इजरायल-ईरान युद्ध: डोनाल्ड ट्रंप की अपील के बावजूद इजरायल ने ईरान पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें, मध्य पूर्व में बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनी के बाद भी इजरायली सेना द्वारा ईरान पर किए गए मिसाइल हमलों के बाद उपजा भू-राजनीतिक संकट।

ईरान-इजरायल युद्ध के बीच पीएम नेतन्याहू (बाएं) और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप (दाएं) की स्थिति दर्शाती कोलाज तस्वीर।
वॉशिंगटन/तेल अवीव: मध्य पूर्व में जारी भू-राजनीतिक संकट एक बार फिर अत्यंत गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। हिज्बुल्लाह पर इजरायली सैन्य कार्रवाई के जवाब में ईरान द्वारा किए गए मिसाइल हमलों के बाद अब इजरायल ने भी आक्रामक रुख अपना लिया है। इजरायली रक्षा बलों (IDF) ने आज सुबह ईरान के पश्चिमी और मध्य हिस्सों में स्थित प्रमुख सैन्य ठिकानों पर जमीन से मार करने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों और वायु सेना के जरिए भीषण जवाबी हमले किए हैं। इस सैन्य कार्रवाई ने न केवल दोनों देशों के बीच पूर्व में हुए अस्थायी युद्धविराम को संकट में डाल दिया है, बल्कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की शांति अपीलों को भी बड़ा झटका दिया है।
यह सैन्य टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी प्रशासन लगातार दोनों देशों को संयम बरतने की सलाह दे रहा था। हाल ही में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मीडिया संस्थान 'फाइनेंशियल टाइम्स' को दिए एक साक्षात्कार में यह दावा किया था कि मध्य पूर्व और ईरान युद्ध से जुड़े तमाम बड़े नीतिगत फैसले वही ले रहे हैं। ट्रंप का मानना था कि इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास अमेरिकी मध्यस्थता वाली शर्तों और समझौतों को मानने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं होगा। हालांकि, इजरायल द्वारा सीधे तेहरान और उसके सैन्य बुनियादी ढांचों पर दागे गए बमों ने वाशिंगटन के इन दावों और कूटनीतिक दबाव पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। इजरायल की इस स्वतंत्र सैन्य कार्रवाई से स्पष्ट है कि वह अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों में किसी भी बाहरी हस्तक्षेप को स्वीकार करने के मूड में नहीं है।
इस ताजा मिसाइल हमले के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच किसी भी संभावित या दीर्घकालिक शांति समझौते की राह बेहद जटिल हो गई है। अमेरिकी प्रशासन को यह उम्मीद थी कि यह मौजूदा तनाव भी अप्रैल 2024 के घटनाक्रम की तरह सीमित हमलों के बाद स्वतः ही शांत हो जाएगा और एक पूर्ण युद्ध का रूप नहीं लेगा। परंतु इस बार जमीनी हालात पूरी तरह भिन्न नजर आ रहे हैं। 8 अप्रैल से प्रभावी दिख रहे आंशिक युद्धविराम की अवधि के दौरान ईरान ने अपनी मिसाइल और सैन्य क्षमताओं को फिर से सुदृढ़ कर लिया है। इसके साथ ही यमन की ओर से भी इजरायल पर लगातार हमले किए जा रहे हैं, जिसके कारण इजरायली सेना हिज्बुल्लाह और अन्य क्षेत्रीय खतरों पर अपनी कार्रवाई रोकने को तैयार नहीं है।
सैन्य विश्लेषकों के अनुसार, यदि यह संघर्ष आगे और बढ़ता है तो इसके आर्थिक और रणनीतिक परिणाम वैश्विक स्तर पर भुगतने पड़ सकते हैं। ईरान समर्थित गुटों द्वारा खाड़ी क्षेत्र में जलमार्गों को प्रभावित करने की धमकियां दी जा रही हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य के बाद अब बाब अल-मंडेब जलमार्ग को भी पूरी तरह बंद करने की चेतावनी दी गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति और समुद्री व्यापार ठप होने की कगार पर पहुंच सकता है। इस कठिन परिस्थिति में अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने सबसे बड़ी चुनौती अपने सबसे करीबी सहयोगी इजरायल को अगले हमलों का जवाब देने से रोकने की होगी। यदि ईरान नए सिरे से इजरायल पर पलटवार करता है, तो वाशिंगटन के लिए यह तय करना बेहद मुश्किल होगा कि वह इस युद्ध में सीधे तौर पर इजरायल की मदद के लिए उतरे या कूटनीतिक दूरी बनाए रखे। फिलहाल, पूरा मध्य पूर्व एक बड़े क्षेत्रीय युद्ध के मुहाने पर खड़ा दिखाई दे रहा है।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
