राजस्थान के सरहदी जिले बाड़मेर में चल रहा गिरल लिग्नाइट माइंस आंदोलन मंगलवार को एक बेहद संवेदनशील और अप्रत्याशित मोड़ पर पहुंच गया। थुम्बली और गिरल गांवों के स्थानीय मजदूरों और विस्थापित किसानों के हक की मांग को लेकर चल रहा धरना प्रदर्शन उस समय भारी सियासी हलचल में तब्दील हो गया, जब शिव विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विरोध स्वरूप अपने ऊपर पेट्रोल की पूरी बोतल छिड़क ली। इस अचानक हुए घटनाक्रम से वहां मौजूद समर्थकों और पुलिस प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए। विधायक द्वारा माचिस की मांग किए जाने के दौरान ही मौके पर तैनात पुलिस बल ने मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें आग लगाने से ठीक पहले सुरक्षित दबोच लिया। इस गंभीर घटना के बाद जिला कलेक्ट्रेट में प्रदर्शनकारियों और जिला प्रशासन के बीच हुई चार घंटे की मैराथन वार्ता भी पूरी तरह बेनतीजा साबित हुई।

इस खौफनाक और उच्च-प्रोफाइल घटनाक्रम के बाद उपजे तनाव को शांत करने के लिए जिला प्रशासन और आंदोलनकारियों के प्रतिनिधिमंडल के बीच जिला कलेक्ट्रेट सभागार में एक उच्च स्तरीय बैठक आयोजित की गई। लगभग चार घंटे तक चली इस लंबी वार्ता के मेज पर दो मुख्य बिंदुओं को लेकर गतिरोध बना रहा, जिसके कारण कोई ठोस समझौता नहीं हो सका। पहला मुख्य कारण यह रहा कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों की मांगों पर सकारात्मक रुख अपनाने और नरम कार्रवाई करने का केवल मौखिक आश्वासन दिया, जिसे आंदोलनकारियों ने ठुकरा दिया। विधायक रविंद्र सिंह भाटी और आंदोलनकारियों की स्पष्ट जिद है कि जब तक प्रशासन सभी मांगों पर लिखित गारंटी नहीं देता, तब तक यह धरना और आंदोलन समाप्त नहीं किया जाएगा।

वार्ता विफल होने का दूसरा बड़ा कारण नई ठेकेदार कंपनी के प्रतिनिधि का बैठक में उपस्थित न होना रहा। विधायक भाटी ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने स्पष्ट रूप से यह पक्ष रखा कि सारा विवाद नई ठेकेदार कंपनी के अड़ियल रुख के कारण पैदा हुआ है, जो स्थानीय श्रमिकों और ग्रामीणों की जायज शिकायतों को सुनने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं है। आंदोलनकारियों की मांग है कि पूर्व में उपखंड मजिस्ट्रेट (एसडीएम) और राजस्थान स्टेट माइंस एंड मिनरल्स लिमिटेड (आरएसएमएमएल) के अधिकारियों के साथ की गई बैठकें पूरी तरह खोखली साबित हो चुकी हैं, इसलिए इस बार संबंधित मुख्य ठेकेदार को वार्ता की टेबल पर आमने-सामने बिठाया जाना अनिवार्य है। इस मांग पर सहमति न बनने के कारण गतिरोध बरकरार रहा।

गिरल माइंस विवाद की पृष्ठभूमि काफी पुरानी और नीतिगत खामियों से जुड़ी हुई है। सालों पहले बाड़मेर के थुम्बली और गिरल गांवों में आरएसएमएमएल की आधुनिक ओपनकास्ट लिग्नाइट खदान की स्थापना के समय स्थानीय किसानों से हजारों बीघा कृषि भूमि अधिग्रहित की गई थी। उस समय प्रबंधन द्वारा प्रभावित परिवारों और स्थानीय शिक्षित युवाओं को खदान में स्थायी रोजगार देने का लिखित वादा किया गया था। श्रमिकों का आरोप है कि जो स्थानीय युवा, भारी वाहन चालक और ऑपरेटर पिछले बीस से पच्चीस वर्षों से यहां अपनी सेवाएं दे रहे थे, उन्हें हाल ही में आई नई ठेकेदार कंपनी ने कार्यभार संभालते ही बिना किसी पूर्व सूचना के अचानक नौकरी से निष्कासित कर दिया। इसके अतिरिक्त, खदान क्षेत्र में पर्यावरण सुरक्षा मानकों की भारी अनदेखी की जा रही है, जिससे कृषि भूमि पर अवैध डंपिंग और खुले में माइनिंग से फैले प्रदूषण के कारण स्थानीय ग्रामीणों का स्वास्थ्य गंभीर रूप से प्रभावित हो रहा है।

यह विवाद उस समय विधिक रूप से और पेचीदा हो गया जब लिग्नाइट परिवहन का ठेका लेने वाली कंपनी मेसर्स श्री मोहनगढ़ कंस्ट्रक्शन कंपनी ने अपने वित्तीय नुकसान का हवाला देते हुए राजस्थान उच्च न्यायालय की शरण ली। उच्च न्यायालय ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गिरल माइंस से लिग्नाइट का वैध परिवहन तुरंत और सुचारू रूप से शुरू करने के निर्देश जारी किए। अदालत ने बाड़मेर जिला और पुलिस प्रशासन को स्पष्ट आदेश दिया कि यदि कोई भी व्यक्ति या संगठन गैरकानूनी रूप से दबाव बनाकर परिवहन वाहनों को रोकने का प्रयास करता है, तो उसके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करते हुए उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाए और कंपनी के वाहनों को पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाए। इस न्यायिक आदेश के बाद प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया, जिसके विरोध में मजदूरों ने अपनी हड़ताल तेज कर दी।

पिछले पच्चीस दिनों से स्थानीय प्रशासन द्वारा हड़ताली मजदूरों की सुध न लिए जाने के बाद विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने स्वयं इस आंदोलन का नेतृत्व संभाला था। आंदोलन के दौरान पूर्व में उनकी तबीयत भी बिगड़ी थी, परंतु वे अपनी मांगों पर अडिग रहे। वर्तमान में प्रदर्शनकारियों की चार प्रमुख मांगें हैं, जिनमें नौकरी से निकाले गए सभी स्थानीय ड्राइवरों और ऑपरेटरों की तुरंत बहाली, श्रम कानूनों के अनुसार आठ घंटे की निर्धारित ड्यूटी, उचित वेतन एवं पीएफ की सुविधा और भूमि अधिग्रहित करने वाले पीड़ित किसान परिवारों का भविष्य सुरक्षित करना शामिल है। मंगलवार रात की वार्ता विफल होने और विधायक को हिरासत में लिए जाने की खबरों के बाद बाड़मेर के युवाओं और श्रमिक वर्ग में भारी आक्रोश व्याप्त है, जिसे देखते हुए बुधवार को दूसरे दौर की वार्ता प्रस्तावित की गई है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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