LPG Update: 1 मई से बदल सकते हैं रसोई गैस के नियम, महंगा हो सकता है सिलेंडर और नए कनेक्शन पर लगी रोक।
पश्चिम एशिया में तनाव के चलते एलपीजी आपूर्ति बाधित, सरकार ने बुकिंग नियमों को किया सख्त और नए कनेक्शनों पर लगाई अस्थायी रोक।

भारत के एक शहर में ट्रक से रसोई गैस सिलेंडरों की अनलोडिंग करते कर्मचारी|
नई दिल्ली: भारत में घरेलू रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं के लिए आने वाला महीना काफी महत्वपूर्ण और बदलावों भरा साबित हो सकता है। वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी अस्थिरता का सीधा असर अब भारतीय रसोई के बजट और आपूर्ति श्रृंखला पर पड़ता दिखाई दे रहा है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में उपजे गतिरोध के कारण एलपीजी के आयात में हो रही देरी ने केंद्र सरकार और तेल कंपनियों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि सरकार का दावा है कि वर्तमान में किल्लत जैसी स्थिति नहीं है, लेकिन एहतियातन कई कड़े कदम उठाए जा रहे हैं।
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष की वजह से रसद और आपूर्ति बाधित हुई है। भारत अपनी एलपीजी जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। होर्मुज जलडमरूमध्य, जो वैश्विक ऊर्जा व्यापार का एक प्रमुख मार्ग है, वहां तनाव के कारण जहाजों के आवागमन में देरी हो रही है। इस देरी का सीधा दबाव घरेलू स्टॉक पर पड़ रहा है। सूत्रों के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियां आगामी 1 तारीख को समीक्षा बैठक में कीमतों को लेकर बड़ा फैसला ले सकती हैं। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में चुनावी प्रक्रिया के अंतिम चरण के साथ ही तेल कंपनियां अंतरराष्ट्रीय कीमतों में हुए इजाफे का बोझ उपभोक्ताओं पर डाल सकती हैं।
इस संभावित संकट को देखते हुए पेट्रोलियम मंत्रालय ने एक बेहद कड़ा और अभूतपूर्व फैसला लिया है। देश में नए एलपीजी गैस कनेक्शन जारी करने पर तत्काल प्रभाव से अस्थायी रोक लगा दी गई है। मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार, वर्तमान में प्राथमिकता केवल मौजूदा उपभोक्ताओं की मांग को निर्बाध रूप से पूरा करना है। अधिकारियों का स्पष्ट कहना है कि कम से कम अगले एक महीने तक किसी भी नए आवेदक को नया कनेक्शन जारी नहीं किया जाएगा, ताकि उपलब्ध स्टॉक का प्रबंधन सही तरीके से किया जा सके।
केवल आपूर्ति ही नहीं, बल्कि बुकिंग के नियमों में भी बड़े बदलावों की तैयारी पूरी हो चुकी है। अब तक लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार शहरी क्षेत्रों में दो रिफिल के बीच 25 दिनों और ग्रामीण क्षेत्रों में 45 दिनों का अनिवार्य अंतर होता है। सरकार अब इस नियम को स्थायी कानून का रूप देने पर विचार कर रही है। इसका अर्थ यह है कि उपभोक्ताओं को अपनी गैस खपत में अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि तय समय सीमा से पहले रिफिल बुकिंग का विकल्प तकनीकी रूप से ब्लॉक कर दिया जाएगा। इसके अतिरिक्त, सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'डिलीवरी ऑथेंटिकेशन कोड' (DAC) यानी ओटीपी आधारित डिलीवरी सिस्टम को अब अनिवार्य बना दिया गया है। अब उपभोक्ता के पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए कोड के बिना सिलेंडर की सुपुर्दगी संभव नहीं होगी।
बाजार में सिलेंडर की कालाबाजारी और घरेलू सिलेंडरों के व्यावसायिक उपयोग की खबरें भी लगातार आ रही हैं। विशेष रूप से दक्षिण भारत के प्रमुख व्यापारिक केंद्रों जैसे हैदराबाद, विशाखापट्टनम और विजयवाड़ा में होटलों द्वारा घरेलू सिलेंडरों के अवैध इस्तेमाल की शिकायतों के बाद प्रशासन ने छापेमारी तेज कर दी है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि संकट के समय में संसाधनों का दुरुपयोग करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाएंगे। इन चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच, ऊर्जा विशेषज्ञ अब उपभोक्ताओं को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) और बिजली के चूल्हों जैसे विकल्पों को अपनाने की सलाह दे रहे हैं ताकि भविष्य में सिलेंडर की अनिश्चितता से बचा जा सके।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
