झारखंड में बड़ा विमान हादसा: चतरा के जंगलों में क्रैश हुई एयर एम्बुलेंस, मरीज और डॉक्टर समेत सभी 7 लोगों की मौत।
झारखंड के चतरा जिले में रांची से दिल्ली जा रही एक एयर एम्बुलेंस क्रैश हो गई है। इस दुखद हादसे में गंभीर रूप से झुलसे मरीज, दो पायलट और मेडिकल टीम समेत कुल 7 लोगों की जान चली गई है। पढ़ें पूरी खबर और मृतकों की सूची।

Major plane crash in Jharkhand
झारखंड में मातम: चतरा के घने जंगलों में एयर एम्बुलेंस क्रैश, सात जिंदगियां खत्म
झारखंड के चतरा जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है। सोमवार शाम रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एक मेडिकल एयर एम्बुलेंस घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस भीषण हादसे में विमान में सवार सभी सात लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह विमान एक गंभीर रूप से झुलसे मरीज को बेहतर इलाज के लिए दिल्ली ले जा रहा था, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
कैसे हुआ हादसा?
अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, रेडबर्ड एयरवेज प्राइवेट लिमिटेड (Redbird Airways Pvt Ltd) द्वारा संचालित बीचक्राफ्ट C90 (Beechcraft C90) विमान, जिसका टेल नंबर VT-AJV था, ने शाम करीब 7:11 बजे रांची एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। उड़ान भरने के मात्र 20 से 25 मिनट के भीतर ही विमान का एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) से संपर्क टूट गया और वह रडार से गायब हो गया।
काफी मशक्कत के बाद दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा चतरा जिले के सिमरिया के पास कसरिया/बरियातू पंचायत क्षेत्र के घने जंगलों में पाया गया। चतरा की उपायुक्त (DC) कीर्तिश्री जी. ने पुष्टि करते हुए बताया, "विमान में सवार सभी सात लोग इस हादसे में मारे गए हैं।"
हादसे के शिकार हुए लोगों की सूची
नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने पुष्टि की है कि इस मेडिकल इवैक्यूएशन फ्लाइट में सात लोग सवार थे। मृतकों की सूची इस प्रकार है:
- कैप्टन विवेक विकास भगत (पायलट-इन-कमांड)
- कैप्टन सवराजदीप सिंह (को-पायलट)
- संजय कुमार (41 वर्ष) (मरीज, जो गंभीर रूप से झुलसे हुए थे)
- डॉ. विकास कुमार गुप्ता (अटेंडिंग फिजिशियन)
- सचिन कुमार मिश्रा (पैरामेडिक)
- अर्चना देवी (मरीज की अटेंडेंट)
- धुरू कुमार (मरीज के अटेंडेंट)
प्रशासन ने बताया कि सभी शवों को दुर्घटनास्थल से निकाल लिया गया है और पोस्टमार्टम व अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भेज दिया गया है।
मरीज की स्थिति और आखिरी सफर
अस्पताल के सूत्रों के मुताबिक, 41 वर्षीय संजय कुमार एक अन्य दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए थे। उनके शरीर का 60% से अधिक हिस्सा जल गया था। उनकी हालत नाजुक थी, जिसके कारण परिवार ने उन्हें बेहतर और उन्नत इलाज के लिए रांची से दिल्ली के बड़े अस्पताल में ले जाने का फैसला किया था। परिवार को उम्मीद थी कि दिल्ली जाकर संजय की जान बच जाएगी, लेकिन इस हादसे ने पूरे परिवार और उनके साथ मौजूद सहयोगियों को अपनी चपेट में ले लिया।
जांच और बचाव कार्य
हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और बचाव दल चतरा के दुर्गम और जंगली इलाके में पहुँच गए। अंधेरा और घना जंगल होने के कारण शुरुआती खोज अभियान में काफी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। फिलहाल, हादसे के सटीक कारणों का पता नहीं चल पाया है। नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) और विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) ने मामले की उच्च स्तरीय जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि क्या यह कोई तकनीकी खराबी थी, मौसम का असर था या पायलट से कोई चूक हुई।
इलाके में शोक की लहर
इस विमान हादसे ने पूरे झारखंड को झकझोर कर रख दिया है। एक तरफ जहां एक परिवार अपने सदस्य की जान बचाने की जद्दोजहद में था, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्य पथ पर तैनात डॉक्टर और पायलटों ने अपनी जान गंवा दी। चतरा और रांची के प्रशासनिक अधिकारियों ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है।
हवाई एम्बुलेंस सेवाओं का उद्देश्य कम समय में जान बचाना होता है, लेकिन चतरा के जंगलों में हुई इस त्रासदी ने सुरक्षा मानकों और तकनीकी रखरखाव पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट आने के बाद ही हादसे की असली वजह साफ हो पाएगी। यह घटना उन सभी परिवारों के लिए एक अपूरणीय क्षति है जिन्होंने अपने प्रियजनों को खोया है।

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