संसद में शक्ति परीक्षण: क्या परिसीमन बिल के लिए जरूरी आंकड़े जुटा पाएगी मोदी सरकार?
परिसीमन बिल पास कराने के लिए एनडीए गठबंधन को और कितने सांसदों की है जरूरत, जानिए संसद के दोनों सदनों का ताजा अंकगणित।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह संसद भवन के संदर्भ में रणनीतिक चर्चा करते हुए।
देश की संसद में एक बार फिर परिसीमन विधेयक को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म है। केंद्र में सत्तारूढ़ एनडीए गठबंधन अब इस महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन को पारित कराने के लिए आवश्यक जादुई आंकड़े की तलाश में अपनी सक्रियता बढ़ा चुका है। राजनीतिक गलियारों में यह बहस तेज है कि क्या आगामी मानसून सत्र में सरकार के पास दोनों सदनों में वह दो-तिहाई बहुमत होगा, जो परिसीमन बिल की राह प्रशस्त कर सके। पिछले कुछ महीनों में बदले राजनीतिक घटनाक्रमों ने सरकार के हौसले बुलंद किए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि लक्ष्य अभी भी पूरी तरह हासिल नहीं हुआ है।
अप्रैल माह में महिलाओं के लिए आरक्षण और परिसीमन से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक के दौरान सरकार को लोकसभा में अपेक्षित सफलता नहीं मिल सकी थी। तत्कालीन स्थिति का विश्लेषण करें तो 543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 362 सदस्यों का समर्थन आवश्यक था, परंतु तीन सीटें रिक्त होने के कारण प्रभावी आंकड़ा 360 पर आ गया था। उस दिन 12 सांसदों की अनुपस्थिति ने मतदान को और भी जटिल बना दिया था, जिसके चलते मतदान करने वाले सदस्यों की संख्या के आधार पर जरूरी आंकड़ा 352 रह गया था। बिल के पक्ष में 298 और विपक्ष में 230 मत पड़े थे, जिससे सरकार 54 वोटों के अंतर से पीछे रह गई थी।
वर्तमान परिदृश्य में, टीएमसी और शिवसेना (यूबीटी) जैसे दलों के भीतर हुई टूट और उन सांसदों के रुख ने एनडीए को एक नई मजबूती प्रदान की है। आंकड़ों के अनुसार, यदि उन्हीं परिस्थितियों को आधार माना जाए, तो एनडीए सरकार को इन दलों के कुल 26 सांसदों का अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है। बावजूद इसके, दो-तिहाई बहुमत के जादुई आंकड़े तक पहुंचने के लिए अभी भी 28 सांसदों की कमी बनी हुई है। इस रिक्त स्थान को भरने के लिए अब सत्ताधारी गठबंधन की नजरें तमिलनाडु की प्रमुख पार्टी डीएमके पर टिकी हैं।
सूत्रों के अनुसार, एनडीए के रणनीतिकार डीएमके के साथ निरंतर संपर्क में हैं। यदि डीएमके कांग्रेस के साथ अपने हालिया मतभेदों और परिसीमन के स्वरूप पर सहमति के चलते बिल का समर्थन करती है, तो एनडीए के पास 22 अतिरिक्त सांसदों का बल आ जाएगा। इससे बहुमत का अंतर मात्र 6 सांसदों तक सिमट जाएगा। इसके अतिरिक्त, विपक्ष के छोटे दलों के साथ भी सरकार की गोपनीय बातचीत जारी है, जिससे समीकरण किसी भी क्षण बदल सकते हैं।
राज्यसभा में भी स्थिति का आकलन काफी रोचक है। 245 सदस्यीय उच्च सदन में दो-तिहाई बहुमत के लिए 164 सांसदों की आवश्यकता होती है, जो कि तीन सदस्यों के इस्तीफे के बाद 162 रह गई है। एनडीए वर्तमान में 150 सांसदों के साथ अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। यदि राज्यसभा में भी डीएमके के 8 सांसदों का समर्थन सरकार को मिल जाता है, तो यह संख्या 158 तक पहुंच जाएगी, जिससे सरकार जादुई आंकड़े से मात्र 4 कदम दूर रह जाएगी। संसद के मानसून सत्र में होने वाले आगामी घटनाक्रम न केवल इस बिल के भविष्य का निर्धारण करेंगे, बल्कि देश की विधायी दिशा को भी एक नई तस्वीर प्रदान करेंगे।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
