बारामती में बड़ा उलटफेर; Sunetra Pawar के खिलाफ चुनाव नहीं लड़ेंगे Sharad Pawar!
बारामती उपचुनाव : क्या सुनेत्रा पवार चुनी जाएंगी निर्विरोध? सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की दिल्ली में कांग्रेस नेताओं से होगी चर्चा। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

Sunetra Pawar
Baramati Bypoll 2026 : महाराष्ट्र की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली बारामती विधानसभा एक बार फिर देश की राजनीतिक सुर्खियों के केंद्र में है। दिवंगत पूर्व उपमुख्यमंत्री अजित पवार के निधन के बाद खाली हुई इस सीट पर होने वाले उपचुनाव ने राज्य की राजनीति में हलचल पैदा कर दी है। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) अब इस कोशिश में जुट गई है कि बारामती का यह चुनाव 'निर्विरोध' संपन्न हो। मंगलवार, 24 मार्च को एनसीपी नेता सुनील तटकरे द्वारा दिए गए बड़े बयान ने इस संभावना को और बल दे दिया है कि सुनेत्रा पवार बिना किसी चुनावी मुकाबले के विधानसभा की दहलीज लांघ सकती हैं।
एनसीपी की रणनीति के अनुसार, पार्टी के वरिष्ठ नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल जल्द ही दिल्ली का रुख करेंगे, जहाँ वे कांग्रेस आलाकमान से मुलाकात कर बारामती में उम्मीदवार न उतारने का आग्रह करेंगे। इसके साथ ही, मुंबई में उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली शिवसेना (UBT) से भी चर्चा की जाएगी। हालांकि, यह राह इतनी आसान नजर नहीं आती। शरद पवार की पार्टी (NCP-SP) ने पहले ही घोषणा कर दी थी कि वे यहाँ अपना उम्मीदवार नहीं उतारेंगे, लेकिन इस फैसले पर कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कड़ी नाराजगी जताई थी। वडेट्टीवार का तर्क है कि यदि शरद गुट मैदान छोड़ता है, तो कांग्रेस अपना प्रत्याशी उतारने पर विचार करेगी। अब सबकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या विपक्षी गठबंधन इस 'वॉकओवर' के लिए सहमत होगा।
उपचुनाव का आधिकारिक कार्यक्रम और महत्वपूर्ण तिथियां :
चुनाव आयोग द्वारा घोषित कार्यक्रम के अनुसार, बारामती और अहिल्यानगर की राहुरी सीट पर होने वाले उपचुनाव की प्रक्रिया बेहद संक्षिप्त और निर्णायक है:
- अधिसूचना जारी होने की तिथि : 30 मार्च 2026।
- नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि : 6 अप्रैल 2026।
- नामांकन पत्रों की जांच : 7 अप्रैल 2026।
- नाम वापसी की अंतिम तिथि : 9 अप्रैल 2026।
- मतदान एवं परिणाम : 23 अप्रैल को वोटिंग और 4 मई को मतगणना।
कानूनी और तकनीकी दृष्टि से, यदि 6 अप्रैल तक सुनेत्रा पवार के खिलाफ कोई भी प्रमुख उम्मीदवार पर्चा दाखिल नहीं करता है, तो वे निर्विरोध चुनी जा सकती हैं। यदि नामांकन दाखिल हो भी जाता है, तो एनसीपी के पास 9 अप्रैल तक का समय होगा कि वे विपक्षी दलों को नाम वापसी के लिए मना सकें। बारामती की जनता और राजनीतिक विश्लेषक इस बात को लेकर उत्सुक हैं कि क्या पवार परिवार के गढ़ में इस बार चुनाव का शोर थमेगा या फिर पटरियों पर सियासी जंग देखने को मिलेगी।
इस पूरे घटनाक्रम का महत्व केवल एक सीट तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महाराष्ट्र की भावी गठबंधन राजनीति की दिशा भी तय करेगा। अजित पवार की विरासत को आगे बढ़ाने की इस कवायद में अगर सुनेत्रा पवार निर्विरोध चुनी जाती हैं, तो यह अजित पवार के प्रति एक बड़ी राजनीतिक श्रद्धांजलि और एनसीपी की रणनीतिक जीत मानी जाएगी। 6 अप्रैल की तारीख इस सस्पेंस से पर्दा उठाएगी कि बारामती में लोकतंत्र का उत्सव मतदान के जरिए मनेगा या सहमति के जरिए।

Ashiti Joil
यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।
