नई दिल्ली: भारतीय रेलवे से यात्रा करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए एक बेहद राहत भरी खबर सामने आई है। रेल मंत्रालय के सार्वजनिक उपक्रम इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) की टिकटिंग वेबसाइट पर टिकट बुक करते समय होने वाली तकनीकी दिक्कतों को सरकार जल्द ही पूरी तरह समाप्त करने जा रही है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की है कि आईआरसीटीसी की एक नई और पहले से कहीं अधिक उन्नत व बेहतर वेबसाइट अगले महीने के मध्य तक देश की जनता के लिए शुरू कर दी जाएगी। इस नए डिजिटल ढांचे का सीधा लाभ आम रेल यात्रियों को १५ जुलाई से मिलने लगेगा, जिससे पीक आवर्स के दौरान टिकट बुकिंग की प्रक्रिया अत्यधिक सुगम हो जाएगी।

इस महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव का खुलासा रेल मंत्री ने जयपुर स्थित मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNIT) में आयोजित एक संवाद कार्यक्रम के दौरान किया। संस्थान के विद्यार्थियों से संवाद करते हुए रेल मंत्री को जमीनी हकीकत और डिजिटल बाधाओं से सीधे रूबरू होना पड़ा। कार्यक्रम के दौरान संस्थान की एक छात्रा ने आईआरसीटीसी पोर्टल पर तत्काल टिकट बुकिंग के समय आने वाली कैपचा और वन टाइम पासवर्ड (OTP) की जटिलताओं का मुद्दा पुरजोर तरीके से उठाया। छात्रा की इस व्यावहारिक समस्या पर रेल मंत्री ने संवेदनशीलता दिखाते हुए तत्काल मंच से ही रेलवे के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी को फोन मिला दिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से अधिकारी से विद्यार्थियों की इस मांग को साझा करते हुए पूछा कि क्या आईआरसीटीसी की नई वेबसाइट को एक महीने के भीतर तैयार कर लॉन्च किया जा सकता है। इसके पश्चात उन्होंने छात्रा को आश्वस्त किया कि १५ जुलाई तक इस अत्याधुनिक पोर्टल की औपचारिक लॉन्चिंग कर दी जाएगी।

वर्तमान में आईआरसीटीसी की आधिकारिक टिकटिंग वेबसाइट पर प्रतिदिन लाखों उपभोक्ताओं को टिकट बुक करते समय भारी तकनीकी व्यवधानों का सामना करना पड़ता है। यह संकट विशेष रूप से तब और गहरा जाता है जब सुबह ठीक आठ बजे दो महीने आगे की सामान्य बुकिंग शुरू होती है। इसके अतिरिक्त सुबह १० बजे एसी श्रेणियों और ११ बजे गैर-एसी श्रेणियों के लिए तत्काल टिकटों की बुकिंग खुलते ही वेबसाइट पर ट्रैफिक का दबाव अप्रत्याशित रूप से बढ़ जाता है। ऐसे पीक आवर्स में अत्यधिक ट्रैफिक लोड के कारण आईआरसीटीसी की साइट का क्रैश होना या सर्वर धीमा होना एक आम समस्या बन चुका है। इसी संवेदनशील समय में सुरक्षा औपचारिकता के नाम पर बार-बार कैपचा कोड दर्ज करने और मोबाइल पर देरी से ओटीपी आने की वजह से आम उपभोक्ता बेहद परेशान होते हैं। अधिकांश मामलों में जब तक कोई आम नागरिक इन डिजिटल औपचारिकताओं को पूरा कर पाता है, तब तक पलक झपकते ही सभी कंफर्म टिकट समाप्त हो जाते हैं और केवल वेटिंग लिस्ट ही हाथ लगती है।

रेलवे के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार वर्ष २००२ में जब भारत में पहली बार इंटरनेट के माध्यम से ट्रेनों में ऑनलाइन टिकट बुकिंग की शुरुआत की गई थी, तब प्रारंभिक दौर में रोजाना महज कुछ सौ टिकटों की ही बिक्री हो पाती थी। हालांकि बीते दो दशकों में डिजिटल इंडिया अभियान के तहत परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है और वर्तमान में देश की कुल आरक्षित रेल टिकटों का लगभग ८८ प्रतिशत हिस्सा अकेले आईआरसीटीसी के ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से ही बुक किया जा रहा है। इंटरनेट बुकिंग पर बढ़ती इसी निर्भरता को देखते हुए रेल मंत्रालय ने देश के विभिन्न रेलवे स्टेशनों पर संचालित होने वाले पारंपरिक रिजर्वेशन काउंटरों की संख्या में भी लगातार कटौती की है। इस रणनीतिक बदलाव के बीच नई अत्याधुनिक वेबसाइट का आना भारतीय रेलवे के डिजिटल आधुनिकीकरण की दिशा में एक युगांतरकारी कदम साबित होगा जो देश की परिवहन जीवनरेखा को और अधिक मजबूत बनाएगा।

Lalita Rajput

Lalita Rajput

इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।

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