TasteAtlas world best sandwich : भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई की पहचान माने जाने वाले 'वडा पाव' ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपने स्वाद का परचम लहराया है। भारतीय स्ट्रीट फूड के लिए एक बेहद गौरवशाली और ऐतिहासिक क्षण में, मुंबई के दादर स्थित प्रसिद्ध 'अशोक वडा पाव' को दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खाद्य गाइड 'टेस्टएटलस' (TasteAtlas) द्वारा जारी 'जगातील सर्वात प्रसिद्ध सँडविच' (दुनिया के सबसे प्रसिद्ध सैंडविच) की वैश्विक सूची में 25वां स्थान मिला है। यह अंतरराष्ट्रीय मान्यता न केवल वैश्विक फूड चार्ट पर भारतीय खाद्य संस्कृति की बढ़ती धाक को रेखांकित करती है, बल्कि यह मुंबई के इस सबसे पसंदीदा स्ट्रीट-फूड ठिकाने को अंतरराष्ट्रीय प्रकाशवृत्त में ले आई है। दशकों से आम जनता, यात्रियों, छात्रों से लेकर नामचीन बॉलीवुड हस्तियों को अपनी सेवा देने वाला अशोक वडा पाव आज मुंबई की जीवंत सांस्कृतिक और स्ट्रीट-फूड विरासत का वैश्विक प्रतीक बन चुका है।

कीर्ती कॉलेज वडा पाव : स्वाद और प्रामाणिकता का बेजोड़ संगम

दादर पश्चिम में कीर्ती कॉलेज के समीप स्थित होने के कारण स्थानीय स्तर पर 'कीर्ती कॉलेज वडा पाव' के नाम से मशहूर इस स्टॉल के चाहने वालों की संख्या लाखों में है। वैसे तो मुंबई शहर के कोने-कोने में अनगिनत वडा पाव विक्रेता मौजूद हैं, लेकिन भोजन के पारखी अक्सर अशोक वडा पाव को इस व्यंजन का सबसे प्रामाणिक, प्रांतीय और प्रतिष्ठित केंद्र मानते हैं। इस स्टॉल की सबसे बड़ी खासियत और लोकप्रियता का मुख्य कारण इसका अनोखा “चुरा पाव” (Chura Pav) है। पारंपरिक वडा पाव से इतर, इस पाव के भीतर बेसन के घोल से बने कुरकुरे तले हुए दानों (जिसे स्थानीय भाषा में 'चुरा' कहा जाता है) को प्रचुर मात्रा में भरा जाता है, जो इसे एक अनूठा कुरकुरापन प्रदान करता है। इसे स्टॉल की विशेष तीखी लहसुन की चटनी और मीठी इमली की चटनी के साथ परोसा जाता है, जिसका स्वाद कई दशकों से मुंबईकरों की जुबान पर चढ़ा हुआ है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि : मिल मजदूरों की भूख से शुरू हुआ सफर

इस खाद्य केंद्र का गौरवशाली इतिहास सीधे तौर पर महाराष्ट्र के इस प्रसिद्ध स्ट्रीट फूड के उद्भव से जुड़ा हुआ है। ऐतिहासिक दस्तावेजों और जनश्रुतियों के अनुसार, वडा पाव के जन्मदाता के रूप में अशोक वैद्य का नाम सबसे ऊपर आता है। यह कहानी वर्ष 1966 की है, जब स्वर्गीय अशोक वैद्य ने दादर रेलवे स्टेशन के बाहर एक छोटी सी फूड कार्ट (हथगाड़ी) की शुरुआत की थी। उस दौर में मुंबई की कपड़ा मिलों में काम करने वाले हजारों मजदूरों को एक ऐसे भोजन की तलाश थी जो सस्ता, पेट भरने वाला और काम के दौरान आसानी से खाया जा सके।

अशोक वैद्य की इस बेहद साधी परंतु क्रांतिकारी सोच ने एक नया आविष्कार किया, जिसमें उन्होंने ताजे तले हुए मसालेदार आलू के वड़े को बीच से कटे हुए पाव के अंदर रखकर तीखी और मीठी चटनियों के साथ परोसना शुरू किया। यह जादुई मिश्रण जल्द ही मिल मजदूरों के बीच बेहद लोकप्रिय हो गया और देखते ही देखते इसने एक औद्योगिक शहर के साधारण भोजन से लेकर मुंबई के सबसे चहेते स्ट्रीट फूड के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर ली।

विरासत का प्रभाव और वर्तमान महत्व :

दशकों का समय बीत जाने और मुंबई की भौगोलिक बनावट बदलने के बाद भी, कीर्ती कॉलेज के पास स्थित इस ऐतिहासिक स्टॉल पर आज भी सुबह से लेकर रात तक ग्राहकों की लांबच लांब (लंबी) कतारें देखी जा सकती हैं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पीढ़ी बदलने के बावजूद ग्राहकों के अनुसार इस वडा पाव का स्वाद आज भी वैसा ही है, जैसा पचास साल पहले हुआ करता था। कॉलेज के विद्यार्थियों, दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों से लेकर अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों और फिल्मी सितारों तक, समाज के हर वर्ग के लोग इस दुकान पर खिंचे चले आते हैं। वैश्विक स्तर पर मिला यह 25वां स्थान साबित करता है कि स्थानीय और साधारण दिखने वाला स्ट्रीट फूड भी यदि अपनी प्रामाणिकता बनाए रखे, तो वह दुनिया के सबसे बड़े फूड चार्ट्स को भी चुनौती दे सकता है।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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