महाराष्ट्र की राजनीति में ‘ऑपरेशन टाइगर’ को लेकर सरगर्मी अपने चरम पर है। ठाकरे गुट के कई सांसदों के पार्टी छोड़ने और शिंदे गुट में शामिल होने की संभावनाओं के बीच राज्य की सियासत में हलचल मची हुई है। इस पूरे घटनाक्रम के केंद्र में चल रहे राजनीतिक कयासों के बीच, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी थीं। अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान जब उनसे इस विषय पर सवाल किया गया, तो उन्होंने स्पष्ट रूप से राजनीतिक विवादों से किनारा कर लिया।

अमृता फडणवीस ने कहा कि आज का दिन योग और स्वास्थ्य के प्रति समर्पित है, इसलिए राजनीतिक विषयों पर चर्चा करना उचित नहीं है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'ऑपरेशन टाइगर' पूरी तरह से दो राजनीतिक दलों के बीच का मामला है, जिसका उनके स्वास्थ्य से जुड़े कार्यक्रम से कोई सरोकार नहीं है। उन्होंने अपने संबोधन में इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि योग दिवस को कैसे समाज के विभिन्न वर्गों, विशेष रूप से किसानों के बच्चों और मुंबई महानगरपालिका के विद्यार्थियों के साथ मनाया गया। उन्होंने इस बात की जानकारी साझा की कि इन बच्चों को मुंबई दर्शन भी कराया जाएगा, ताकि उन्हें शैक्षिक और सामाजिक अनुभव मिल सके। उन्होंने युवाओं से नियमित रूप से योग का अभ्यास करने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने की अपील की।

इस बीच, ठाकरे गुट से अलग होने वाले सांसदों की सूची में हिंगोली के सांसद नागेश पाटिल अष्टीकर का नाम प्रमुखता से सामने आया है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वे शिवसेना छोड़कर दूसरी पार्टी में नहीं गए हैं, बल्कि उन्होंने शिवसेना के भीतर ही अपना दल बदला है। उन्होंने अपने इस फैसले के पीछे का कारण बताते हुए कहा कि पार्टी के स्थापना दिवस पर उनके और अन्य सांसदों के कार्यों की आलोचना की गई थी, जिससे उन्हें गहरा आघात पहुंचा। उन्होंने यह भी तर्क दिया कि पिछले कुछ समय से बिना शक्ति या अधिकार के जमीनी स्तर पर जनहित के कार्य करने में बाधाएं उत्पन्न हो रही थीं। उनका दावा है कि उन्होंने यह कदम अपने निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की अपेक्षाओं को पूरा करने और विकास कार्यों को गति देने के लिए उठाया है, ताकि वे अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी तरह से कर सकें।

राज्य की बदलती राजनीतिक तस्वीर और ‘ऑपरेशन टाइगर’ के इर्द-गिर्द बुने जा रहे इस घटनाक्रम ने महाविकास अघाड़ी और शिंदे गुट के बीच के तनाव को और गहरा कर दिया है। ठाकरे गुट के सांसदों का दल बदलना न केवल संगठनात्मक स्तर पर एक बड़ी चुनौती है, बल्कि आगामी राजनीतिक रणनीतियों को भी प्रभावित करने वाला कदम है। इस घटनाक्रम का भविष्य में महाराष्ट्र की चुनावी राजनीति और सत्ता के समीकरणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, यह देखना शेष है। फिलहाल, सभी संबंधित पक्षों की ओर से अपने-अपने तर्कों के साथ दावों और प्रतिदावों का दौर जारी है।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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