ईरान की 'शर्तों' ने उड़ाई दुनिया की नींद: होर्मुज खोलने के बदले अमेरिका से मांगा बड़ा हिसाब, मुश्किल में फंसी ट्रंप सरकार!
होर्मुज जलडमरूमध्य संकट के बीच ईरान ने अमेरिका के सामने सख्त शर्तें रखी हैं। प्रतिबंध हटाने और गैर-डॉलर व्यापार की मांग से वैश्विक ऊर्जा संकट गहराया। चीन और इजरायल की प्रतिक्रिया भी शामिल।

Iranian President Masoud Pezeshkian
तेहरान/वॉशिंगटन:
पश्चिम एशिया में पिछले 17 दिनों से जारी भीषण संघर्ष ने अब पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था को हिलाकर रख दिया है। दुनिया के सबसे संवेदनशील व्यापारिक मार्ग, 'होर्मुज जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) को बंद करने के बाद ईरान ने अब इसे फिर से खोलने के लिए अमेरिका के सामने शर्तों का एक सख्त पुलिंदा पेश किया है। ईरान की सरकारी मीडिया 'तस्नीम न्यूज एजेंसी' के जरिए आई इन शर्तों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाले अमेरिकी प्रशासन को कूटनीतिक कश्मकश में डाल दिया है।
ईरान की चार प्रमुख शर्तें: कूटनीतिक दबाव
सुरक्षा विश्लेषकों का मानना है कि ईरान इस संघर्ष का उपयोग अपने लंबे समय से रुके हुए हितों को साधने के लिए कर रहा है। ईरान द्वारा पेश की गई संभावित शर्तों में निम्नलिखित बिंदु प्रमुख हैं:
- प्रतिबंधों का खात्मा: ईरान ने स्पष्ट किया है कि जब तक उस पर लगे आर्थिक प्रतिबंधों को हटाने की पक्की गारंटी नहीं मिलती, वह पीछे नहीं हटेगा।
- अमेरिकी सैन्य ठिकानों की वापसी: मध्य पूर्व (Middle East) से अमेरिकी सेना की मौजूदगी को पूरी तरह समाप्त करने की मांग की गई है।
- जब्त संपत्तियों की वापसी: विदेशों में फ्रीज की गई ईरानी संपत्ति और फंड को तुरंत मुक्त करने की शर्त रखी गई है।
- गैर-डॉलर व्यापार को मंजूरी: ईरान अब वैश्विक व्यापार में अमेरिकी डॉलर के वर्चस्व को चुनौती देते हुए अपनी करेंसी या अन्य माध्यमों से व्यापार करने की अनुमति चाहता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इन शर्तों का अंतिम लक्ष्य मध्य पूर्व में एक 'नई व्यवस्था' (New Order) स्थापित करना है, जहाँ अमेरिका का प्रभाव न्यूनतम हो।
ऊर्जा संकट और वैश्विक व्यापार पर खतरा
होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने से अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजारों में हाहाकार मचा हुआ है। चूँकि दुनिया का एक-तिहाई तेल इसी रास्ते से गुजरता है, इसके बंद होने का सीधा असर तेल की कीमतों और वैश्विक सप्लाई चेन पर पड़ रहा है। अमेरिकी नौसेना और ईरान के बीच किसी भी संभावित सैन्य टकराव को विश्लेषक 'विनाशकारी' मान रहे हैं, जो एक बड़े युद्ध का रूप ले सकता है।
इजरायल का रुख: 'युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार'
इस बीच, भारत में इजरायल के राजदूत रूवेन अजार ने एक महत्वपूर्ण बयान दिया है। सोमवार को पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने कहा कि यदि ईरान अपना आक्रामक रुख बदलता है, तो इजरायल युद्ध समाप्त करने के लिए तैयार है। अजार ने यह भी दावा किया कि इजरायली सैन्य कार्रवाई ने ईरान की मिसाइल दागने की क्षमता को काफी हद तक कम कर दिया है। फिलहाल, इजरायल ने बड़े पैमाने पर जमीनी आक्रमण (Ground Invasion) की संभावना से इनकार किया है।
चीन की मध्यस्थता और क्षेत्रीय हलचल
संकट के समाधान के लिए कूटनीतिक स्तर पर चीन भी सक्रिय हो गया है। मध्य पूर्व मामलों के लिए चीन के विशेष दूत जाई जून ने कुवैत और कतर के साथ गहन चर्चा की है। कुवैत ने स्पष्ट किया है कि वह इस युद्ध का हिस्सा नहीं बनना चाहता और शांतिपूर्ण समाधान का पक्षधर है। कुवैत ने क्षेत्र में शांति बहाली के लिए चीनी प्रयासों की सराहना की है और बीजिंग के साथ मिलकर काम करने की इच्छा जताई है।
कूटनीति या टकराव?
वर्तमान स्थिति ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को एक बड़ी परीक्षा में डाल दिया है। एक ओर वैश्विक दबाव है कि होर्मुज का रास्ता खुले ताकि ऊर्जा संकट समाप्त हो, और दूसरी ओर ईरान की ऐसी शर्तें हैं जो अमेरिका की क्षेत्रीय नीतियों के विपरीत हैं। आने वाले कुछ दिन यह तय करेंगे कि दुनिया एक बड़े आर्थिक मंदी की ओर बढ़ेगी या कूटनीति के जरिए शांति का रास्ता निकलेगा।

Lalita Rajput
इन्हें लेखन क्षेत्र में लगभग 5 वर्षों का अनुभव है। इस दौरान इन्होंने फाइनेंस, कैलेंडर और बिज़नेस न्यूज़ को गहराई से कवर किया है। इनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि वित्त से जुड़ी है—इन्होंने एमबीए (फाइनेंस) किया है और वर्तमान में फाइनेंस में पीएचडी कर रही हैं। जनवरी 2026 से ये दै. प्रातःकाल में कार्यरत हैं, जहाँ बिज़नेस, फाइनेंस, मौसम और भारतीय सीमाओं से जुड़े समाचार सरल, सटीक और व्यवस्थित ढंग से प्रस्तुत करती हैं।
