मणिपुर की शांति पर 14 साल की लिसिप्रिया का सवाल, मीराबाई चानू की जीत पर दी पीएम मोदी को प्रतिक्रिया|
कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू के गोल्ड मेडल पर पीएम मोदी की बधाई के बाद 14 साल की लिसिप्रिया कंगुजम ने मणिपुर में शांति को लेकर सवाल उठाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम और कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू के संदर्भ में।
कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय वेटलिफ्टर्स के शानदार प्रदर्शन ने देश का मान एक बार फिर बढ़ाया है, लेकिन इस सफलता के बीच एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है। ओलंपिक मेडलिस्ट मीराबाई चानू ने वेटलिफ्टिंग के 48 किलोग्राम वर्ग का खिताब अपने नाम करते हुए कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल की हैट्रिक पूरी कर ली है। उनकी इस ऐतिहासिक सफलता के साथ ही उन्होंने कई रिकॉर्ड भी ध्वस्त कर दिए हैं। देश की इस बड़ी उपलब्धि पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें बधाई दी, जिसके बाद 14 वर्षीय पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने देश की चुप्पी और मणिपुर के हालात को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कॉमनवेल्थ गेम्स में मीराबाई चानू की इस बड़ी जीत के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा कि भारतीय वेटलिफ्टिंग में एक और शानदार अध्याय जुड़ गया है। उन्होंने अपनी पोस्ट में तारीफ करते हुए कहा कि प्रतिभाशाली मीराबाई चानू ने कॉमनवेल्थ गेम्स के 48 किलोग्राम वर्ग में बेहतरीन प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल जीतकर अपनी अद्भुत काबिलियत का फिर से लोहा मनवाया है। लगातार कॉमनवेल्थ गेम्स में स्वर्ण पदक और कुल मिलाकर चौथा सीडब्ल्यूजी मेडल जीतने वाली मीराबाई हर भारतीय नागरिक के लिए एक बड़ी प्रेरणा बनी हुई हैं। प्रधानमंत्री ने उन्हें बधाई देते हुए उनके आगामी और भविष्य के सभी प्रयासों के लिए शुभकामनाएं भी दीं।
प्रधानमंत्री की इस आधिकारिक बधाई पोस्ट के सामने आने के बाद 14 साल की युवा पर्यावरण कार्यकर्ता लिसिप्रिया कंगुजम ने इस पोस्ट को अपने अकाउंट पर रीपोस्ट किया और एक तीखा सवाल देश के सामने रख दिया। उन्होंने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा कि जब देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदकों और जीत की जरूरत होती है, तब मणिपुर मेडल दिलाता है, लेकिन जब पिछले साढ़े तीन साल से जारी हिंसा के बाद मणिपुर को शांति और सुकून की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब पूरा देश पूरी तरह खामोश क्यों बैठा है। उनके इस सवाल ने सोशल मीडिया पर एक नई बहस को जन्म दे दिया है।
गौरतलब है कि लिसिप्रिया कंगुजम इससे पहले भी अपने बयानों और सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए चर्चा में रही हैं। कुछ समय पहले उनका एक अन्य पोस्ट काफी वायरल हुआ था, जिसमें उन्होंने तमिलनाडु के मुख्यमंत्री थलपति विजय से एक खास अपील की थी। उन्होंने सीएम की वीआईपी कुर्सी के पीछे रखे जाने वाले सफेद तौलिए को हटाने का आग्रह किया था। बच्ची की उस अपील पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री विजय ने अपनी कुर्सी से सफेद तौलिया हटा दिया था। उस दौरान लिसिप्रिया ने देश की वीआईपी संस्कृति और तौलिया प्रथा पर सवाल उठाया था कि कैसे इस परंपरा का पालन मंत्री, नौकरशाह और छोटे अधिकारी भी कर रहे हैं।
मीराबाई चानू की यह जीत भारतीय खेल जगत के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय की तरह दर्ज हो चुकी है, जहां उन्होंने अपनी मेहनत और दृढ़ संकल्प से एक बार फिर तिरंगे का मान ऊंचा किया है। खेल के मैदान पर मिली यह सफलता देश के लिए जितनी गर्व की बात है, वहीं दूसरी ओर देश के भीतर से उठ रहे सामाजिक और मानवीय मुद्दों के स्वर यह याद दिलाते हैं कि उपलब्धियों के साथ-साथ जमीनी हकीकत और शांति की पुकार पर भी ध्यान देना उतना ही आवश्यक है। एक तरफ जहां देश भर में खिलाड़ी की जीत का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मणिपुर के हालातों को लेकर उठे इन सवालों ने इस पूरी घटना को एक नया और गंभीर आयाम दे दिया है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
