नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश जस्टिस बीवी नागरत्ना ने भारत के संघीय ढांचे की पवित्रता को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संदेश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्यों के बीच के संबंध किसी दल की राजनीतिक विचारधारा या सत्ता की सुविधा से नहीं, बल्कि देश के संविधान की मर्यादाओं से निर्धारित होते हैं। जस्टिस नागरत्ना ने इस बात पर विशेष बल दिया कि राज्यों को केंद्र की अधीनस्थ इकाइयों के रूप में देखने के बजाय उन्हें समकक्ष साझीदारों के तौर पर सम्मान दिया जाना चाहिए, जो कि एक स्वस्थ लोकतंत्र के लिए अनिवार्य है।

पटना में चाणक्य नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी द्वारा आयोजित प्रथम डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्मृति व्याख्यान में 'कॉन्स्टिट्यूशनलिज्म बियॉन्ड राइट्स: व्हाई स्ट्रक्चर मैटर्स' विषय पर बोलते हुए जस्टिस नागरत्ना ने संवैधानिक सीमाओं की याद दिलाई। उन्होंने तर्क दिया कि राज्य सरकारें अपनी शक्तियों के लिए सीधे संविधान की ऋणी हैं और वे केंद्र के अधीन तब तक नहीं हैं जब तक कि संविधान स्वयं ऐसी कोई सीमा निर्धारित न करे। इसलिए, सत्ता में बैठे राजनीतिक दलों के आधार पर राज्यों के साथ अलग-अलग व्यवहार करना न केवल अनुचित है, बल्कि यह संवैधानिक मूल्यों का उल्लंघन भी है।

जस्टिस नागरत्ना ने प्रशासनिक निर्णयों में निष्पक्षता का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकास योजनाओं या शासन के किसी भी स्तर पर किसी राज्य के नागरिकों के साथ भेदभाव नहीं किया जा सकता। उन्होंने आगाह किया कि केंद्र द्वारा 'पिक एंड चूज' यानी पसंद-नापसंद की नीति अपनाना संघीय व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है। उनके अनुसार, दलगत मतभेदों या वैचारिक असहमतियों को संवैधानिक शासन के दायरे से बाहर रखना आवश्यक है ताकि विकास की मुख्यधारा में हर राज्य समान रूप से शामिल हो सके।

शक्तियों के विकेंद्रीकरण पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि राजनीतिक शक्ति को किसी एक केंद्र में केंद्रित करना संविधान निर्माताओं की मंशा नहीं थी। संघीय ढांचा इसीलिए बनाया गया है ताकि केंद्र और राज्यों के बीच अधिकारों का एक सटीक संतुलन बना रहे, जिससे शासन में जवाबदेही और संवेदनशीलता सुनिश्चित हो सके। जस्टिस नागरत्ना का यह संबोधन भारतीय लोकतंत्र की उन जड़ों को सींचने वाला है जहाँ संविधान ही सर्वोच्च है और हर राज्य की अपनी गरिमा और संवैधानिक पहचान सुरक्षित है。

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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