मुंबई के लाखों कॉमन मैन के पेट पर महंगाई का संकट; जानें क्या अब ठेले के वड़ा पाव भी होंगे महंगे?
लागत और परिवहन खर्च बढ़ने के कारण मुंबई में लोकल बेकरियों ने ब्रेड-पाव के दाम 5 रुपये तक बढ़ाए, स्ट्रीट फूड की कीमतों पर पड़ेगा असर.

मुंबई की एक प्लेट में रखी हुई मिर्च और लाल चटनी के साथ दो वड़ा पाव की मुख्य खाद्य सामग्री, ब्रेड-पाव के बढ़े दामों के असर के संदर्भ में.
Mumbai bread price hike : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में आम आदमी की जेब पर महंगाई का एक और बड़ा बोझ आ पड़ा है. हाल ही में दूध की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के बाद अब मुंबईकरों को एक और तगड़ा झटका देते हुए पूरे शहर में ब्रेड और पाव की कीमतों में तत्काल प्रभाव से पांच रुपये तक का इजाफा कर दिया गया है. अभी चंद दिनों पहले ही अमूल और मदर डेयरी जैसी दिग्गज कंपनियों ने दूध के दाम में प्रति लीटर दो रुपये की बढ़ोतरी की थी, और अब इस नए फैसले ने मध्यम वर्ग व कामकाजी आबादी की कमर तोड़ दी है. ब्रेड और पाव के दामों में आई इस तेजी का सीधा असर मुंबई के उस विशाल कार्यबल पर पड़ेगा, जिसका रोजमर्रा का गुजारा वड़ा पाव, मिसल पाव, भाजी पाव और सैंडविच जैसे सस्ते व सुलभ स्ट्रीट फूड पर निर्भर करता है.
बाजार से प्राप्त नई मूल्य सूची के अनुसार, सैंडविच ब्रेड जो पहले चालीस रुपये में उपलब्ध थी, वह अब बढ़कर पैंतालीस रुपये की हो गई है. इसी तरह साधारण व्हाइट ब्रेड की कीमत बीस रुपये से बढ़कर बाईस रुपये, ब्राउन ब्रेड पैंतालीस रुपये से बढ़कर पचास रुपये, होल व्हीट ब्रेड पचपन रुपये से बढ़कर साठ रुपये और स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने वालों की पसंदीदा मल्टीग्रेन ब्रेड साठ रुपये से बढ़कर पैंसठ रुपये के स्तर पर पहुंच गई है. स्थानीय बेकरियों ने न केवल ब्रेड के पैकेट बल्कि सिंगल पाव की कीमतों में भी आनुपातिक बढ़ोतरी की है. बेकरी एसोसिएशन और स्थानीय उत्पादकों का तर्क है कि उत्पादन लागत में बेतहाशा वृद्धि होने के कारण उनके पास कीमतें बढ़ाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा था. प्लास्टिक पैकेजिंग सामग्री की बढ़ती लागत, परिवहन खर्च में बढ़ोतरी, आयातित कच्चे माल की महंगाई और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कमजोर होते रुपये के कारण बेकरी उद्योग को भारी घाटे का सामना करना पड़ रहा था.
इस मूल्य वृद्धि के पीछे चौतरफा बढ़ रही ईंधन और कमर्शियल लागत भी एक मुख्य कारक बनकर उभरी है. चालू माह की पहली तारीख को ही देश में कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दामों में नौ सौ तिरानवे रुपये की भारी वृद्धि दर्ज की गई थी, जिसके ऊपर से पिछले एक सप्ताह के भीतर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में दो बार संशोधन किया गया है. इस ईंधन संकट के कारण बेकरियों तक मैदा, चीनी और तेल जैसे कच्चे माल को पहुंचाने तथा वहां से तैयार ब्रेड-पाव को खुदरा दुकानों तक सप्लाई करने का लॉजिस्टिक्स खर्च काफी बढ़ गया है. इसी नुकसान की भरपाई करने के लिए बेकरियों ने अंतिम उपभोक्ताओं पर इस मूल्य वृद्धि को स्थानांतरित किया है.
इस आर्थिक बदलाव का सबसे बड़ा और व्यावहारिक असर मुंबई की पहचान बन चुके 'वड़ा पाव' की कीमतों पर पड़ने जा रहा है. आमतौर पर मुंबई के विभिन्न इलाकों और ठेलों पर एक वड़ा पाव पंद्रह से पच्चीस रुपये के बीच बिका करता था, लेकिन पाव के दाम बढ़ने से अब इसकी एक प्लेट की कीमत में औसतन दो से पांच रुपये तक की बढ़ोतरी होना तय माना जा रहा है. यानी आने वाले दिनों में ग्राहकों को एक वड़ा पाव के लिए अठारह से तीस रुपये के बीच का भुगतान करना होगा. यह स्थिति उन लाखों दिहाड़ी मजदूरों, ऑटो चालकों और दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों के लिए गहरी चिंता का विषय है, जिनके लिए वड़ा पाव महज एक स्नैक नहीं बल्कि दोपहर के भोजन का मुख्य हिस्सा है. मुंबईकरों का कहना है कि लगातार बढ़ती जा रही इस महंगाई ने उनके घरेलू बजट को पूरी तरह से असंतुलित कर दिया है.

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
