उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध महाकाल मंदिर में आधी रात को उस समय हड़कंप मच गया, जब अचानक नेशनल सिक्योरिटी गार्ड (एनएसजी) के ब्लैक कैट कमांडो एक्शन मोड में नजर आए। दरअसल, यह किसी आतंकी हमले की असल घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था को परखने के लिए की गई एक 'मॉकड्रिल' थी। महाकाल मंदिर देश के सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील धार्मिक स्थलों में से एक है, जहाँ हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुँचते हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा एजेंसियां समय-समय पर यहाँ अभ्यास करती रहती हैं।

यह विशेष सुरक्षा अभ्यास मुंबई से आई एनएसजी की टीम द्वारा किया गया। मॉकड्रिल रात को ठीक 12 बजे शुरू होकर रात के 2 बजे तक चली। अभ्यास की शुरुआत महाकाल लोक के नंदी द्वार से हुई और यह मानसरोवर क्षेत्र तक जारी रहा। अचानक आधी रात को भारी हथियारों से लैस ब्लैक ड्रेस में कमांडो को देखकर मंदिर परिसर और आसपास मौजूद लोग कुछ देर के लिए हैरान-परेशान रह गए। उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि आखिर माजरा क्या है।

इस अभ्यास के दौरान एनएसजी के जवान आधुनिक हथियारों के साथ पूरी तरह एक्शन मोड में दिखाई दिए। वे रात के अंधेरे में संभावित खतरों से निपटने का रिहर्सल कर रहे थे। कमांडो बेहद पेशेवर तरीके से आगे बढ़ रहे थे; एक जवान खंभे की आड़ लेकर आगे बढ़ता, तो दूसरा उसे पीछे से कवर दे रहा था। अभ्यास के बीच में रणनीतिक रूप से अचानक लाइट बंद कर अंधेरा भी किया गया, ताकि कठिन परिस्थितियों में जवानों की कार्यकुशलता को परखा जा सके। लेकिन अंधेरे का जवानों के मूवमेंट पर कोई असर नहीं पड़ा और वे उसी तेजी और सटीकता के साथ अपने टारगेट की ओर बढ़ते रहे। महाकाल लोक के खंभे उनके लिए सुरक्षा दीवार की तरह काम कर रहे थे।

मॉकड्रिल के 'मिशन' के तहत जवानों को एक संदिग्ध को ढूंढना था, जो परिसर के एक कोने में छुपा हुआ था। अंधेरे के बावजूद जवानों ने उस संदिग्ध को सफलतापूर्वक ढूंढ निकाला। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान, वहाँ मौजूद श्रद्धालुओं (जो अभ्यास का हिस्सा थे) को सुरक्षित स्थान पर पहुँचाने का भी अभ्यास किया गया। साथ ही, इस कथित अफरातफरी में घायल हुए एक श्रद्धालु को तुरंत अस्पताल पहुँचाने की प्रक्रिया को भी दोहराया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि यह सब मॉकड्रिल का ही हिस्सा था और इसमें संदिग्ध तथा श्रद्धालु दोनों ही 'डमी' (बनावटी) थे।

सुरक्षा अभ्यास के दौरान स्थानीय पुलिस और प्रशासन की टीमें भी मौके पर मौजूद रहीं और उन्होंने एनएसजी के साथ समन्वय स्थापित किया। महाकाल मंदिर परिसर में एनएसजी कमांडो द्वारा इस तरह का अभ्यास पहले भी किया जा चुका है। इससे पूर्व, 26 सितंबर 2023 को भी मंदिर परिसर में आतंकी घटनाओं से निपटने और रेस्क्यू ऑपरेशन का पूर्वाभ्यास किया गया था।

मॉकड्रिल के संबंध में जानकारी देते हुए उज्जैन के एडिशनल एसपी आलोक शर्मा ने बताया कि महाकाल मंदिर देश के प्रमुख और आस्था के बड़े केंद्रों में शामिल है। किसी भी प्रकार की आपातकालीन या अप्रिय स्थिति से निपटने की तैयारियों को पुख्ता करने के उद्देश्य से आज यह 'एडवांस मॉकड्रिल' आयोजित की गई थी। उन्होंने बताया कि इस महत्वपूर्ण सुरक्षा अभ्यास में 100 से अधिक एनएसजी कमांडो शामिल हुए। एनएसजी टीम के साथ-साथ मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने भी इस पूरे ऑपरेशन में सक्रिय भूमिका निभाई।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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