उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक बहुत बड़े और पुराने कानूनी विवाद का अंत हो गया है। जिले के ऐतिहासिक पडरौना राजदरबार की 1503.57 एकड़ सीलिंग भूमि अब पूरी तरह से राज्य सरकार के कब्जे में आ गई है। अपर जिलाधिकारी (न्यायिक) द्वारा इस मामले में 14 अगस्त 2026 को अंतिम आदेश पारित किया गया, जिसके साथ ही पिछले लगभग 44 वर्षों से चला आ रहा यह जटिल भूमि विवाद कानूनी रूप से समाप्त हो गया है। प्रशासन की प्रभावी पैरवी और लगातार निगरानी के चलते यह बड़ा फैसला संभव हो पाया है।

इस पूरे कानूनी घटनाक्रम की शुरुआत 1978 में हुई थी। पडरौना राजदरबार की मृतक खातेदार रानी रेवती देवी (पत्नी स्वर्गीय रवि प्रताप नरायन सिंह) की पडरौना, खड्डा, कसया और कप्तानगंज तहसीलों में स्थित संपत्तियों पर उत्तर प्रदेश अधिकतम जोत सीमा आरोपण अधिनियम के तहत सीलिंग की कार्रवाई शुरू की गई थी। तीस नवंबर 1978 को नियत प्राधिकारी ने पुराने और संशोधित सीलिंग अधिनियम के तहत बड़ी मात्रा में सिंचित भूमि को अतिरिक्त घोषित किया था। इस आदेश के खिलाफ अपीलीय न्यायालय और बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में लंबी कानूनी लड़ाइयां लड़ी गईं। हालांकि, पांच जुलाई 2002 को हाईकोर्ट में दाखिल याचिका डिसमिस्ड इन डिफॉल्ट हो गई, जिससे सीलिंग कार्रवाई पर लगा स्थगन आदेश भी समाप्त हो गया था।

लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद 14 अगस्त 2026 को पारित अंतिम आदेश के तहत, विधिक उत्तराधिकारियों के उपयोग के लिए 18.04 एकड़ सिंचित भूमि को छोड़ दिया गया है, जबकि शेष 1503.57 एकड़ भूमि को अतिरिक्त घोषित कर राज्य सरकार के अधीन कर लिया गया है। इस कुल भूमि में सबसे बड़ा हिस्सा खड्डा तहसील का है, जहां 1127.43 एकड़ जमीन शामिल है। इसके अलावा पडरौना तहसील में 339.54 एकड़, कसया में 10 एकड़ और कप्तानगंज तहसील में 26.60 एकड़ भूमि सरकार के खाते में आई है।

जिला प्रशासन अब इस पूरी जमीन को राजस्व अभिलेखों यानी खतौनी में राज्य सरकार और सीलिंग मद में दर्ज कराने की प्रक्रिया तेजी से शुरू कर चुका है। प्रशासन का यह स्पष्ट निर्देश है कि सीलिंग भूमि पर यदि किसी भी प्रकार का अवैध कब्जा पाया जाता है, तो संबंधित अतिक्रमणकारियों को तुरंत बेदखल कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। सरकार की इस जमीन का उपयोग क्षेत्र के विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के लिए किया जाएगा। इसके तहत भूमिहीन, गरीब और अनुसूचित जाति-जनजाति के परिवारों को नियमानुसार कृषि और आवासीय पट्टे दिए जाएंगे। साथ ही, इस भूमि पर स्कूल, अस्पताल, आंगनबाड़ी केंद्र, खेल के मैदान और पंचायत भवन जैसी सार्वजनिक बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जा सकेगा, जिससे ग्रामीण इलाकों और जरूरतमंद परिवारों के जीवन स्तर में बड़ा सुधार आएगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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