पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में एक बार फिर भारी मात्रा में नकदी मिलने से राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। कोलकाता के प्रतिष्ठित सुरेंद्रनाथ कॉलेज के छात्र संघ कक्ष से लाखों रुपए की बेहिसाब नकदी बरामद की गई है। इस बरामदगी की खास बात यह है कि यह रकम लंबे समय से एक अलमारी में बंद थी, जिसके कारण नोटों को दीमकों ने पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। शिक्षा संस्थान के भीतर से इस तरह लावारिस हालत में भारी मात्रा में नकदी मिलने के बाद राज्य की कानून व्यवस्था और प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

यह सनसनीखेज घटना उस समय सामने आई जब कोलकाता नगर निगम के अधिकारी और सफाई कर्मचारी कॉलेज परिसर में नियमित रखरखाव और स्वच्छता अभियान के तहत काम कर रहे थे। छात्र संघ कार्यालय के एक बंद कक्ष की अलमारी का ताला जब खोला गया, तो वहां मौजूद कर्मचारियों के होश उड़ गए। अलमारी के भीतर दो बड़े बैग रखे हुए थे, जो नोटों की गड्डियों से ठसाठस भरे थे। प्राथमिक जांच और अधिकारियों के शुरुआती अनुमान के मुताबिक, इन बैगों में रखी कुल राशि लगभग 50 लाख से 60 लाख रुपए के बीच हो सकती है। हालांकि, लंबे समय तक नमी और बंद जगह में रहने के कारण इन नोटों पर दीमक लग चुका है और वे इस हद तक गल चुके हैं कि उनकी सामान्य पहचान करना भी बेहद मुश्किल हो गया है।

बरामद किए गए नोटों के जो हिस्से थोड़े बहुत सुरक्षित बचे हैं, उन्हें देखने से पता चलता है कि यह नकदी पुराने 500 रुपए के मूल्यवर्ग की है। इस घटना की जानकारी मिलते ही विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस पर चौतरफा हमला बोल दिया है। बारानगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा विधायक सजल घोष ने इस मामले को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कॉलेज के वर्तमान और तत्कालीन छात्र नेताओं को तुरंत हिरासत में लेकर पूछताछ करने की मांग की है। भाजपा विधायक ने आरोप लगाया कि यह आम जनता का पैसा है, जिसे कॉलेज में दाखिले के सत्र के दौरान छात्रों और उनके अभिभावकों से अवैध रूप से वसूला गया था। उन्होंने दावा किया कि कॉलेज के आधिकारिक फंड में पहले से ही पर्याप्त राशि मौजूद है, ऐसे में छात्र संघ के कमरे में इस गुप्त नकदी का मिलना सीधे तौर पर सिंडिकेट राज और भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है।

प्रशासनिक स्तर पर इस बरामदगी के बाद हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस के आला अधिकारी मामले की जांच में जुट गए हैं। कॉलेज प्रबंधन और स्थानीय पुलिस इस बात का पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह पैसा किस वर्ष में और किस उद्देश्य से यहां लाकर छुपाया गया था। चूंकि नोट पुराने हैं, इसलिए अंदेशा जताया जा रहा है कि यह राशि नोटबंदी के दौर या उससे भी पहले की हो सकती है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी इस घटना से जुड़े वीडियो और तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं, जिससे आम जनता में भी भारी आक्रोश देखा जा रहा है। फिलहाल मामले की आधिकारिक जांच जारी है और फोरेंसिक तथा वित्तीय विंग की रिपोर्ट आने के बाद ही इस बेहिसाब संपत्ति के असली मालिकों का पता चल सकेगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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