पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के एक होनहार बांग्लादेशी छात्र नेता की हत्या से जुड़े दावों ने भारत और बांग्लादेश दोनों ही मुल्कों के राजनीतिक गलियारों में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है। कोलकाता के धर्मतला में एक धरना प्रदर्शन के दौरान दिए गए उनके इस बयान ने न केवल दोनों देशों के कूटनीतिक रिश्तों पर गंभीर सवाल उठाए हैं, बल्कि बांग्लादेश में सक्रिय भारत-विरोधी तत्वों को भी एक नया नैरेटिव दे दिया है। रणनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील इस दौर में आया यह बयान सीमा पार एक बड़े विवाद का कारण बन चुका है।

यह पूरा मामला बांग्लादेश के प्रमुख छात्र संगठन 'इंकलाब मंच' के संयोजक और मुखर युवा नेता शरीफ उस्मान हादी की हत्या से जुड़ा हुआ है। उस्मान हादी भारत की नीतियों के कड़े आलोचक थे और लगातार नई दिल्ली पर ढाका की आंतरिक राजनीति में दखल देने का आरोप लगाते रहते थे। दिसंबर 2025 में ढाका में चुनाव प्रचार के दौरान अज्ञात हमलावरों ने उनके सिर में गोली मार दी थी, जिसके बाद सिंगापुर के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। इस घटना के बाद पूरे बांग्लादेश में भारत के खिलाफ व्यापक स्तर पर हिंसक प्रदर्शन देखने को मिले थे।

मामले में नया मोड़ तब आया जब मार्च 2026 में पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) ने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड के दो मुख्य संदिग्धों, फैसल करीम मसूद और आलमगीर हुसैन को धर दबोचा। जांच के मुताबिक, दोनों आरोपी मेघालय सीमा के रास्ते अवैध रूप से भारत में दाखिल हुए थे और पश्चिम बंगाल में छिपे हुए थे। ममता बनर्जी ने अब दावा किया है कि जब उनकी पुलिस ने इन बांग्लादेशी हत्यारों को पकड़ा, तो देश के केंद्रीय गृह मंत्री ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से फोन किया था और इस गिरफ्तारी की खबर को दबाने के लिए कहा था क्योंकि यह 'राष्ट्रीय हित' का मामला था। हालांकि, उन्होंने सीधे तौर पर अमित शाह का नाम लेने के बजाय 'भारत के गृहमंत्री' शब्द का प्रयोग किया।

ममता बनर्जी के इस बयान के बाद बांग्लादेश की मीडिया और सोशल मीडिया पर भारत और भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ आरोपों की बाढ़ आ गई है। वरिष्ठ बांग्लादेशी पत्रकार सलाह उद्दीन शोएब चौधरी ने एक प्रमुख लेख में चेतावनी दी है कि पूर्व मुख्यमंत्री के इस गैर-जिम्मेदाराना बयान से बांग्लादेश में एंटी-इंडिया नैरेटिव को भारी बढ़ावा मिला है। उन्होंने लिखा कि यह विवाद ऐसे समय में आया है जब क्षेत्रीय सुरक्षा के समीकरण तेजी से बदल रहे हैं और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ तथा सेना प्रमुख असीम मुनीर जल्द ही बांग्लादेश की रक्षा सहयोग बढ़ाने वाली अहम यात्रा पर जाने वाले हैं।

इस हत्याकांड के पीछे की अंदरूनी राजनीति भी अब सवालों के घेरे में है। उस्मान हादी की मौत के बाद उनके बड़े भाई शरीफ उमर हादी ने सोशल मीडिया पर बांग्लादेश के कुछ शीर्ष राजनीतिक चेहरों और सरकारी अधिकारियों पर हत्या की साजिश में शामिल होने का आरोप लगाया था। लेकिन रहस्यमयी ढंग से, इन गंभीर आरोपों के तुरंत बाद शरीफ उमर हादी को बिना किसी विशेष योग्यता के एक सरकारी कॉन्ट्रैक्ट के तहत ब्रिटेन भेजकर बर्मिंघम में एक राजनयिक (डिप्लोमेट) पद पर नियुक्त कर दिया गया। पत्रकार चौधरी ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा है कि क्या यह नियुक्ति उनका मुंह बंद कराने के लिए की गई थी? ममता बनर्जी के दावों और बांग्लादेश के आंतरिक घटनाक्रमों ने इस संवेदनशील मामले को दक्षिण एशियाई राजनीति के एक बेहद जटिल मोड़ पर लाकर खड़ा कर दिया है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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