लश्कर कमांडर मोहम्मद लतीफ भट पर 15 लाख का इनाम घोषित: 22 साल के इस खूंखार आतंकी की तलाश में जुटी पुलिस|
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा कमांडर मोहम्मद लतीफ भट की गिरफ्तारी के लिए 15 लाख रुपये का नकद इनाम घोषित किया है।

वांटेड पोस्टर और आतंकवादी मोहम्मद लतीफ भट की तस्वीर जम्मू-कश्मीर में गिरफ्तारी की सूचना देने पर इनाम के संदर्भ में।
जम्मू-कश्मीर में सक्रिय आतंकवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों ने अपना शिकंजा कसना शुरू कर दिया है, और इस बार एजेंसियों के निशाने पर एक ऐसा युवा चेहरा है जिसने बेहद कम उम्र में खूंखार आपराधिक और आतंकी गतिविधियों की दुनिया में बड़ा मुकाम हासिल कर लिया है। लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के इस खतरनाक कमांडर का नाम मोहम्मद लतीफ भट है, जिसकी उम्र महज 22 वर्ष बताई जा रही है। अपनी फर्राटेदार अंग्रेजी और शातिर कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाला यह आतंकी वर्तमान में सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने इस कुख्यात आतंकवादी को गिरफ्तार करने या फिर उसकी गिरफ्तारी में सहायक पुख्ता जानकारी देने वाले शख्स के लिए 15 लाख रुपये के भारी-भरकम नकद इनाम की आधिकारिक घोषणा की है। पुलिस का मानना है कि केंद्र शासित प्रदेश में हाल के दिनों में हुई कई सनसनीखेज टारगेटेड हत्याओं और आतंकी वारदातों के पीछे इसी कमांडर का मुख्य हाथ रहा है।
यह पूरा मामला तब और ज्यादा सुर्खियों में आया जब घाटी के प्रमुख और सार्वजनिक स्थानों पर पुलिस ने इस आतंकवादी के बड़े-बड़े 'वॉन्टेड' पोस्टर चस्पा कर दिए। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मोहम्मद लतीफ भट मुख्य रूप से 22 जुलाई को अनंतनाग कस्बे के व्यस्त बाजार में यात्रा ड्यूटी पर तैनात हेड कांस्टेबल आशिक हुसैन कुरैशी की निर्मम हत्या में सीधे तौर पर शामिल रहा है। सुरक्षा बलों द्वारा जारी किए गए इन पोस्टरों में उस तस्वीर का भी इस्तेमाल किया गया है जो घटना स्थल के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज से निकाली गई थी, जिसमें इस आतंकवादी को पुलिसकर्मी की हत्या के बाद बड़ी चालाकी से मौके से भागते हुए साफ देखा जा सकता है।
गौरतलब है कि साल 1989 में जब से घाटी में आतंकवादी हिंसा का दौर शुरू हुआ है, तब से लेकर अब तक कुल 1,614 जम्मू-कश्मीर पुलिस कर्मियों ने देश और कानून की रक्षा करते हुए आतंकवाद के खिलाफ लड़ते हुए अपने प्राणों की सर्वोच्च आहुति दी है। इस लंबी सूची में नियमित अधिकारी, निचले रैंक के बहादुर कांस्टेबल और सैकड़ों विशेष पुलिस अधिकारी यानी एसपीओ शामिल हैं। इन जवानों का बलिदान इस बात का गवाह है कि सुरक्षा बल किस प्रकार विपरीत परिस्थितियों में डटे हुए हैं। इसके बावजूद आतंकी संगठन लगातार गैर-स्थानीय लोगों और सुरक्षा कर्मियों को निशाना बनाने की साजिशें रच रहे हैं। इसका एक और भयानक उदाहरण 31 जुलाई को देखने को मिला, जब कुलगाम जिले के केल्लम गांव में आतंकवादियों ने दो गैर-स्थानीय ईंट भट्ठा मजदूरों को अपनी गोली का शिकार बना दिया। छत्तीसगढ़ के मूल निवासी दीपक और बोपिंदर नामक इन दोनों मजदूरों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाई गईं। दीपक की मौत तो उसी दिन अनंतनाग के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हो गई थी, जबकि गंभीर रूप से घायल बोपिंदर को श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर आयुर्वेद संस्थान (एसकेआईएमएस) में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के तमाम अथक प्रयासों और आधुनिक चिकित्सा के बावजूद बोपिंदर भी जिंदगी की जंग हार गए और 1 अगस्त को एसकेआईएमएस श्रीनगर में उनका निधन हो गया।
इन वारदातों के बाद से ही सुरक्षा बलों ने दक्षिण कश्मीर के तमाम जिलों और जम्मू प्रांत के कई संवेदनशील हिस्सों में बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान शुरू कर दिया है। लतीफ भट की तस्वीर वाले इन वॉन्टेड पोस्टरों के जरिए आम नागरिकों से अपील की गई है कि यदि किसी के पास भी इस लश्कर कमांडर के ठिकाने या गतिविधियों के बारे में कोई भी विश्वसनीय जानकारी हो, तो वह तुरंत सुरक्षा एजेंसियों के साथ साझा करे। पुलिस ने जनता को पूरा भरोसा दिलाया है कि सूचना देने वाले व्यक्ति की पहचान को पूरी तरह से गुप्त रखा जाएगा ताकि उसकी सुरक्षा पर कोई आंच न आए।
सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, मोहम्मद लतीफ भट उस वक्त पहली बार मुख्य चर्चा में आया था जब दक्षिण कश्मीर में एक बड़ा शोपियां एनकाउंटर हुआ था। उस पांच दिन तक चले भीषण मुठभेड़ के दौरान वह लश्कर-ए-तैयबा के तत्कालीन टॉप कमांडर जाकिर गनाई के साथ एक घर में फंस गया था। हालांकि लंबी गोलीबारी और ऑपरेशन के दौरान सुरक्षा बलों ने मुख्य कमांडर जाकिर गनाई को तो मार गिराने में सफलता हासिल कर ली थी, लेकिन शातिर लतीफ भट अंधेरे और स्थानीय भौगोलिक स्थिति का फायदा उठाकर वहां से भाग निकलने में कामयाब रहा था। खुफिया एजेंसियों को पुख्ता शक है कि उस घटना के बाद से ही लतीफ भट ने सीमा पार बैठे अपने आकाओं और पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स के निर्देशों पर काम करना शुरू किया। उसने घाटी में बाहरी नागरिकों और सुरक्षा बलों पर सुनियोजित तरीके से हमले करने के लिए मृत आतंकवादियों के स्लीपर सेल्स और ओवर ग्राउंड वर्कर नेटवर्क को एक बार फिर से बेहद आक्रामक ढंग से सक्रिय कर दिया है।
अधिकारियों का यह भी मानना है कि लतीफ भट एक हाइब्रिड आतंकवादी की श्रेणी में आता है, यानी वह ऐसे 'ओवर ग्राउंड वर्कर्स' का हिस्सा रहा है जिन्हें विध्वंसक हमलों को अंजाम देने के लिए स्थानीय स्तर पर तैयार किया जाता है और जो सामान्य दिनों में आम नागरिकों की तरह समाज के बीच छिपकर रहते हैं। इन सभी हमलों की कार्यशैली को देखने से यह स्पष्ट होता है कि ये वारदातें लश्कर से जुड़े संगठन 'द रेजिस्टेंस फ्रंट' (TRF) के तौर-तरीकों से पूरी तरह मेल खाती हैं। अमरनाथ यात्रा की सुरक्षा ड्यूटी के दौरान अनंतनाग के लाल चौक इलाके में जिस तरह से जवान को गोली मारकर हमलावर फरार हुआ था, उसमें भी इसी मॉड्यूल और लतीफ की संलिप्तता के पुख्ता प्रमाण मिले हैं।
मात्र 22 वर्ष की आयु वाला यह युवा आतंकवादी कुलगाम जिले के ख्रेवन चदेर, नई बस्ती का रहने वाला है। गौर करने वाली बात यह है कि मारे गए लश्कर कमांडर जाकिर अहमद गनी और लतीफ भट दोनों एक ही जिले से ताल्लुक रखते थे। लतीफ की शुरुआती पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो उसने भान, कुलगाम के एक पब्लिक इंग्लिश-मीडियम स्कूल से आठवीं कक्षा तक की पढ़ाई पूरी की थी और इसके बाद राजकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय (GHSS) अशमुजी से अपनी बारहवीं कक्षा की पढ़ाई संपन्न की। उच्च शिक्षा के लिए उसने गवर्नमेंट डिग्री कॉलेज (GDC) कुलगाम में भी दाखिला लिया था, लेकिन डिग्री पूरी करने से पहले ही वह गलत संगत में पड़ गया। आतंकवादी गुटों में शामिल होने से पहले उसने ख्रेवन में एक बीडिंग मशीन यूनिट में बढ़ई के रूप में भी कुछ समय तक काम किया था। सुरक्षा बलों का मानना है कि मारे गए आतंकी जाकिर द्वारा कट्टरपंथी विचारधारा के रंग में रंगे जाने के बाद वह वर्ष 2025 की शुरुआत में अपने घर से फरार हो गया और पूरी तरह से आतंक की दलदल में उतर गया। वर्तमान में देश की सुरक्षा एजेंसियां और जम्मू-कश्मीर पुलिस इस खूंखार कमांडर को दबोचने के लिए हरसंभव प्रयास कर रही हैं, और इस 15 लाख के इनाम की घोषणा के बाद से उसकी तलाश का दायरा और अधिक व्यापक हो चुका है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
