तमिलनाडु में मुफ्त बस यात्रा से जुड़ी राज्य सरकार की 'वेट्री पयनम' (Vettri Payanam) योजना की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक रिट याचिका को मद्रास हाई कोर्ट से वापस ले लिया गया है। इरोड की एक प्राइवेट बस ऑपरेटर एन. कलामणि द्वारा दायर की गई इस याचिका पर सुनवाई करने में जब हाई कोर्ट की पीठ ने अनिच्छा जताई, तो याचिकाकर्ता को अपनी अर्जी वापस लेने का निर्णय लेना पड़ा। यह मामला 5 अक्टूबर, 2026 को मद्रास हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सुश्रुत अरविंद धर्माधिकारी और जस्टिस जी. अरुल मुरुगन की पहली डिवीजन बेंच के सामने सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया था। दोनों जजों की पीठ द्वारा मामले पर विचार करने से इनकार करने के बाद याचिकाकर्ता ने अपना कदम पीछे खींच लिया।

'द हिंदू' की रिपोर्ट के अनुसार, याचिका दायर करने वाली एन. कलामणि एक विधवा हैं और उन पर अपनी दो बेटियों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी है। कलामणि के पास इरोड से वेल्लिथिरुप्पुर तक के 47 किलोमीटर लंबे रूट और काकापालयम से अंधियुर तक के 88 किलोमीटर लंबे रूट पर बसें चलाने के परमिट हैं। उनके इस ट्रांसपोर्ट व्यवसाय में लगभग 15 लोग काम करते हैं और उन कर्मचारियों के परिवार भी पूरी तरह से इसी व्यवसाय पर निर्भर हैं।

याचिकाकर्ता की मुख्य आपत्ति यह थी कि उनके रूटों पर काफी संख्या में सरकारी बसें चलती हैं। केवल सरकारी बसों में महिलाओं को मुफ्त यात्रा की सुविधा मिलने से यात्री उनकी निजी बसों में सफर नहीं करेंगे। इसके अलावा, परिवार के सदस्य भी स्वाभाविक रूप से एक साथ यात्रा करना पसंद करते हैं, जिससे पुरुषों के भी सरकारी बसों में जाने का डर था। इससे उनका कारोबार पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच सकता था।

अपनी याचिका में एन. कलामणि ने तर्क दिया था कि केवल सरकारी बसों में महिला यात्रियों से किराया न लेना बस ट्रांसपोर्ट क्षेत्र में बराबरी का माहौल बनाए रखने के सिद्धांत के विपरीत है और यह संविधान के अनुच्छेद 14 यानी समानता के अधिकार का उल्लंघन करता है। उन्होंने मोटर व्हीकल एक्ट, 1988 और तमिलनाडु मोटर व्हीकल रूल्स, 1989 का हवाला देते हुए कहा कि यात्रियों से तय किराया वसूलना अनिवार्य है और सरकार बिना किराए वाली यात्रा की घोषणा नहीं कर सकती।

रिपोर्ट के अनुसार, तमिलनाडु सरकार 'वेट्री पयनम' योजना के तहत राज्य परिवहन निगमों को मुआवजा देने के लिए हर साल 6,000 करोड़ रुपये की बड़ी रकम खर्च करती है। हालांकि तमिलनाडु के बस ऑपरेटर संघों के महासंघ ने 22 जुलाई, 2026 को मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से इस योजना को प्राइवेट बस ऑपरेटरों तक भी बढ़ाने का अनुरोध किया था, लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। याचिकाकर्ता का कहना था कि भले ही यह योजना पिछली DMK सरकार की 'विडियाल पयनम' योजना का विस्तार थी, लेकिन पुरानी योजना का दायरा सीमित था और उससे निजी ऑपरेटरों पर ज्यादा असर नहीं पड़ा था।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने 24 अगस्त को विधानसभा में नियम 110 के तहत 'वेट्री पयनम' योजना की घोषणा की थी, जिसका उद्देश्य महिलाओं को परिवहन खर्च के कारण सामाजिक और आर्थिक अवसरों से वंचित होने से बचाना है। हाल ही में 2 अक्टूबर को मुख्यमंत्री ने इस विस्तारित योजना की औपचारिक शुरुआत की और महिला यात्रियों को 'जीरो-फेयर' टिकट सौंपे। पहले यह सुविधा केवल आम शहर और कस्बों की बसों तथा पहाड़ी क्षेत्रों में 40 किलोमीटर तक की दूरी के लिए थी, लेकिन अब इसे 40 किलोमीटर से अधिक दूरी की एक्सप्रेस, लिमिटेड स्टॉप, डीलक्स, सबअर्बन ऑर्डिनरी और घाट ऑर्डिनरी सेवाओं तक बढ़ा दिया गया है। इसके तहत राज्य के सात ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन की 12,695 बसें रोजाना 1,68,500 सिंगल ट्रिप करेंगी, जिससे हर दिन करीब 84.32 लाख महिला और ट्रांसजेंडर यात्रियों को मुफ्त सफर का लाभ मिलेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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