लव ट्रैप' का डार्क वेब कनेक्शन: KGMU की महिला डॉक्टर के मामले में STF के हाथ लगे 4TB डेटा और 500 से ज्यादा अश्लील वीडियो|
यूपी एसटीएफ की जांच में केजीएमयू के आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नायक के डार्क वेब और देशव्यापी नेटवर्क से जुड़े अहम खुलासे हुए हैं।

बाएं केजीएमयू का मुख्य द्वार और दाएं पुलिस सुरक्षा में खड़े डॉ. रमीजुद्दीन नायक लखनऊ में नजर आ रहे हैं।
किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय यानी केजीएमयू की एक महिला डॉक्टर से जुड़े सनसनीखेज मामले में उत्तर प्रदेश की एसटीएफ को मुख्य आरोपी डॉ. रमीजुद्दीन नायक के देशव्यापी नेटवर्क और डार्क वेब संपर्कों के कई अहम सुराग हाथ लगे हैं। इस मामले में डॉक्टर पर दुष्कर्म, जबरन गर्भपात करवाने, धर्मांतरण के लिए दबाव डालने और गंभीर प्रताड़ना देने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई थी कि आरोपी का दायरा केवल लखनऊ शहर तक ही सीमित नहीं था, बल्कि वह डार्क वेब के माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों में फैले अपने साथियों के साथ संपर्क बनाए रखता था। फिलहाल, एसटीएफ उसके पूरे डिजिटल डेटा और इस देशव्यापी नेटवर्क की हर एक कड़ी को जोड़ने की गहराई से जांच कर रही है।
जांच एजेंसी के सामने यह बात भी खुलकर आई है कि डॉ. रमीजुद्दीन अपने साथियों को विभिन्न प्रकार के टास्क या काम सौंपा करता था। उस पर यह भी गंभीर आरोप है कि वह अपने साथियों को कामकाजी महिलाओं, कॉलेज की छात्राओं और महिला डॉक्टरों को पहले अपने विश्वास में लेने और फिर अपने जाल में फंसाने के अलग-अलग तरीके सिखाया करता था। इसी कड़ी में जांच एजेंसी उसके पास से बरामद लैपटॉप में मौजूद डिजिटल डेटा, तकनीकी जानकारियों और पूरे देश में फैले संपर्कों का बारीकी से विश्लेषण कर रही है ताकि उसके इस पूरे नेटवर्क की गतिविधियों और इसमें शामिल अन्य साथियों की भूमिका का सच सामने आ सके।
पुलिस और यूपी एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई के बाद इस मामले में अदालत के भीतर 800 से अधिक पन्नों की एक विस्तृत चार्जशीट दाखिल की जा चुकी है। इस चार्जशीट में डॉ. रमीजुद्दीन समेत कुल चार लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें मुख्य रूप से दो पीड़िताओं के कलमबंद बयान, महत्वपूर्ण डिजिटल साक्ष्य और फॉरेंसिक रिपोर्ट को शामिल किया गया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी के कब्जे से तीन लैपटॉप बरामद किए गए थे जिनकी फॉरेंसिक जांच से करीब 12 साल से अधिक पुराना और 4 टेराबाइट यानी लगभग 4,000 जीबी डेटा मिला है। इस डेटा के भीतर 500 से ज्यादा अश्लील वीडियो होने का दावा किया गया है। पुलिस का यह भी आरोप है कि रमीजुद्दीन अपनी मेडिकल की पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही इस तरह की संदिग्ध गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल रहा है और इन वीडियो का इस्तेमाल महिलाओं को ब्लैकमेल करने के लिए किया जाता था।
इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच का दायरा अब देश के बड़े चिकित्सा संस्थानों से जुड़े कुछ अन्य डॉक्टरों की भूमिका तक भी पहुंच गया है। एसटीएफ की जांच रिपोर्ट में केजीएमयू के पैथोलॉजी विभाग में तैनात एक महिला डॉक्टर और उनके पति का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है। आरोप है कि पीजीआई में तैनात ये डॉक्टर रमीजुद्दीन की अवैध गतिविधियों में मदद करते थे और उसे मेडिकल छात्राओं तथा अन्य महिला डॉक्टरों से मिलवाने और उनसे संपर्क बढ़ाने में पूरा सहयोग देते थे। इस सिलसिले में एसटीएफ जल्द ही पीजीआई और केजीएमयू के संबंधित डॉक्टरों और कर्मचारियों से पूछताछ करने की पूरी तैयारी कर रही है। इसके साथ ही, इन संस्थानों के स्तर पर यदि किसी प्रकार की प्रशासनिक लापरवाही बरती गई है, तो उसकी भी अलग से जांच की जा रही है।
जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस मामले में डॉक्टरों के आपसी आर्थिक संबंध और पैसों के लेन-देन का मामला भी अब पूरी तरह से जांच के दायरे में आ गया है। एसटीएफ की रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि केजीएमयू के करीब आधा दर्जन डॉक्टरों ने एरा मेडिकल यूनिवर्सिटी में बहुत बड़ा आर्थिक निवेश किया हुआ है। इस रिपोर्ट में केजीएमयू के बायोकेमिस्ट्री विभाग के पूर्व प्रमुख डॉ. अब्बास अली मेहंदी का भी विशेष जिक्र किया गया है, जिन्होंने केजीएमयू से अवकाश लेकर एरा मेडिकल कॉलेज की जिम्मेदारी संभाली थी और वर्तमान में वे वहीं के कुलपति के पद पर हैं। उनके इस संस्थान से जुड़ने के बाद केजीएमयू के अन्य डॉक्टरों की तरफ से भी बड़े पैमाने पर निवेश किए जाने की बात सामने आई है। फिलहाल, एसटीएफ इन सभी संस्थागत और आर्थिक निवेशों की प्रकृति की गहनता से जांच कर रही है और यह पता लगाने की कोशिश में जुटी है कि इन वित्तीय लेन-देन का आरोपी के नेटवर्क को संरक्षण देने या उसकी किसी भी तरह की फंडिंग से कोई सीधा संबंध था या नहीं।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
