संकट के बीच भारत ने निभाया दोस्ती का फर्ज; अफगानिस्तान के लिए रवाना की दवाओं की सबसे बड़ी खेप!
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्वास्थ्य और राहत प्रयासों को मजबूती देने के लिए काबुल भेजी गई चिकित्सा आपूर्ति की पुष्टि की है।

भारत सरकार द्वारा अफगानिस्तान की जनता के लिए भेजी गई 5 टन आवश्यक दवाओं की खेप के भारतीय तिरंगे से लिपटे हुए बड़े कार्गो कंटेनर हवाई अड्डे के हैंगर परिसर में।
India Afghanistan humanitarian aid 2026 : वैश्विक कूटनीति के उतार-चढ़ाव और क्षेत्रीय चुनौतियों के बीच भारत ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर अपनी मानवीय संवेदनाओं का लोहा मनवाया है। कठिन परिस्थितियों और भीषण संकटों से जूझ रही अफगान जनता के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करते हुए भारत सरकार ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है और आवश्यक दवाओं की एक बहुत बड़ी खेप अफगानिस्तान रवाना की है। इस बड़ी कूटनीतिक और मानवीय पहल के माध्यम से नई दिल्ली ने न केवल अफगान नागरिकों के स्वास्थ्य, कल्याण और राहत प्रयासों के प्रति अपने अटूट समर्थन को दोहराया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि समय कितना भी विपरीत क्यों न हो, भारत अपने पड़ोसियों को लावारिस नहीं छोड़ता। इस बेहद महत्वपूर्ण घटनाक्रम की आधिकारिक पुष्टि करते हुए विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर देश और दुनिया के साथ यह जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारत की ओर से विशेष तौर पर 5 टन अत्यंत जरूरी और जीवनरक्षक दवाओं की खेप अफगानिस्तान भेजी गई है, जो वहां की चरमराती स्वास्थ्य व्यवस्था को न केवल संजीवनी देगी बल्कि युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं से त्रस्त स्थानीय नागरिकों की तत्काल चिकित्सा आवश्यकताओं को भी पूरा करेगी।
भारत की यह त्वरित सहायता कोई अकेली घटना नहीं है, बल्कि यह अफगानिस्तान में मानवीय संकट को कम करने के लिए लंबे समय से जारी एक विस्तृत और रणनीतिक राहत अभियान की अगली कड़ी है। आधिकारिक आंकड़ों और पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो इसी साल अप्रैल के महीने में भी भारत ने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय टीबी टीकाकरण कार्यक्रम को मजबूती देने के लिए 13 टन ऐतिहासिक बीसीजी (बैसिलस कैलमेट-गुएरिन) टीके और उससे जुड़े महत्वपूर्ण चिकित्सा उपकरणों की एक बड़ी खेप काबुल भेजी थी। इतना ही नहीं, जब इसी वर्ष अफगानिस्तान में विनाशकारी बाढ़ और भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी, तब भारत सरकार ने तुरंत हरकत में आते हुए 5 अप्रैल को एक बड़ा मानवीय सहायता और आपदा राहत (एचएडीआर) दस्ता वहां भेजा था, जिसने मलबे में दबे और बेघर हुए परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई थी। इससे थोड़ा और पीछे जाएं तो मार्च के महीने में भी भारत ने 2.5 टन आपातकालीन दवाएं, मेडिकल डिस्पोजेबल और आधुनिक सर्जिकल किट काबुल भेजी थीं। यह विशिष्ट और त्वरित मदद काबुल के पुल-ए-चरखी इलाके में स्थित 2,000 बिस्तरों वाले ‘ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट हॉस्पिटल’ पर हुए भीषण और बर्बर पाकिस्तानी हमले के तुरंत बाद दी गई थी, जिसमें 400 से अधिक निर्दोष लोगों की मौत हो गई थी और 250 से ज्यादा गंभीर रूप से घायल लोगों के इलाज के लिए वहां दवाओं का भारी अकाल पड़ गया था।
इस संपूर्ण सहायता अभियान के रणनीतिक और आधिकारिक पहलुओं का आधार नवंबर 2025 में रखी गई उस मजबूत बुनियाद में छिपा है, जब नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर और अफगानिस्तान के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अजीजी के बीच एक अत्यंत उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक हुई थी। इस ऐतिहासिक बैठक के दौरान दोनों देशों के बीच व्यापारिक कनेक्टिविटी, चाबहार पोर्ट के माध्यम से संपर्क और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी संबंधों को प्रगाढ़ करने पर बेहद गंभीर और विस्तृत चर्चा हुई थी। उस दौरान विदेश मंत्री जयशंकर ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट किया था कि भारत किसी भी राजनीतिक बदलाव से इतर अफगान जनता के विकास, पुनर्निर्माण और सामाजिक कल्याण के लिए अपना बिना शर्त समर्थन जारी रखेगा। चाहे 2025 में बाल्ख, समनगन और बगलान प्रांतों में आया विनाशकारी भूकंप हो या वर्तमान की चिकित्सा विसंगतियां, भारत ने हर मोड़ पर खाद्यान्न, टीके और जीवनरक्षक प्रणालियां भेजकर अपनी अटूट प्रतिबद्धता को साबित किया है। भारत द्वारा उठाई गई 5 टन दवाओं की यह नवीनतम खेप केवल एक चिकित्सा सहायता नहीं है, बल्कि दक्षिण एशिया में भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति और एक जिम्मेदार वैश्विक महाशक्ति होने का वह जीवंत प्रमाण है, जो सीमाओं के पार जाकर इंसानियत की हिफाजत करने का हौसला रखता है।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
