में किसी भी तकनीकी बाधा से बचा जा सके।
Harbour Line extension moves ahead with ₹86.51 crore tender by Western Railway.#WRUpdates pic.twitter.com/PaU5vdQZBJ
— Western Railway (@WesternRly) June 2, 2026
इंजीनियरिंग के लिहाज से गोरेगांव से बोरीवली के बीच का यह 7.08 किलोमीटर का सफर काफी अनूठा और चुनौतीपूर्ण होने वाला है। रेलवे द्वारा तैयार की गई संरेखण योजना और डिजाइनों के अनुसार, इस मार्ग में आवश्यक पुलों का निर्माण किया जाएगा। इस पूरे रूट की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि इसमें मलाड के ऊपर का करीब 3 किलोमीटर का हिस्सा पूरी तरह से एलिवेटेड यानी हवा में होगा, जिससे घनी आबादी वाले इस क्षेत्र में बिना किसी व्यवधान के ट्रेनों का संचालन किया जा सके। रेलवे प्रशासन की योजना है कि इस आंतरिक समीक्षा प्रक्रिया के तत्काल समाप्त होते ही कॉरिडोर के वास्तविक भौतिक निर्माण कार्य के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बोलियां (टेंडर) आमंत्रित की जाएंगी, ताकि जमीनी काम को जल्द से जल्द शुरू किया जा सके।
🚆 Big boost for Mumbai commuters! The long-awaited Harbour Line extension from Goregaon to Borivali is gaining momentum, bringing direct Harbour Line connectivity to Malad, Kandivali and Borivali.
— India Tech Infra (@IndiaInfraTech) June 2, 2026
The 7.08-km project, estimated to cost ₹898 crore, aims to reduce the need for… pic.twitter.com/PHMJEY6APx
अगर इस परियोजना की पृष्ठभूमि पर नजर डालें, तो साल 2019 में रेलवे बोर्ड ने मुंबई शहरी परिवहन परियोजना-III (MUTP-III) के तहत इस विस्तार के लिए ₹ 826 करोड़ की भारी-भरकम राशि को स्वीकृति दी थी। हालांकि, साल 2020 में आई वैश्विक महामारी के कारण इस मेगा प्रोजेक्ट की रफ्तार पर ब्रेक लग गया और यह योजना साल 2021 तक के लिए ठंडे बस्ते में चली गई थी। शुरुआत में इसका संरेखण सर्वेक्षण दिसंबर 2021 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था, जिसमें महामारी के चलते काफी देरी हुई। गौरतलब है कि इससे पहले जो हार्बर लाइन सेवाएं केवल अंधेरी स्टेशन तक ही संचालित होती थीं, उन्हें अप्रैल 2018 में गोरेगांव तक बढ़ाया गया था। अब इस दूसरे चरण के विस्तार के पूरा होने के बाद मुंबई की यह लाइफलाइन उपनगरीय परिवहन व्यवस्था की सुगमता को एक नए शिखर पर ले जाएगी, जिसका सीधा सकारात्मक असर मुंबई की आर्थिक गतिशीलता पर भी पड़ेगा।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
