फ्रांस के एवियन में आयोजित जी7 शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की मुलाकात एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना के रूप में देखी जा रही है। दोनों नेताओं के बीच यह औपचारिक संवाद करीब 16 महीने के लंबे अंतराल के बाद हुआ है। पिछली बार दोनों नेताओं की मुलाकात फरवरी 2025 में वॉशिंगटन डीसी स्थित व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में हुई थी। इस वर्तमान भेंट को वैश्विक और द्विपक्षीय दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि पिछले कुछ समय से भारत और अमेरिका के रणनीतिक संबंधों में कई गंभीर मुद्दों को लेकर स्पष्ट तनाव बना हुआ है।

भारत और अमेरिका के संबंध वर्तमान में पिछले एक दशक के सबसे चुनौतीपूर्ण दौर से गुजर रहे हैं। इस कूटनीतिक तनाव के केंद्र में ओमान के समीप अमेरिकी नौसेना द्वारा की गई कार्रवाई है, जिसमें तीन भारतीय नाविकों की दुखद मृत्यु हो गई थी। भारत ने इस घटना पर कड़ा रुख अपनाते हुए विदेश मंत्री एस. जयशंकर के माध्यम से अपने अमेरिकी समकक्ष मार्को रुबियो के समक्ष कड़ी आपत्ति दर्ज कराई थी। इस दौरान अमेरिका द्वारा भारत को दिए गए निर्देशों ने दोनों देशों के बीच असहज स्थिति पैदा कर दी, जिससे संबंधों में कड़वाहट बढ़ी है।

व्यापारिक मोर्चे पर भी दोनों देशों के बीच जटिलताएं कम नहीं हुई हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल की शुरुआत से ही टैरिफ संबंधी निर्णयों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को प्रभावित किया है। शुरुआती दौर में लगाए गए 25 प्रतिशत टैरिफ को रूसी तेल की खरीद के आधार पर बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया गया था, जिससे भारतीय व्यापारिक हितों को झटका लगा। हालांकि, ट्रेड डील पर सहमति बनने के बाद इसे घटाकर 18 प्रतिशत तक लाया गया है, लेकिन व्यापक व्यापारिक समझौतों पर बातचीत अभी भी एक अनिश्चित दौर में है।

इसके अतिरिक्त, भू-राजनीतिक मोर्चे पर ट्रंप प्रशासन का पाकिस्तान के प्रति नरम रुख भारत के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। मई 2025 के भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा इस्लामाबाद के समर्थन में दिए गए बयानों और आतंकी सैन्य प्रमुख असीम मुनीर के साथ संबंधों ने नई कूटनीतिक चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। इसके अलावा क्वाड शिखर सम्मेलन से दूरी, तेजस लड़ाकू विमान के इंजनों की डिलीवरी में देरी और एच-1बी वीजा शुल्क में भारी वृद्धि जैसे मुद्दों ने द्विपक्षीय सहयोग के दायरे को संकुचित कर दिया है। फ्रांस में हुई यह संक्षिप्त मुलाकात क्या इन पुरानी तल्खियों को मिटाने का मार्ग प्रशस्त करेगी या मतभेद कायम रहेंगे, यह भविष्य की कूटनीतिक गतिविधियों पर निर्भर करेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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