रामलला के भोग में शामिल हुआ जापान का दुर्लभ 'Egg of Sun', जानें क्या है अयोध्या से आई खबर
अयोध्या के किसान ओमप्रकाश सिंह द्वारा उपजाए गए जापानी नस्ल के मियाज़ाकी आम की पहली सफल फसल को राम मंदिर में रामलला के भोग के लिए अर्पित किया गया।

अयोध्या के एक स्थानीय बाग में किसान ओमप्रकाश सिंह द्वारा उगाई गई दुर्लभ जापानी मियाज़ाकी आम की फसल, जिसका पहला पका हुआ फल रामलला को अर्पित किया गया।
Miyazaki mango offered to Ram Lalla Ayodhya : अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के उल्लास और सनातन धर्म की पावन धार्मिक परंपराओं के बीच उत्तर प्रदेश की पावन नगरी अयोध्या से एक बेहद अनोखी और विस्मयकारी खबर सामने आई है। वैश्विक स्तर पर अपनी बेमिसाल कीमत और दुर्लभता के लिए मशहूर जापान के मियाज़ाकी आम ने अब रामलला के दरबार में भी अपनी उपस्थिति दर्ज करा दी है। दुनिया के सबसे महंगे फलों में शुमार और जापानी संस्कृति में “एग ऑफ द सन” यानी 'सूरज का अंडा' कहे जाने वाले इस बेशकीमती आम को पहली बार भव्य राम मंदिर में भगवान श्री रामलला को पूरी श्रद्धा के साथ अर्पित किया गया। इस ऐतिहासिक पल ने न केवल अयोध्या के श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया है, बल्कि देश के कृषि और बागवानी विशेषज्ञों के बीच भी एक नई सनसनी पैदा कर दी है।
इस चमत्कारी और प्रीमियम फल को प्रभु के चरणों में अर्पित करने के पीछे अयोध्या के ही एक प्रगतिशील और कर्मठ किसान ओमप्रकाश सिंह की दो वर्षों की अनथक मेहनत छिपी है। अंतरराष्ट्रीय बाजार की वित्तीय रिपोर्टों के अनुसार, मियाज़ाकी आम की कीमत दो दशमलव पांच लाख रुपये से लेकर तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है, जिसके चलते इसके महज एक इकलौते आम की कीमत भी करीब एक लाख रुपये तक पहुंच जाती है। किसान ओमप्रकाश सिंह ने बताया कि उन्होंने लगभग दो साल पहले इस जापानी किस्म के पौधे को अयोध्या की पावन मिट्टी और जलवायु में परखने के उद्देश्य से अपने बाग में लगाया था। प्रकृति और किसान के इस अनूठे समन्वय का परिणाम यह रहा कि पेड़ ने स्थानीय मौसम को सफलतापूर्वक अपना लिया और इस मौजूदा सीजन में पेड़ पर करीब बारह फल लगकर तैयार हुए।
धार्मिक मान्यताओं और वैज्ञानिक विशिष्टताओं के दृष्टिकोण से यह घटना बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। मियाज़ाकी आम अपनी अत्यधिक मिठास, शून्य के बराबर फाइबर और उच्च श्रेणी के विटामिंस व एंटी-ऑक्सीडेंट्स जैसे पाचक तत्वों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। ओमप्रकाश के बाग में उपजे इस सीजन के प्रत्येक फल का वजन लगभग 150 ग्राम से लेकर 300 ग्राम के बीच दर्ज किया गया है। सनातन संस्कृति की स्थानीय परंपरा के अनुसार, भूमि से होने वाली किसी भी नई फसल की पहली उपज को सबसे पहले आराध्य देव को समर्पित किया जाता है। इसी पावन परंपरा का निर्वहन करते हुए बाग से तोड़े गए सबसे पहले पके हुए मियाज़ाकी आम को पवित्र तुलसी दल के साथ राम मंदिर ले जाकर भगवान रामलला को श्रद्धापूर्वक भोग के रूप में निवेदित किया गया।
इस अनूठे कृषि चमत्कार की गूंज अयोध्या के संत समाज तक भी पहुंची, जिसके बाद प्रसिद्ध महंत सीताराम दास जी महाराज ने स्वयं ओमप्रकाश सिंह के इस विशेष बाग का दौरा किया। धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टिकोण प्रस्तुत करते हुए महंत जी ने कहा कि पहली उपज भगवान को अर्पित करना हमारी सदियों पुरानी सनातन परंपरा का मूल आधार है। उन्होंने पेड़ पर लटके गहरे लाल और बैंगनी रंग के इस आम की आभा की तुलना साक्षात सूर्य देव के तेज से करते हुए भावुक होकर कहा कि यह अद्भुत फल सचमुच “फलों का राजा” कहलाने का पूर्ण अधिकारी है। उल्लेखनीय है कि ओमप्रकाश के इस जादुई बाग में केवल मियाज़ाकी ही नहीं, बल्कि थाईलैंड का मशहूर बनाना मैंगो, ऑस्ट्रेलिया का प्रीमियम आरटूईटू (R2E2) आम और भारत की सदाबहार लोकप्रिय किस्में जैसे चौसा व दशहरी आम भी अपनी महक बिखेर रहे हैं।
अयोध्या की इस पवित्र धरा पर पहली बार इस अत्यंत दुर्लभ और महंगे जापानी आम की सफलतम व्यावसायिक खेती ने कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिकों, बागवानी विशेषज्ञों और आम श्रद्धालुओं का ध्यान अपनी ओर पुरजोर तरीके से आकर्षित किया है। विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश के मैदानी इलाकों में मियाज़ाकी जैसी संवेदनशील विदेशी किस्म का इस तरह फल देना राज्य की कृषि विविधता और पारंपरिक खेती से हटकर किए जा रहे नए प्रयोगों के लिए एक क्रांतिकारी मील का पत्थर साबित होगा। रामलला को लगे इस अनोखे जापानी भोग की चर्चा आज पूरे देश में श्रद्धा और अचरज के साथ की जा रही है।
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अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम को पहली बार चढ़ाया गया जापान का दुर्लभ मियाज़ाकी आम, किसान ओमप्रकाश सिंह ने उत्तर प्रदेश में उगाई दुनिया की सबसे महंगी आम की किस्म।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
