कपिल सिब्बल ने उठाई दल-बदल और 'पैटर्न' की बात, सुप्रीम कोर्ट ने कहा- पहले हमें खुद अपने गिरेबान में झांकना चाहिए|
सुप्रीम कोर्ट ने स्पीकर की अयोग्यता पर समय-सीमा तय करने की मांग पर कहा कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले न्यायपालिका को खुद आईना देखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट के परिसर में खड़े वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल और मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जो न्यायपालिका की आत्ममंथन टिप्पणी के संदर्भ में हैं।
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने सोमवार को भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच के सामने यह बात रखी कि देश भर में स्पीकरों द्वारा फैसले लेने में जानबूझकर देरी की जा रही है, जिससे दल-बदल को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने पश्चिम बंगाल में टीएमसी के विधायकों की अयोग्यता से जुड़े मामले में विधानसभा स्पीकर के लिए एक समय-सीमा तय करने की मांग की। हालांकि, सीजेआई बेंच ने साफ कर दिया कि दूसरों के लिए डेडलाइन तय करने से पहले न्यायपालिका को अपने गिरेबान में भी झांककर देखना चाहिए।
पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर विधानसभा स्पीकर को जल्दी फैसला लेने के निर्देश देने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई थी। इस पर सोमवार को सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच में सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि किसी अन्य संवैधानिक संस्था के लिए इस तरह की समय-सीमा तय करने से पहले न्यायपालिका को खुद भी आत्ममंथन करना चाहिए कि क्या वह खुद मामलों के निपटारे के लिए तय समय-सीमा का पालन कर पा रही है।
सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी खेमे की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सीजेआई की बेंच के सामने दलील दी कि 8 अक्टूबर को 3 महीने खत्म हो जाएंगे और यह एक पैटर्न है, जैसे शिवसेना के मामले में देखा गया था। उन्होंने कहा कि अयोग्यता का मामला देखा नहीं जाता और चुनाव आयोग जाकर आदेश ले आते हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि हम यह उम्मीद करते हुए मामले का निपटारा करेंगे कि स्पीकर केशम मेघचंद्र केस में निर्धारित कानून का पालन करेंगे। जवाब में कपिल सिब्बल ने कहा कि लॉर्डशिप आप किसी दिन इस पैटर्न की जांच कर सकते हैं।
इस पर जस्टिस बागची ने स्पष्ट रूप से कहा कि समय-सीमा के मामले में खामी तो न्यायपालिका में भी है। जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि हमें निर्देश जारी करने से पहले आईना देखना चाहिए क्योंकि ऐसे कई मामले हैं, जिनका न्यायपालिका को तेजी से निपटारा करना चाहिए और हम इसमें बहुत ही ज्यादा चूक कर रहे हैं।
इस मामले से जुड़े तथ्यों के अनुसार, टीएमसी के 10 बागी विधायकों के खिलाफ अयोग्यता की याचिका 8 जुलाई को डाली गई थी। इन विधायकों ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली पार्टी से अलग होकर एक अलग ग्रुप बना लिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा के स्पीकर की ओर से इनकी अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के लिए तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर को समाप्त हो रही है।
सीजेआई की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि हमारे पास यह मानने के पर्याप्त कारण हैं कि विधानसभा के स्पीकर केशम मेघचंद्र सिंह मामले में सुनाए गए फैसले के सिद्धांतों से पूर्ण रूप से वाकिफ हैं और उस कानूनी फ्रेमवर्क के अंदर उचित निर्णय लेने की पूरी कोशिश करेंगे। अदालत का मानना है कि स्पीकर पर अविश्वास करने का फिलहाल कोई ठोस कारण नहीं है।

Lalita Rajput
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