जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद और देश विरोधी गतिविधियों पर लगाम कसने के लिए सुरक्षा बलों ने एक बहुत बड़ी कार्रवाई की है। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने गैर-कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम यानी यूएपीए के तहत सोपोर इलाके में प्रतिबंधित संगठन जमात-ए-इस्लामी के कुल 26 ठिकानों पर एक साथ बड़े पैमाने पर तलाशी अभियान चलाया है। पुलिस की इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य आतंकी नेटवर्क से जुड़े ठोस सबूत जुटाना और इस प्रतिबंधित संगठन के पुराने व छिपे संपर्कों की गहराई से जांच करना है।

अधिकारियों के अनुसार, यह पूरी कार्रवाई आतंकवाद से जुड़े एक मामले के तहत की गई है। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पहले ही जमात-ए-इस्लामी को अलगाववादी और आतंकवादी गतिविधियों से जुड़े होने के कारण एक गैर-कानूनी संगठन घोषित किया था। यह प्रतिबंध साल 2019 के पुलवामा हमले के ठीक बाद लगाया गया था, जिसे सरकार ने फरवरी 2024 में पांच साल के लिए और आगे बढ़ा दिया था। सरकार का यह मानना रहा है कि इस तरह के संगठन देश की राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा हैं और वे क्षेत्र में अलगाववाद को बढ़ावा देते हैं।

जमात-ए-इस्लामी जम्मू-कश्मीर का यह संगठन 1950 के दशक में अस्तित्व में आया था। इसकी स्थापना 1953 में मौलाना सादुद्दीन ताराबली ने की थी, जो 1985 तक इसके प्रमुख रहे। यह संगठन सैयद अबुल आला मौदूदी की शिक्षाओं से प्रभावित था और इसने स्कूलों तथा सामाजिक कल्याण के कार्यों की आड़ में एक बड़ा नेटवर्क तैयार किया था, जो कश्मीर को एक विवादित क्षेत्र मानता था।

खास बात यह है कि 1990 के दशक में घाटी में अलगाववादी हिंसा भड़कने से पहले यह संगठन चुनावी प्रक्रिया का हिस्सा भी रह चुका है। इस समूह के सबसे विवादास्पद और प्रमुख नेता सैयद अली शाह गिलानी रहे हैं, जिन्होंने अलगाववादी हिंसा शुरू होने से पहले जम्मू-कश्मीर विधानसभा के लिए आठ बार चुनाव लड़ा था। वे तीन बार जीते और पांच बार हारे थे। बाद में गिलानी मुख्यधारा की जमात से पूरी तरह अलग हो गए और उन्होंने 'तहरीक-ए-हुर्रियत' नाम से एक नया संगठन बना लिया। साल 2021 में अपनी मृत्यु तक वे पाकिस्तान-समर्थक रुख पर अडिग रहे। हालांकि, इस संगठन में बाद में आंतरिक टूट भी हुई, जिसके परिणामस्वरूप जस्टिस एंड डेवलपमेंट फ्रंट नाम से एक अलग गुट बना और इसके कई पूर्व कार्यकर्ताओं ने देश के संवैधानिक ढांचे के दायरे में रहकर काम करने की घोषणा की थी।

सोपोर में हुई इस ताज़ा छापेमारी से आतंकवाद के समर्थकों और देश विरोधी नेटवर्क में हड़कंप मच गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां इस बात की बारीकी से जांच कर रही हैं कि प्रतिबंध के बावजूद इस संगठन के तार कहां-कहां जुड़े हुए हैं।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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