रसोई में बना 18 जड़ी-बूटियों वाला साबुन कैसे बना करोड़ों का ब्रांड, जानिए मेडिमिक्स की कहानी|
रेलवे कर्मचारियों की त्वचा की समस्या दूर करने के लिए डॉक्टर द्वारा रसोई में तैयार किए गए मेडिमिक्स साबुन की सफलता की कहानी।

फैक्टरी में मेडिमिक्स साबुन के हरे टुकड़ों की छंटाई और निर्माण करती महिला कर्मचारी।
एक डॉक्टर ने मरीजों की त्वचा की परेशानी दूर करने के लिए घर की रसोई में साबुन बनाया था। उस वक्त शायद ही किसी ने सोचा हो कि 18 जड़ी-बूटियों से तैयार यह हरी टिकिया एक दिन करीब 400 करोड़ रुपये के कारोबार वाले ब्रांड की पहचान बन जाएगी। यह कहानी मेडिमिक्स की है। कभी रेलवे ट्रैक साफ करने वाले कर्मचारियों की त्वचा की परेशानी दूर करने के लिए बनाया गया एक हरा साबुन आज करोड़ों रुपये का कारोबार करने वाला ब्रांड बन चुका है। इस कहानी के पीछे न कोई बड़ा बिजनेस प्लान था और न ही शुरुआत में विज्ञापन पर भारी खर्च किया गया था। बस एक डॉक्टर थे, जो बार-बार एक ही समस्या से जूझते मरीजों को देखकर उसका स्थायी समाधान खोजना चाहते थे। इसी कोशिश में साल 1969 में मेडिमिक्स का जन्म हुआ। आज यह आयुर्वेदिक पर्सनल केयर ब्रांड 35 से ज्यादा देशों में अपनी मौजूदगी दर्ज करा चुका है। बॉलीवुड से लेकर साउथ सिनेमा इंडस्ट्री तक की कई स्टार मेडिमिक्स साबुन की ब्रांड एंबेसडर रहीं हैं, जिनमें कैटरीना कैफ, विद्या बालन, मनोरमा, तृषा कृष्णन, किंजल राजप्रिया आदि प्रमुख हैं।
मेडिमिक्स की कहानी डॉ. वी.पी. सिधान से शुरू होती है। वह भारतीय रेलवे में एलोपैथिक डॉक्टर थे। चेन्नई में काम के दौरान वह रेलवे ट्रैक हाथ से साफ करने वाले कर्मचारियों का इलाज करते थे। इन कर्मचारियों को बार-बार त्वचा संबंधी समस्याएं होती थीं। डॉक्टर दवा देते, मरीजों को आराम मिलता, लेकिन कुछ हफ्तों बाद वही लोग फिर उनके पास पहुंच जाते थे। काम के दौरान त्वचा गंदगी और दूसरी चीजों के संपर्क में आती थी, ऐसे में इलाज का असर लंबे समय तक बनाए रखना मुश्किल हो रहा था। डॉ. सिधान के सामने सवाल था कि आखिर इन मरीजों को बार-बार उसी परेशानी से कैसे बचाया जाए? तभी उनके मन में एक अलग विचार आया। उन्होंने सोचा कि अगर त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल होने वाले साबुन में ही ऐसा फॉर्मूला तैयार किया जाए, तो लोगों के लिए उसका इस्तेमाल करना आसान होगा।
डॉ. सिधान का संबंध केरल के त्रिशूर के चोलायिल परिवार से था। उनके परिवार में पीढ़ियों से आयुर्वेदिक उपचार की परंपरा रही थी। त्वचा की समस्याओं के लिए परिवार में विप्रथी (Viprathi) नाम के तेल का इस्तेमाल किया जाता था। उन्होंने इसी पारंपरिक जानकारी को अपने मेडिकल अनुभव के साथ मिलाया और 18 जड़ी-बूटियों व प्राकृतिक तेलों से एक साबुन तैयार करने का फैसला किया। साल 1969 में डॉ. सिधान ने अपनी रसोई में इस साबुन का पहला फॉर्मूला तैयार किया। उनकी पत्नी ने भी इसमें मदद की। इस तरह जन्म हुआ मेडिमिक्स के हरे साबुन का। शुरुआत में उन्होंने इसे उन कर्मचारियों को इस्तेमाल करने के लिए दिया, जिनका वह इलाज करते थे। धीरे-धीरे इसकी चर्चा दूसरे लोगों तक पहुंची और साबुन की मांग बढ़ने लगी।
आज साबुन बाजार में आसानी से मिल जाते हैं, लेकिन मेडिमिक्स की शुरुआती यात्रा कुछ अलग थी। इसे आम साबुन की तरह नहीं, बल्कि डॉक्टर की सलाह पर इस्तेमाल किए जाने वाले उत्पाद के रूप में पेश किया जाता था। चेन्नई की कुछ चुनिंदा फार्मेसी में इसकी बिक्री होती थी। शुरुआती विज्ञापनों में भी इस बात पर जोर दिया जाता था कि डॉक्टर इस साबुन को इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। धीरे-धीरे इसकी पहचान बढ़ी और यह दवा की तरह इस्तेमाल होने वाले उत्पाद से रोजमर्रा की जरूरत का हिस्सा बन गया। इसकी हरी टिकिया और 18 जड़ी-बूटियों वाला फॉर्मूला ब्रांड की पहचान बन गए।
मेडिमिक्स की कामयाबी का सफर सीधा नहीं रहा। 1980 के दशक की शुरुआत में मजदूरों की हड़ताल के कारण चेन्नई की उत्पादन इकाई करीब दो साल तक बंद रही। साल 1983 में उत्पादन दोबारा शुरू हुआ। इसके बाद डॉ. सिधान के दामाद ए.वी. अनूप कारोबार से जुड़े। साल 1984 में माधवरम में फैक्ट्री शुरू की गई। इससे कंपनी को उत्पादन बढ़ाने और बाजार में अपनी पहुंच मजबूत करने में मदद मिली।
मेडिमिक्स की एक खासबात इसकी उत्पादन प्रक्रिया भी है। कंपनी के मुताबिक, साबुन बनाने में आज भी हाथ से काम करने पर जोर दिया जाता है। एक बैच तैयार करने में करीब आठ दिन लगते हैं और मिश्रण को स्टील के बड़े बर्तनों में तैयार किया जाता है। कंपनी के कुल कर्मचारियों में 60 फीसदी से ज्यादा महिलाएं हैं। समय के साथ भारत में हर्बल और आयुर्वेदिक उत्पादों का बाजार बढ़ा। हिंदुस्तान यूनिलीवर, गोदरेज और विप्रो जैसी बड़ी कंपनियों ने भी इस श्रेणी में अपने उत्पाद उतारे। इसके बावजूद मेडिमिक्स ने अपनी अलग पहचान बनाए रखी।
मेडमिक्स की ब्रांड पहचान आयुर्वेदिक विरासत और 18 जड़ी-बूटियों वाले फॉर्मूले से जुड़ी रही। साबुन से शुरू हुआ कारोबार अब दूसरे पर्सनल केयर उत्पादों तक पहुंच चुका है। कंपनी फेस वॉश, बॉडी वॉश, मॉइस्चराइजर, शैंपू और हाइजीन वॉश जैसे उत्पाद भी बेचती है। आज ब्रांड 35 से ज्यादा देशों में मौजूद है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
