मुंबई में बेस्ट बस कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल; 25 लाख से अधिक यात्रियों का सफर हुआ बेपटरी
करीब 25,000 बेस्ट कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण 2,700 बसों का नेटवर्क ठप हो गया है, जिससे 25 लाख दैनिक यात्रियों को परेशानी हो रही है।

मुंबई में कर्मचारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के कारण समाचार ग्राफिक फ़ाइल "news (76).jpg" में बस डिपो के अंदर कतार में खड़ी लाल रंग की बेस्ट बसें।
Mumbai BEST bus strike : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई की रफ्तार को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है, जिसने लाखों मुंबईकरों की जिंदगी को अधर में लटका दिया है। मुंबई और उसके उपनगरों की लाइफलाइन कही जाने वाली 'बेस्ट' (BEST) बसों के पहिए अचानक थम गए हैं, जिससे पूरी मायानगरी में हाहाकार मच गया है। करीब 25,000 कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 12 यूनियनों के एक बड़े गठबंधन ने अपनी मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल का बिगुल फूंक दिया है। प्रतिदिन 25 लाख से अधिक यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाने वाला 2,700 बसों का यह विशाल नेटवर्क पूरी तरह चरमरा गया है। हालात इस कदर संवेदनशील हो चुके हैं कि शहर की सड़कों पर महज 32 बसें ही रेंगती नजर आईं, जिससे समूची परिवहन व्यवस्था पूरी तरह पंगु हो गई है।
इस अभूतपूर्व संकट की शुरुआत कर्मचारियों के उस गहरे असंतोष से हुई है, जो पिछले कई वर्षों से सुलग रहा था। हड़ताल पर उतरे कर्मचारियों की मुख्य मांगों में साल 2016 से 2021 के बीच के बकाया वेतन का भुगतान और सेवानिवृत्त कर्मचारियों की ग्रेच्युटी राशि में हो रही देरी का निपटारा शामिल है। इसके अलावा, यूनियन लगातार यह मांग कर रही हैं कि बेस्ट के बजट को बृहन्मुंबई नगर निगम (BMC) के बजट के साथ पूरी तरह से मर्ज किया जाए, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के तहत वेतन वृद्धि लागू की जाए और शहर की बढ़ती आबादी को देखते हुए बसों के बेड़े का विस्तार किया जाए। इन मांगों को लेकर कर्मचारियों का गुस्सा इस कदर फूटा कि डिपो से बाहर निकलने की कोशिश कर रही चुनिंदा बसों पर पथराव की घटनाएं भी सामने आईं, जिसमें ड्राइवरों को निशाना बनाने की कोशिश की गई।
#WATCH | Mumbai, Maharashtra: BEST employees stage a protest at Anik Depot in Wadala, stopping buses from operating. pic.twitter.com/Jfqe315knA
— ANI (@ANI) June 19, 2026
बिगड़ते हालात और कानून-व्यवस्था को बनाए रखने के लिए प्रशासन को कड़े कदम उठाने पड़े हैं। हिंसा की आशंका को देखते हुए मुंबई पुलिस ने सभी प्रमुख बस डिपो पर भारी सुरक्षा बल तैनात कर दिया है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। वहीं दूसरी ओर, इस गतिरोध को तोड़ने और कर्मचारियों को काम पर लौटने के लिए मजबूर करने के उद्देश्य से बेस्ट प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार करते हुए आवश्यक सेवा कानून (Essential Services Laws) लागू कर दिया है। कानूनी कार्रवाई के इस डंडे के बावजूद प्रदर्शनकारी कर्मचारी पीछे हटने को तैयार नहीं हैं, जिससे प्रशासन और यूनियनों के बीच का टकराव बेहद गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है।
इस औद्योगिक विवाद की सबसे भारी कीमत मुंबई की आम जनता को चुकानी पड़ रही है, जो सुबह से ही सड़कों पर बेबस खड़ी है। बस स्टॉप्स पर किलोमीटर लंबी कतारें देखी जा रही हैं और लोग लोकल ट्रेनों, ऑटोरिक्शा तथा टैक्सियों की तरफ भाग रहे हैं, जो पहले से ही अपनी क्षमता से अधिक यात्रियों से खचाखच भरी हुई हैं। अचानक बढ़ी इस भीड़ के कारण मुंबई की लाइफलाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेनों पर भी भारी दबाव देखा जा रहा है। यह हड़ताल सिर्फ एक परिवहन संकट नहीं है, बल्कि यह इस बात का एक बड़ा प्रमाण है कि देश के सबसे व्यस्त महानगरों में से एक की पूरी अर्थव्यवस्था और दैनिक जीवन को 'बेस्ट' की सेवाएं किस कदर प्रभावित करती हैं। जब तक यह गतिरोध दूर नहीं होता, तब तक मुंबईकरों को इस भीषण दुविधा और सफर की प्रताड़ना से राहत मिलने की कोई उम्मीद नजर नहीं आ रही है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
