लखनऊ हाई कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला, पार्षद को शपथ न दिलाने पर मेयर सुषमा खर्कवाल के प्रशासनिक और वित्तीय अधिकार सीज
पार्षद ललित किशोर तिवारी को शपथ न दिलाने पर हाई कोर्ट की बड़ी कार्रवाई; अगली सुनवाई तक लखनऊ डीएम संभालेंगे वित्तीय कार्य।

लखनऊ में आयोजित एक आधिकारिक कार्यक्रम के दौरान अपनी बात रखतीं लखनऊ की मेयर सुषमा खर्कवाल|
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के स्थानीय निकाय इतिहास में न्यायपालिका की ओर से अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा रुख देखने को मिला है। लखनऊ हाई कोर्ट बेंच ने अदालत के आदेश की लगातार अवहेलना करने के मामले को अत्यंत गंभीरता से लेते हुए लखनऊ नगर निगम की मेयर सुषमा खर्कवाल के सभी प्रशासनिक और वित्तीय अधिकारों को तत्काल प्रभाव से सीज करने का ऐतिहासिक आदेश जारी कर दिया है. स्थानीय स्वायत्त शासन और न्यायिक इतिहास में यह पहला मौका है जब किसी निवर्तमान महापौर के खिलाफ इस तरह की दंडात्मक और अभूतपूर्व कानूनी कार्रवाई की गई है. अदालत ने न केवल मेयर की शक्तियों पर रोक लगाई है, बल्कि लखनऊ के जिलाधिकारी (DM) और नगर आयुक्त को निर्देशित किया है कि वे मेयर के स्थान पर नगर निगम के समस्त वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों का निष्पादन सुनिश्चित करें.
यह पूरा कानूनी और राजनीतिक विवाद लखनऊ नगर निगम के वार्ड संख्या 73 में आयोजित हुए नगर निकाय चुनाव के नतीजों से जुड़ा हुआ है. चुनाव के दौरान भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशी प्रदीप शुक्ला ने इस वार्ड से जीत हासिल की थी, जबकि समाजवादी पार्टी (SP) के उम्मीदवार ललित किशोर तिवारी दूसरे स्थान पर रहे थे. इसके पश्चात सपा प्रत्याशी ललित किशोर तिवारी ने प्रदीप शुक्ला के खिलाफ अदालत में एक याचिका दायर कर दी. याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा प्रत्याशी ने अपने चुनावी नामांकन पत्र और हलफनामे में अपनी दूसरी शादी की बात छिपाई तथा कुछ अन्य अनिवार्य एवं व्यक्तिगत जानकारियों को छुपाकर नियमों का गंभीर उल्लंघन किया.
इस मामले की विस्तृत सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की ओर से लंबी दलीलें पेश की गईं. अंततः अदालत ने ललित किशोर तिवारी के पक्ष और साक्ष्यों को सही और वैध माना. कोर्ट ने तत्कालीन पार्षद प्रदीप शुक्ला के निर्वाचन को पूरी तरह से रद्द कर दिया और 19 दिसंबर 2025 को ललित किशोर तिवारी को वार्ड 73 का नया निर्वाचित पार्षद घोषित कर दिया. नियमतः इसके तुरंत बाद निर्वाचित पार्षद का शपथ ग्रहण संपन्न होना चाहिए था, लेकिन राजनीतिक रस्साकशी के चलते पिछले पांच महीनों से ललित किशोर तिवारी को पार्षद पद की शपथ नहीं दिलाई जा सकी.
नगर निगम प्रशासन और मेयर की ओर से लगातार की जा रही देरी और टालमटोल की नीति के खिलाफ ललित किशोर तिवारी ने पुनः हाई कोर्ट की शरण ली. इस पर सुनवाई करते हुए लखनऊ हाई कोर्ट बेंच ने 12 मई को मेयर सुषमा खर्कवाल को एक सप्ताह का कड़ा अल्टीमेटम दिया था और शपथ ग्रहण प्रक्रिया को अटकाए रखने के औचित्य पर गंभीर सवाल उठाए थे. अदालत ने बिना किसी अतिरिक्त विलंभ के निर्वाचित पार्षद का शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का स्पष्ट आदेश दिया था. इस बीच, इस आदेश के खिलाफ पूर्व पार्षद प्रदीप शुक्ला ने देश की सर्वोच्च अदालत यानी सुप्रीम कोर्ट का रुख किया, परंतु सुप्रीम कोर्ट ने उनकी विशेष अनुमति याचिका को खारिज करते हुए उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखा.
सर्वोच्च न्यायालय से रास्ता साफ होने के बावजूद जब आदेश का अनुपालन नहीं हुआ, तब 21 मई को हाई कोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई की. अदालत ने इसे न्यायिक आदेशों की खुली अवहेलना और कोर्ट की तौहीन मानते हुए कड़ा रुख अपनाया और मेयर सुषमा खर्कवाल के सभी प्रशासनिक एवं वित्तीय अधिकारों को पूरी तरह फ्रीज करने का आदेश सुना दिया. अदालत ने अपने लिखित आदेश में यह भी साफ कर दिया है कि जब तक नवनिर्वाचित वार्ड पार्षद ललित किशोर तिवारी को पद की गरिमा के अनुरूप आधिकारिक तौर पर शपथ नहीं दिला दी जाती, तब तक मेयर के इन अधिकारों को किसी भी परिस्थिति में बहाल नहीं किया जाएगा. इस बड़े घटनाक्रम के बाद इस संवेदनशील मामले की अगली न्यायिक सुनवाई 29 मई को मुकर्रर की गई है.
इस कड़े आदेश के बाद लखनऊ की पांचवीं महिला महापौर सुषमा खर्कवाल की मुश्किलें अत्यधिक बढ़ गई हैं. वर्तमान परिस्थितियों में वे नगर निगम के किसी भी नीतिगत, वित्तीय या प्रशासनिक दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने या फैसला लेने के योग्य नहीं रह गई हैं. इस बीच, मेयर सुषमा खर्कवाल का एक बयान भी सामने आया है, जिसमें उन्होंने कहा है कि वे 19 मई से अस्वस्थ होने के कारण अस्पताल में उपचाराधीन हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि वे कानून का सम्मान करती हैं और माननीय न्यायालय के आदेश का हर हाल में पूरी तरह पालन किया जाएगा.
सुषमा खर्कवाल भाजपा की एक बेहद कद्दावर और वरिष्ठ महिला नेता मानी जाती हैं, जो करीब तीस वर्षों से पार्टी संगठन से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने अवध क्षेत्र के महिला मोर्चा की अध्यक्ष के रूप में भी लंबा कार्य किया है और 26 मई 2023 को उन्होंने लखनऊ के महापौर पद की शपथ ली थी. मूल रूप से उत्तराखंड की निवासी सुषमा खर्कवाल के पति प्रेम खर्कवाल भारतीय सेना से सेवानिवृत्त हवलदार हैं. वे पूर्व में सैनिक कल्याण बोर्ड और रेलवे उपयोगकर्ता सलाहकार समिति की सदस्य जैसी महत्वपूर्ण भूमिकाओं में भी रह चुकी हैं. अपने बयानों को लेकर अक्सर मीडिया की सुर्खियों में रहने वाली मेयर के सामने अब केवल यही एक विधिक विकल्प बचा है कि वे अस्पताल से डिस्चार्ज होते ही जल्द से जल्द निर्वाचित पार्षद ललित किशोर तिवारी का शपथ ग्रहण संपन्न कराएं, ताकि शहर के प्रथम नागरिक के रूप में उनके अधिकारों की बहाली का मार्ग प्रशस्त हो सके.

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
