मैसूर से कर्नाटक तक का सफर- 71वें स्थापना दिवस पर जानिए इस दक्षिण राज्य की अनूठी संस्कृति और इतिहास|
1 नवंबर 1956 को मैसूर राज्य के रूप में गठित कर्नाटक अपना 71वां स्थापना दिवस मना रहा है, जिसे पूरे राज्य में कर्नाटक राज्योत्सव के रूप में आयोजित किया जा रहा है।

कर्नाटक स्थापना दिवस के अवसर पर राज्य की सांस्कृतिक विविधता, ऐतिहासिक धरोहरों और कला रूपों को दर्शाता एक विशेष पोस्टर।
आज 1 नवंबर को कर्नाटक राज्य अपना 71वां स्थापना दिवस बहुत ही धूमधाम से मना रहा है। इस खास अवसर पर पूरे राज्य में 'कर्नाटक राज्योत्सव' का भव्य आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कन्नड़ संस्कृति, भाषा और इतिहास की झलक देखने को मिलती है। राज्यभर के सरकारी और गैर-सरकारी संस्थानों, स्कूलों तथा सार्वजनिक स्थलों पर ध्वजारोहण और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का सिलसिला जारी है। लोग अपने राज्य के गौरवशाली इतिहास को याद कर रहे हैं और अपनी संस्कृति के प्रति सम्मान प्रकट कर रहे हैं।
मैसूर राज्य से कर्नाटक बनने का सफर
आज का कर्नाटक राज्य पहले एक अलग स्वरूप में था। इतिहास के पन्नों को पलटें तो 1 नवंबर 1956 का दिन दक्षिण भारत के इतिहास में बहुत महत्वपूर्ण है। इस दिन सभी कन्नड़ भाषी क्षेत्रों को आपस में मिलाकर एक संगठित 'मैसूर राज्य' का गठन किया गया था। लंबे समय तक प्रशासनिक और भौगोलिक रूप से यह क्षेत्र मैसूर राज्य के नाम से ही जाना जाता रहा। इसके बाद, समय के साथ बदलाव आए और क्षेत्रीय भावनाओं तथा जनसाधारण की मांग का सम्मान करते हुए वर्ष 1973 में मैसूर राज्य का नाम बदलकर आधिकारिक रूप से 'कर्नाटक' कर दिया गया। तब से हर साल 1 नवंबर को इस क्षेत्र के एकीकरण और स्थापना की याद में राज्योत्सव मनाया जाता है।
कन्नड़ भाषा और समृद्ध संस्कृति का उत्सव
कर्नाटक राज्योत्सव केवल एक सरकारी या प्रशासनिक पर्व नहीं है, बल्कि यह हर कन्नड़ भाषी व्यक्ति के लिए अपने स्वाभिमान और संस्कृति का पर्व है। इस दिन पीले और लाल रंग के कन्नड़ झंडे हर तरफ लहराते हुए दिखाई देते हैं, जो कर्नाटक की पहचान बन चुके हैं। राज्य की राजधानी बेंगलुरु समेत हर छोटे-बड़े जिले में संगीत, नृत्य, साहित्य और लोक कलाओं के कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। कन्नड़ साहित्यकारों, कलाकारों और राज्य के विकास में योगदान देने वाले महानुभावों को इस दिन विशेष रूप से याद किया जाता है और सम्मानित किया जाता है।
ऐतिहासिक धरोहर और आधुनिक विकास का संगम
कर्नाटक का इतिहास केवल भाषा या नाम बदलने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी जड़ें प्राचीन राजवंशों और समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर से जुड़ी हैं। विजयनगर साम्राज्य से लेकर मैसूर के वोडयार राजाओं तक, इस भूमि ने इतिहास को गढ़ा है। आज एक तरफ जहां कर्नाटक ऐतिहासिक स्मारकों, हंपि और मैसूर पैलेस जैसी धरोहरों के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है, वहीं दूसरी तरफ बेंगलुरु को भारत की 'सिलिकॉन वैली' यानी सूचना प्रौद्योगिकी का बड़ा केंद्र माना जाता है। कृषि से लेकर आधुनिक तकनीक तक, यह राज्य देश की अर्थव्यवस्था में एक मजबूत स्तंभ की तरह अपनी भूमिका निभा रहा है। स्थापना दिवस का यह पर्व राज्य के गौरवशाली अतीत को सहेजने और भविष्य की नई ऊंचाइयों को छूने का संकल्प लेने का अवसर है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
