मुंबई। सुरों की दुनिया में सात दशकों से अधिक समय तक राज करने वाली जादुई आवाज आज हमेशा के लिए शांत हो गई। भारतीय पार्श्व गायन की अद्वितीय पहचान और करोड़ों दिलों की धड़कन रहीं दिग्गज गायिका आशा भोसले का 92 वर्ष की आयु में मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की पुष्टि उनके पुत्र आनंद ने की, जिससे न केवल बॉलीवुड बल्कि वैश्विक संगीत प्रेमियों में शोक की लहर दौड़ गई है। आशा भोसले पिछले कुछ महीनों से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रही थीं और उन्हें गंभीर स्थिति में अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया था। यद्यपि उनके परिवार और प्रशंसकों को उनके शीघ्र स्वस्थ होने की आशा थी, किंतु नियति को कुछ और ही मंजूर था।

आशा भोसले का जन्म वर्ष 1933 में संगीतकार दीनानाथ मंगेशकर के घर हुआ था। संगीत उन्हें विरासत में मिला था, किंतु उनके जीवन का संघर्ष किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं रहा। मात्र नौ वर्ष की कोमल आयु में पिता का साया सिर से उठ जाने के बाद, परिवार की आर्थिक नैया को पार लगाने की जिम्मेदारी उन पर और उनकी बड़ी बहन लता मंगेशकर पर आ गई। इसी विवशता ने उन्हें वर्ष 1943 में गायन की दुनिया में कदम रखने पर मजबूर किया। अपनी पहली रिकॉर्डिंग से लेकर 12 हजार से अधिक गानों तक का सफर उनकी अथक मेहनत और कला के प्रति समर्पण का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने शास्त्रीय संगीत से लेकर पॉप, गजल और भजन तक हर विधा में अपनी विशिष्ट छाप छोड़ी।

उनकी उपलब्धियों का आकाश अत्यंत विस्तृत है। आशा भोसले के नाम दो बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज किया गया और वे ग्रैमी नामांकन पाने वाली पहली भारतीय गायिका बनीं। सात फिल्मफेयर पुरस्कार, दो राष्ट्रीय पुरस्कार और वर्ष 2000 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार उनकी श्रेष्ठता पर मुहर लगाते हैं। कला के क्षेत्र में उनके अप्रतिम योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें वर्ष 2008 में देश के दूसरे सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'पद्म विभूषण' से अलंकृत किया था। उनकी आवाज में वो लचीलापन था जिसने बदलते दौर के साथ खुद को ढाला और हर पीढ़ी के संगीतकारों की पहली पसंद बनी रहीं।

व्यक्तिगत जीवन में आशा भोसले ने असीम दुखों और संघर्षों का सामना किया। मात्र 16 वर्ष की आयु में परिवार के विरुद्ध जाकर गणपतराव भोसले से विवाह करना और बाद में घरेलू प्रताड़ना के कारण तीन बच्चों के साथ अकेले संघर्ष करना, उनके साहस को दर्शाता है। जीवन के उत्तरार्ध में दिग्गज संगीतकार आरडी बर्मन के साथ उनकी संगीतमय जोड़ी ने इतिहास रचा, किंतु नियति ने वहां भी उन्हें अकेला छोड़ दिया। अपने दो बच्चों, हेमंत और वर्षा को खोने का असह्य दुख सहने के बावजूद उन्होंने कभी अपनी मुस्कुराहट और सुरों को हारने नहीं दिया। आज उनके निधन से संगीत के उस स्तंभ का पतन हो गया है जिसने भारतीय सिनेमा के संगीत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक नई ऊंचाई दी थी।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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