MNS Railway Protest Mumbai : मुंबई से कोंकण जाने वाले आम 'चाकरमानियों' (कामगारों) के लिए जीवनरेखा मानी जाने वाली रत्नागिरी-दादर पैसेंजर ट्रेन को लेकर सियासी पारा गरमा गया है। राज ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) ने इस मुद्दे पर बेहद आक्रामक रुख अख्तियार कर लिया है। मनसे ने स्पष्ट शब्दों में रेलवे प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि अगले 15 दिनों के भीतर इस ट्रेन को पूर्ववत दादर स्टेशन तक बहाल नहीं किया गया, तो वे उत्तर प्रदेश और बिहार जाने वाली लंबी दूरी की एक्सप्रेस ट्रेनों का चक्का जाम कर देंगे।

यह विवाद तब शुरू हुआ जब कोरोना काल के बाद रेलवे ने बिना किसी ठोस कारण के इस ऐतिहासिक पैसेंजर ट्रेन को दादर के बजाय सिर्फ दिवा स्टेशन तक ही चलाने का निर्णय लिया। कोंकण क्षेत्र के हजारों यात्रियों के लिए दिवा जाकर ट्रेन पकड़ना एक बड़ी असुविधा बन गया है। मंगलवार को मीडिया से रूबरू होते हुए मनसे नेता संदीप देशपांडे ने कड़े लहजे में कहा कि कोंकण के लोगों की सहिष्णुता की परीक्षा न ली जाए। उन्होंने सीधे तौर पर रेलवे को 15 से 20 दिनों की समय सीमा देते हुए 'मनसे स्टाइल' में आंदोलन शुरू करने का संकेत दिया है।

अन्याय के खिलाफ 'मनसे' का हल्लाबोल :

मनसे के वरिष्ठ नेता नितिन सरदेसाई ने रेलवे के तर्कों को सिरे से खारिज करते हुए सवाल उठाया कि जब कोंकण के लोगों ने रेलवे के लिए अपनी जमीनें दीं, तो आज उनके साथ ही यह सौतेला व्यवहार क्यों किया जा रहा है? रेलवे प्रशासन का दावा है कि पैसेंजर ट्रेन को दादर तक लाने से मुंबई लोकल के समय सारिणी (Timetable) में बाधा आती है। इस पर सरदेसाई ने पलटवार करते हुए कहा कि एक तरफ सरकार रो-रो सेवाएं शुरू कर रही है, लेकिन आम आदमी की सस्ती ट्रेन पर चुप्पी साधे हुए है।

कोंकणवासियों की व्यथा को स्वर देते हुए मनसे नेताओं ने निम्नलिखित प्रमुख बिंदु उठाए हैं:

  • स्थानीय प्रतिनिधियों की विफलता : महाराष्ट्र के सांसद इस गंभीर मुद्दे को संसद में प्रभावी ढंग से क्यों नहीं उठा रहे हैं?
  • सड़क मार्ग की बदहाली : पिछले 25 वर्षों से मुंबई-गोवा राजमार्ग का काम अधर में लटका है, जिससे रेल मार्ग ही एकमात्र सहारा बचा है।
  • यात्रियों की परेशानी : दिवा स्टेशन पर कनेक्टिविटी की कमी के कारण बुजुर्गों और बीमार यात्रियों को भारी मशक्कत करनी पड़ती है।

इस पूरे घटनाक्रम ने रेलवे प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मनसे का कहना है कि वे कोंकण के हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। यदि तय समय सीमा के भीतर दादर-रत्नागिरी पैसेंजर सेवा फिर से शुरू नहीं की गई, तो मुंबई के प्रमुख टर्मिनस पर विरोध प्रदर्शन और रेल रोको आंदोलन के कारण रेल यातायात पूरी तरह बाधित हो सकता है। अब गेंद रेलवे के पाले में है कि वह इस संभावित टकराव को टालने के लिए क्या कदम उठाता है।

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Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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